भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और बेरोजगारी को लेकर प्रयागराज में आक्रोश, सड़क पर उतरे आक्रोशित प्रतियोगी छात्र
प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला। छात्रों ने लेखपाल और यूपीएसआई भर्ती ...और पढ़ें

प्रयागराज में विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक के विरोध में कैंडल मार्च निकालते प्रतियोगी छात्र। जागरण
HighLights
छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, सभा करके भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की मांग की
लेखपाल व यूपीएसआइ भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष दोबारा परीक्षा कराने की आवाज की बुलंद
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी के विरोध में गुरुवार को सैकड़ों प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रतियोगी छात्र संघर्ष मंच के बैनर तले आयोजित कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया और सरकार से भर्ती लेखपाल, यूपीएसआइ और एसएसजी जीडी भर्ती सहित अन्य भर्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा।
पुलिस ने छात्रों को हिंदू छात्रावास से आगे बढ़ने नहीं दिया
कैंडल मार्च का आयोजन कटरा स्थित मनमोहन पार्क से किया जाना था और इसे सुभाष चौराहा होते हुए आजाद पार्क तक ले जाने की योजना थी। हालांकि छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हिंदू छात्रावास से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद छात्र आजाद पार्क पहुंचे, जहां सभा आयोजित कर छात्रों ने अपनी मांगों को दोहराया।
लेखपाल, यूपीएसआइ भर्ती परीक्षा दोबारा हो
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष पांडेय ने कहा कि लेखपाल भर्ती, उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर (यूपीएसआइ) भर्ती तथा एसएससी कांस्टेबल जीडी भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने प्रतियोगी छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने मांग की कि लेखपाल और यूपीएसआइ भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक होने पर दोबारा परीक्षा कराई जाए। साथ ही यूपीएसआइ भर्ती का स्कोर कार्ड भी जल्द जारी किया जाए।
छात्रों ने लगाया आरोप
छात्रों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य और वर्षों की मेहनत का आधार हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके सपनों और विश्वास दोनों को आघात पहुंचाती है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन नहीं कर पा रही हैं, जिसके कारण बार-बार विवाद और सवाल खड़े हो रहे हैं।
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छात्रों के भविष्य को अनिश्चित बना रही धीमी प्रक्रिया
सभा में प्रतियोगी छात्रों ने कहा कि प्रदेश और देश भर में लाखों शिक्षित युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, पेपर लीक, परिणामों में कथित गड़बड़ियां और रिक्त पदों पर नियुक्तियों की धीमी गति उनके भविष्य को अनिश्चित बना रही है।
नियमित भर्तियां समय पर नहीं हो रहीं
सभा को संबोधित करते हुए छात्र नेताओं ने कहा कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के बावजूद नियमित भर्तियां समय पर नहीं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं, जिससे अभ्यर्थियों की आयु और अवसर दोनों प्रभावित होते हैं। छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता, समयबद्ध चयन प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
शांतिपूर्ण आंदोलन का मकसद
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य सरकार तथा संबंधित संस्थाओं तक युवाओं की चिंताओं को पहुंचाना है। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली का संकट भयावह रूप ले चुका है। पिछले नौ वर्षों में 91 से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामले सामने आये हैं, जिनसे लगभग दो करोड़ से ज्यादा छात्रों-युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। कई राज्यों में छात्र वर्षों से शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
छात्रों ने चेतावनी भी दी
कैंडल मार्च के दौरान छात्रों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया, रोजगार के अवसरों में वृद्धि और परीक्षा प्रणाली में सुधार के समर्थन में नारे लगाए। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
छात्र बोले-परीक्षा प्रक्रिया इतनी लंबी और भ्रष्ट
प्रतियोगी छात्रों ने कहा कि जहां भर्तियां निकलती भी हैं, वहां परीक्षा प्रक्रिया इतनी लंबी और भ्रष्ट हो चुकी है कि छात्रों की उम्र और उम्मीद दोनों खत्म होने लगती हैं। छात्रों ने कहा सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2025 के बीव केवल रेलवे में 84 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों की कमी आयी है। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 से 2022-23 के बीच सरकारी नौकरियों में लगभग 20 प्रतिशत गिरावट आयी। आशुतोष पांडेय कहा कि रोजगार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था युवाओं का अधिकार है और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।