यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Prayagraj News: नगर निगम की अरबों की जमीन पर अवैध कब्जा, खाली कराने के लिए बन रही सख्त योजना; जल्द होगी कार्रवाई
नजूल की जमीन पर तो बड़े पैमाने का कब्जा करके लोगों ने मकान बनवाया ही है। नगर निगम के अनुसार शहर के आठ जोन में बांट गया है। दो जोन में ही 365 बीघा जमीन ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। नजूल की जमीन पर तो बड़े पैमाने का कब्जा करके लोगों ने मकान बनवाया ही है। नगर निगम की 365 बीघा जमीन पर भी कब्जा करके आलीशान मकान बना लिया गया है। नगर निगम के अनुसार शहर के आठ जोन में बांट गया है। इसमें से महज दो जोन में ही 365 बीघा जमीन पर कब्जा किया गया है।
अन्य छह जोन की रिपोर्ट तैयार कि जाएगी तो 800 बीघा से अधिक जमीन पर लोग निगम की जमीन पर कब्जा करके बैठे हुए हैं। जिसकी कीमत अरबों में आंकी जा रही है।
इन क्षेत्रों की जमीन पर किया गया कब्जा
नगर निगम की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार जोन एक खुल्दाबाद 200 और जोन दो मुट्ठीगंज में 165 बीघा जमीन पर कब्जा किया गया है। इस जमीनों पर आवासीय और व्यावसायिक भवनों का निर्माण किया है। करेली, जीटीबी नगर, खुल्दाबाद, अटाला, चकिया, दायराशाह अजमल आदि क्षेत्रों में निगम की जमीन पर कब्जा किया गया है।
नगर निगम आने वाले दिनों में अपनी जमीन को खाली कराने के लिए सख्त कदम उठाने की योजना बना रहा है। सूत्रों की मानें तो नगर निगम की कब्जाई गई जमीन की रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजा जाएगी। नगर निगम नजूल विभाग की ओर से लोकसभा चुनाव के पहले नगर आयुक्त को रिपोर्ट दे दी गई थी।
10 हजार से अधिक भवनों का हो गया है निर्माण
मुट्ठीगंज और खुल्दाबाद जोन में नगर निगम की कब्जा की गई जमीन पर 10 हजार से अधिक मकान बन गए हैं। इसमें से 200 ऐसे लोगों के मकान है जो शासन और प्रशासन में प्रभावी हैं। कब्जा की गई जमीन पर पीडीए से मानचित्र पास कराए बिना ही आवासीय और व्यावसायिक भवन का निर्माण कर लिया गया है।
खबरें और भी
अपर नगर आयुक्त अरविंद कुमार राय के अनुसार, नगर निगम की जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जा किया गया है। कानून के जानकारों से इस मामले में सुझाव लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें- प्रयागराज के SRN अस्पताल में वार्ड बॉय व संविदा नर्स पर मुसीबत, 4 महीने से नहींं मिला वेतन; धरने पर बैठे कर्मचारी