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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महाकुंभ में भगदड़: हादसे के बाद डटा पुलिस प्रशासन, श्रद्धालुओं के लिए बनी थी जानलेवा स्थिति

Updated: Wed, 29 Jan 2025 07:21 AM (IST)

Maha Kumbh 2025 महाकुंभ में भगदड़ ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। संगम पर हुए हादसे में 17 श्रद्धालुओं की मौत और दर्जनों के घायल होने से श्र ...और पढ़ें

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में संगम पर हुआ दर्दनाक हादसा। जागरण
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में संगम पर हुआ दर्दनाक हादसा। जागरण

HighLights

  1. बढ़ती भीड़ के कारण हुई थी धक्कामुक्की
  2. श्रद्धालुओं को जहां जगह मिलती, वहीं कूदकर बचाने लगे अपनी जान

जागरण संवाददाता, महाकुंभ नगर। Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में संगम पर हुए दर्दनाक हादसे में 17 श्रद्धालुओं की मौत और दर्जनों के घायल होने के बाद प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। रात एक बजे बांध रोड पर भी संगम जैसी भगदड़ की स्थितियां बन गई थी। शास्त्री ब्रिज के नीचे पुलिस ने बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को काली मार्ग पर रोक दिया।

इससे दूसरे मार्ग पर पुल के नीचे भीड़ बढ़ती चली गई और धक्कामुक्की शुरू हो गई। सड़क किनारे आराम कर रहे श्रद्धालुओं के कारण स्थिति और बिगड़ गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि श्रद्धालु को जहां जगह मिलती, वहां कूदकर अपनी जान बचाने लगे। इसी बीच संगम क्षेत्र में भगदड़ मच गई, जिससे हालात नियंत्रण से बाहर हऐ गए। पुलिस ने तुरंत बैरिकेडिंग हटाकर लोगों को निकालना शुरू किया, लेकिन तब तक कई श्रद्धालु घायल हो चुके थे।

बढ़ते दबाव के बीच खोला गया शंकर विमान मंडपम मार्ग

भगदड़ जैसे हालात काली मार्ग पर बन गए थे। सैकड़ों श्रद्धालुओं का सामान भीड़ में खो गया। श्रद्धालुओं का दबाव इतना बढ़ गया कि जब लोगों ने वापसी करना शुरू किया तो स्थिति और भयावह हो गई। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने मेले के दौरान बंद रखे गए शंकर विमान मंडपम मार्ग को खोलने का निर्णय लिया।

अस्पताल में पड़ें शव। जागरण


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पुलिसकर्मियों की सूझबूझ से एक बड़ी दुर्घटना टल गई, वरना काली मार्ग और बांध रोड के जंक्शन पर भगदड़ में और ज्यादा श्रद्धालुओं की जान जा सकती थी। यह मार्ग खुलने की वजह से जो भीड़ काली मार्ग से वापसी कर रही थी वह बैरीकेडिंग हटने से डायवर्ट हुई और काली मार्ग पर कुछ दबाव कम हुआ, ऐसा नहीं होता तो बांध रोड और काली मार्ग के जंक्शन पर संगम की तरह भीषण हादसा हो सकता था।

महाकुंभ के दौरान इतनी बड़ी अव्यवस्था से श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। इस तरह की भगदड़ प्रशासन की लचर व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की नाकामी को दर्शाती है। पहले से योजना बनाकर बैरिकेडिंग और रास्तों का प्रबंधन किया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

पीपापुल में भीड़। जागरण


केंद्रीय अस्पताल में हड़कंप, लगातार आती रहीं एंबुलेंस

संगम क्षेत्र में भगदड़ के बाद केंद्रीय अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। ऐसे विकट स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के बावजूद मेडिकल स्टाफ स्थिति को संभालने में जुट गए। भगदड़ की जानकारी फ्लैशन होने के साथ ही एंबुलेंस लगातार संगम की ओर भेजी गईं। हर एक मिनट में एक एंबुलेंस घायलों को अस्पताल पहुंचा रही थी और फिर तेजी से वापस संगम की ओर लौट रही थी।

अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ती जा रही थी, लेकिन व्यवस्था सीमित होने के कारण डाक्टरों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को एसआरएन सहित अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया।

घायलों को अस्पताल पहुंचाती बचाव दल की टीम। जागरण


नागवासुकी मार्ग पर श्रद्धालुओं की सांसें अटकी

शास्त्री ब्रिज से नागवासुकी जाने वाले मार्ग पर भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। दारागंज चौराहे पर पुलिस ने श्रद्धालुओं को नागवासुकी की ओर जाने दिया, लेकिन वापसी करने वालों को रोक दिया। उन्हें जबरन संगम की ओर डायवर्ट कर दिया गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पैदल चलना तो दूर, खिसकना भी मुश्किल हो गया।

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एक तरफ लोग भीड़ में दबते जा रहे थे, तो दूसरी ओर पुलिस लगातार श्रद्धालुओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही थी। घुटन और भीड़ के दबाव के कारण श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। परेशान होकर कई श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र में जगह-जगह लगी बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और इधर-उधर भागने लगे।