अब स्टेशनों पर नहीं होगी पानी की किल्लत... हवा के जरिए बनेगा पीने का पानी, रेलवे ने बनाया मेगा प्लान
रेलवे अब स्टेशनों पर पानी की किल्लत दूर करने के लिए हवा से पीने का पानी बनाएगा। इसके लिए सभी जोन में एटमॉस्फेरिक वाटर जेनरेटर (AWG) मशीनें लगाई जाएंगी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, प्रयागराज। अगर आप किसी ऐसे रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं जहां पानी की किल्लत है, तो घबराइए मत। जल्द ऐसे सभी रेलवे स्टेशनों पर पानी की कमी दूर करने के लिए रेलवे हवा से पीने का पानी बनाएगा।
रेल मंत्रालय ने सभी जोन को स्टेशनों पर ''एटमॉस्फेरिक वाटर जेनरेटर'' (हवा से पानी बनाने वाली मशीन''- एडब्ल्यूजी) लगाने को कहा है।
जमीन से पानी निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी
स्टेशनों, रेलवे अस्पतालों और स्टाफ कॉलोनियों में ऐसी मशीनें लगाई जाएंगी जो हवा में मौजूद नमी को सोखकर उसे शुद्ध पेयजल में बदल देंगी। एक मशीन एक दिन में लगभग एक हजार लीटर पानी बना सकती है। यह तकनीक पर्यावरण अनुकूल है, इससे जमीन से पानी निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसकी पहल वर्ष 2016 में शुरू हुई थी, इसे अब वृहद पैमाने पर स्थापित करने के लिए रेलवे बोर्ड के निदेशक अजय झा ने 15 मई को सभी जोन के लिए निर्देश जारी किया है। सिकंदराबाद और मुंबई में इस मशीन के ट्रायल के बाद अब उत्तर मध्य रेलवे में शंकरगढ़, चुनार, चोपन जैसे स्टेशनों पर इसे लगाया जा सकेगा।
बिजली से यह मशीन चलेगी और 24 घंटे शुद्ध पानी मिल सकेगा। दूर-दराज के इलाकों या फाटकों पर तैनात कर्मचारियों के लिए यह बेहतर विकल्प होगा। आने वाले समय में यात्रियों को स्टेशनों पर ''वाटर एटीएम'' की तरह ये जेनरेटर लगे हुए दिखेंगे। एनसीआर के सीनियर पीआरओ डॉ. अमित मालवीय ने बताया कि एडब्ल्यूजी मशीनों को लेकर मिले निर्देशों का पालन कराया जा रहा है।
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ऐसे काम करती है मशीन
यह मशीन विज्ञान के ''कंडेनसेशन'' (संघनन) सिद्धांत पर काम करती है, जैसे फ्रिज से निकली ठंडी बोतल के बाहर पानी की बूंदें जम जाती हैं।
इसकी कार्यप्रणाली चार चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले शक्तिशाली पंखे आसपास की नम हवा को अंदर खींचते हैं। इसके बाद हाई-ग्रेड फिल्टर हवा से धूल-मिट्टी साफ करते हैं।
तीसरे चरण में, इस साफ हवा को ठंडी नलियों (कूलिंग काइल्स) से गुजारा जाता है, जिससे हवा की नमी पानी की बूंदों में बदल जाती है। अंत में, इस पानी को बैक्टीरिया-मुक्त करने के लिए यूवी फिल्टर, स्वाद सुधारने के लिए कार्बन फिल्टर से गुजारकर इसमें जरूरी खनिज (कैल्शियम-मैग्नीशियम) मिलाए जाते हैं। 30% से अधिक नमी में यह सबसे बेहतरीन काम करती है।