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दिल्ली घेराव की आहट पर रेलवे का बड़ा फैसला: आज दोपहर 2 बजे के बाद देशभर से दिल्ली व निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेनें होंगी रद

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 09 Oct 2026 12:58 PM (GMT+05:30)

रेलवे बोर्ड ने 10 अक्टूबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के दिल्ली घेराव के आह्वान के मद्देनजर दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन ...और पढ़ें

HighLights

  1. रेलवे बोर्ड ने सुबह 8:51 बजे देश के सभी जोनल रेलवे को भेजा आपातकालीन संदेश

  2. 10 अक्टूबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के दिल्ली कूच आह्वान से मचा हड़कंप

  3. यात्रियों को होगी परेशानी, राहत यह कि मिलेगा ट्रेन रिजर्वेशन का शत-प्रतिशत रिफंड

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। दिल्ली में एक बड़े सियासी टकराव और बड़े शक्ति प्रदर्शन की आशंका के बीच भारतीय रेलवे ने देश के इतिहास का संभवतः सबसे चौंकाने वाला और अप्रत्याशित कदम उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहे धरने और 10 अक्टूबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा दिए गए दिल्ली घेराव के राष्ट्रव्यापी आह्वान के मद्देनजर, रेलवे बोर्ड ने देश भर से नई दिल्ली और हजरत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली दर्जनों प्रमुख मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को अचानक रद करने का आदेश जारी कर दिया है। 

खास-खास

स्रोत से चलने वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें रद रहेंगी

सीधे प्रारंभिक स्टेशन से पहिए थामने का फरमान

कागजों पर स्टेशनों के बाहर 'ट्रैफिक जाम' की दलील

भीतर भीड़ रोकने की घेराबंदी, देश भर के लाखों मुसाफिर बेहाल।

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जंतर-मंतर पर टकराव के हालात

देश के सभी जोन को जारी हुआ पत्र

आधिकारिक परिपत्र में हालांकि स्टेशनों के आसपास ''भीषण सड़क यातायात जाम'' को इसका आधार बताया गया है, लेकिन दैनिक जागरण की विशेष पड़ताल में साफ हो चुका है कि यह पूरा कदम 10 अक्टूबर को देश भर से राजधानी कूच करने वाले हजारों-लाखों प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने की एक सुनियोजित प्रशासनिक चक्रव्यूह रचना है। इस एकतरफा फैसले ने पूरे देश के रेल नेटवर्क में भारी उथल-पुथल मचा दी है।

सुबह 8:51 बजे रेलवे बोर्ड का गोपनीय सर्कुलर

रेलवे बोर्ड के आंतरिक संदेश नेटवर्क (ICMS) पर शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 की सुबह ठीक 8:51 बजे कोचिंग निदेशालय (PAMCELL.RB) से एक अत्यंत गोपनीय व उच्च प्राथमिकता वाला निर्देश देश के सभी जोनल रेलवे को प्रेषित किया गया। यह पत्र सभी जोनल रेलवे के प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधकों (PCOM) और मुख्य यात्री परिवहन प्रबंधकों (CPTM) को सीधे भेजा गया था।

संभावित सड़क यातायात जाम के मद्देनजर फरमान

रेलवे बोर्ड के प्रधान कार्यकारी निदेशक/कोचिंग (PED/Coaching) द्वारा जारी पत्र संख्या DTP/2026/10/05 में सीधे शब्दों में फरमान सुनाया गया है कि '10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हज़रत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाकों में संभावित भीषण सड़क यातायात जाम (Severe Road Traffic Congestion) को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि आज, 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर दो बजे (2:00 PM) के बाद अपने प्रारंभिक स्टेशनों से शुरू होने वाली वे सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें, जो 10 अक्टूबर को प्रातः 04:00 बजे से दोपहर दो बजे के बीच नई दिल्ली अथवा हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली थीं, उन्हें स्रोत (Source) से ही निरस्त कर दिया जाए।'

रेलवे का 'इमीडिएट एक्शन'

यह आदेश सामान्य परिचालन आदेश नहीं था, बल्कि इसे 'इमीडिएट एक्शन' श्रेणी में रखा गया, जिससे दोपहर 2 बजे से पहले ही देश भर के टर्मिनल स्टेशनों पर गाड़ियों को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

पर्दे के पीछे जनसैलाब रोकने की व्यूहरचना

दैनिक जागरण की पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि, रेलवे प्रशासन ने दस्तावेजी तौर पर इसे केवल स्थानीय ट्रैफिक जाम और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया है। मगर प्रशासनिक और खुफिया गलियारों की असलियत कुछ और ही बयां कर रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को एक इनपुट भेजा था, जिसमें बताया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे धरने को समर्थन देने के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आह्वान पर देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग संगठित होकर दिल्ली आ रहे हैं।

क्या इसलिए लिया गया निर्णय?

नई दिल्ली और निज़ामुद्दीन स्टेशन मध्य दिल्ली, कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के ठीक मुहाने पर हैं। यदि 10 अक्टूबर की अलसुबह 4 बजे से दोपहर के बीच ये ट्रेनें दिल्ली में दाखिल होतीं, तो एक साथ लाखों की तादाद में लोग राजधानी के हृदय स्थल पर जमा हो जाते। ऐसी स्थिति में राजधानी की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती थी। इसी संभावित जनसैलाब और राजनीतिक घेराबंदी को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से ट्रेनों को उनके गृह स्टेशनों पर ही रोकने का निर्णय लिया गया।

कड़ा और अप्रत्याशित फैसला

रेलवे के वरिष्ठ परिचालन विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे के इतिहास में जब भी स्थानीय स्तर पर स्टेशन या शहर में कोई व्यवधान आता है, तो ट्रेनों को गाजियाबाद, आनंद विहार, दिल्ली सराय रोहिल्ला, मेरठ, फरीदाबाद या पलवल जैसे सेटेलाइट स्टेशनों पर ''शॉर्ट-टर्मिनेट'' (समय से पहले समाप्त) कर दिया जाता है या उनका रूट डाइवर्ट कर दिया जाता है। हालांकि इस मामले में न तो ट्रेनों का मार्ग बदला गया और न ही उन्हें दिल्ली के बाहरी स्टेशनों पर रोका गया, बल्कि सीधे स्रोत (Source Station) से ही पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। यह अपने आप में इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि प्रशासन एनसीआर की सीमाओं के इर्द-गिर्द भी प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा नहीं बनने देना चाहता था।

गरमायेगा सियासी पारा: विपक्ष व संगठन साधेंगे निशाना

फैसले की खबर अभी सार्वजनिक हुई है, लेकिन यह जैसे ही बाहर आएगी राजनीतिक माहौल गरमा जाएगा। कॉकरोच जनता पार्टी और जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी संगठनों ने इसे लोकतंत्र पर सीधा प्रशासनिक हमला करार देंगे तो संगठन के नेता सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठ रही असंतोष की आवाज घबराने का आरोप लगाएंगे । और मुद्दा यही बनेगा कि लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्टेशनों के बाहर किसी भी अप्रिय स्थिति, भगदड़ या अव्यवस्था से यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता थी। स्टेशन परिसर में लाखों लोगों के अचानक उतरने से स्थिति अनियंत्रित हो सकती थी, लिहाजा यह फैसला पूरी तरह से एहतियाती और जनहितैषी है।

देश भर के यात्रियों पर आफत, स्टेशनों पर बढ़ेगी परेशानी

राजनीतिक नफा-नुकसान से परे, इस आदेश का सबसे दर्दनाक असर उन लाखों सामान्य मुसाफिरों पर पड रहा है, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। पूर्वोत्तर, पूर्वी राज्यों (बिहार, बंगाल, झारखंड, ओडिशा), उत्तर भारत (पंजाब, उत्तर प्रदेश) और दक्षिण से इलाज के लिए एम्स आने वाले गंभीर मरीज, दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने जा रहे छात्र, जरूरी साक्षात्कारों के लिए निकले युवा और त्योहारी अवकाश में घरों को लौट रहे परिवार अचानक बीच रास्ते अथवा गृह स्टेशनों पर असहाय छोड़ दिए गए। अचानक हुए इस रद्दीकरण से प्रयागराज, कानपुर, पटना, लखनऊ, वाराणसी, हावड़ा, मुंबई, भोपाल और चंडीगढ़ जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर साफ असर दिखेगा।

प्रयागराज समेत ये ट्रेनें भी नहीं चलेंगी

प्रयागराज से दिल्ली जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, मानिकपुर से चलने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, कानपुर से चलने वाली श्रम शक्ति एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस को रद कर दिया गया है। ये ट्रेनें नहीं चलेंगी।

यात्री रिफंड के लिए ऐसे करें क्लेम

अचानक यात्रा निरस्त होने से परेशान यात्रियों के आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए रेलवे ने पूर्ण रिफंड की व्यवस्था लागू की है।

शून्य कटौती (100% रिफंड)

रेलवे द्वारा स्वतः ट्रेन रद्द किए जाने के कारण यात्रियों के किराए से किसी भी प्रकार का क्लर्कियल या कैंसिलेशन चार्ज नहीं काटा जाएगा।

ऑनलाइन ई-टिकट धारक

आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से बुक किए गए टिकटों का रिफंड स्वतः उसी बैंक खाते या माध्यम (UPI/कार्ड) में 3 से 5 कार्यदिवसों के भीतर जमा हो जाएगा। इसके लिए यात्रियों को अलग से टीडीआर (TDR) दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी।

विंडो (PRS) काउंटर टिकट

जिन यात्रियों ने आरक्षण खिड़की से भौतिक टिकट लिए हैं, वे अपनी ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से लेकर निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी भी कंप्यूटरीकृत पीआरएस काउंटर पर मूल टिकट सरेंडर करके शत-प्रतिशत नकद रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। रेलवे प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रभावित यात्रियों से अपील की है कि वे स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ लगाने के बजाय घर से निकलने से पूर्व रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 अथवा आधिकारिक पोर्टल पर अपनी ट्रेन की लाइव स्थिति अवश्य सत्यापित कर लें।

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