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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

प्रयागराज के सरकारी गोशाला से मवेशी गायब, भरण-पोषण का बजट किसकी जेब में जा रहा, चल रहा गड़बड़झाला

Published: Sun, 05 Oct 2025 02:48 PM (GMT+05:30)

प्रयागराज के जसरा ब्लाक स्थित बाबा सुजावन देव आदर्श गोआश्रय स्थल में मवेशियों की संख्या में भारी अंतर पाया गया ...और पढ़ें

प्रयागराज में जसरा ब्लाक के देवरिया गांव स्थित बाबा सुजावन देव आदर्श गोआश्रय स्थल। जागरण
प्रयागराज में जसरा ब्लाक के देवरिया गांव स्थित बाबा सुजावन देव आदर्श गोआश्रय स्थल। जागरण

HighLights

  1. जसरा ब्लाक क्षेत्र के देवरिया गांव स्थित बाबा सुजावनदेव आदर्श गोआश्रय स्थल का मामला
  2. सीवीओ बोले, ब्लाक से आती है डिमांड, बीडीओ ने कहा चराने में बाहर ही छूट जाते हैं मवेशी

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यह है जसरा ब्लाक के देवरिया गांव की बाबा सुजावन देव आदर्श गोआश्रय स्थल। जुलाई में 246 मवेशियों के खर्च की डिमांड हुई। अगस्त में 244 पशुओं के चारे-भूसे का बजट मांगा गया। इसके बाद सितंबर में भी 244 मवेशियों के लिए भरण-पोषण की मांग करती हुई रिपोर्ट आई। इससे स्पष्ट है कि गोशाला में 244 या 246 मवेशी होने चाहिए। चार दिन पहले पशु चिकित्सक गोशाला पहुंचे तो उन्हें 215 मवेशी मिले।

फिर, शनिवार को दैनिक जागरण ने पड़ताल कराई तो पशुओं की संख्या 187 मिली। यानी दोनों बार पशुओं की संख्या कम। अब सवाल यह उठता है कि जब मवेशी नहीं हैं तो उनके भरण-पोषण का बजट किस बट्टे खाते में जा रहा है।

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हेरापफेरी की ओर इशारा कर रहे पशु आंकड़ों में भिन्नता

इस गोआश्रय स्थल में मवेशियों के आंकड़ों में यह भिन्नता भरण-पोषण के बजट में हेराफेरी की ओर इशारा कर रही है। गोशालाओं मवेशियों की संख्या कम ज्यादा होती रहती है, लेकिन इतना अंतर नहीं आता। 20 सितंबर को इस गोशाला के लिए 244 मवेशियों के भरण पोषण के बजट की डिमांड ब्लाक से भेजी गई थी।

गोपालकों ने गेट या दीवार टूटी न होने की कही बात

30 सितंबर को पशु चिकित्सक डा. एसबी सिंह पहुंचे तो 29 मवेशी कम मिले। पशु चिकित्सक ने तर्क दिया कि गोशाला का गेट टूटा था, जिससे कुछ मवेशी निकल गए। शनिवार को फिर जागरण की टीम पहुंची। गोपालकों ने मवेशियों की संख्या 187 बताई। यानी 57 पशु कम हो गए। यही नहीं गोपालकों ने कहीं कोई गेट या चहारदीवारी टूटी न होने की बात कही।

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पशुपालन विभाग ब्लाक अफसरों के सिर फोड़ रहा ठीकरा

फिलहाल, पशुपालन विभाग इस मामले में ब्लाक के अफसरों के सिर पर ठीकरा फोड़ रहा है। जबकि, ब्लाक के अधिकारी चराते समय मवेशियों के छूट जाने का तर्क दे रहे हैं। जबकि, गोशालाओं के मवेशियों को खुले में चराने पर पहले से ही रोक लगी है। यही नहीं अगर, संरक्षित मवेशी छूट गए थे तो उन्हें भी खोजने की कोई कवायद नहीं हुई।

क्या कहते हैं CVO 

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) डा. शिवनाथ यादव ने बताया कि गोशालाओं की डिमांड ब्लाक से ही आती है। अकेले पशु चिकित्सक नहीं, बल्कि गांव के सचिव भी रिपोर्ट लगाते हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही भरण-पोषण के बजट की डिमांग अग्रसारित की जाती है। इस मामले को दिखवाया जाएगा।

जसरा ब्लाक के बीडीओ ने कहीं ये बातें

जसरा के बीडीओ सुनील कुमार का कहना है कि देवरिया की गोशाला पहले से ही संवेदनशील है। इन दिनों प्रधान व सचिव के बीच मनमुटाव भी चल रहा है। अक्सर, मवेशियों को चराने के लिए छोड़ा जाता है, जिसमें मवेशी कम हो जाते हैं। फिर भी इस मामले को दिखवाया जाएगा।