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    Indian Railways : ट्रेन व रेलवे स्टेशनों पर 'ड्राप' नहीं होगी कॉल, सिग्नल कमजोर होने पर लगेगा लाखों का जुर्माना

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 23 May 2026 07:59 PM (GMT+05:30)

    रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों और स्टेशनों पर कॉल ड्रॉप की समस्या खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कमजोर नेटवर्क पर मोबाइल सेवा प्रदाताओं पर लाखों का जुर्म ...और पढ़ें

    एक वर्ष में दो चरणाें में 95 प्रतिशत रूट पर होगा नेटवर्क का कवरेज

    एक वर्ष में दो चरणाें में 95 प्रतिशत रूट पर होगा नेटवर्क का कवरेज

    HighLights

    1. एक वर्ष में दो चरणाें में 95 प्रतिशत रूट पर होगा नेटवर्क का कवरेज

    2. -71 से -85 डीबीएम को ही माना जाएगा शत-प्रतिशत विश्वसनीय सिग्नल

    अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। Indian Railways ट्रेन में यात्रा के दौरान मोबाइल सिग्नल गायब होना या कॉल कट जाने की समस्या अब नहीं रहेगी। रेलवे बोर्ड ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाया है। अगर रेल मार्ग, स्टेशनों या प्लेटफार्म पर नेटवर्क कमजोर मिला तो मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी (रिलायंस जियो) पर लाखों रुपये का जुर्माना ठोंका जाएगा।

    रनिंग, रेल स्टाफ को सिग्नल कम होने से होती है परेशानी 

    वर्तमान में देश के कई रेल खंडों और जंक्शनों पर सिग्नल की उपलब्धता मानकों से काफी कम है। इससे स्टेशन मास्टर, ड्राइवर, गार्ड और मेंटेनेंस स्टाफ जैसे रेल कर्मियों को आपसी संवाद में भारी दिक्कत आती है, जिसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन और सुरक्षा पर पड़ता है। इसी को देखते हुए रेलवे अब देशभर में 'संयुक्त सर्वेक्षण' कर नेटवर्क की ताकत जांचेगा।

    सिग्नल उपलब्धता के लिए समय-सीमा तय

    रेलवे ने सिग्नल उपलब्धता के लिए समय-सीमा तय की है। प्रथम चरण (शुरुआती छह माह) में रेल खंडों में कम से कम 92.5% सिग्नल उपलब्धता अनिवार्य है। द्वितीय चरण (छह माह के बाद) नेटवर्क कवरेज को बढ़ाकर 95% करना होगा। कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्रों में 100% कवरेज का लक्ष्य है।

    क्या है मानक?

    यदि किसी भी सेक्शन में कवरेज 80% से कम पाई गई, तो इसे गंभीर चूक मानकर तत्काल दंड दिया जाएगा। काल ड्राप रोकने के लिए सिग्नल की ताकत -110 डीबीएम (डेसीबल मिलिवाट) हुई, तो यह जुर्माने की श्रेणी में आएगा, जबकि -71 से -85 डीबीएम को शत-प्रतिशत विश्वसनीय सिग्नल माना जाएगा। कुल काल में से काल ड्राप का औसत 2% या उससे कम होना चाहिए। यानी 100 में से दो से ज्यादा काल अपने आप नहीं कटनी चाहिए।

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    रेलयात्रियों को होगा सीधा फायदा

    Indian Railways यह आदेश मुख्य रूप से रेलवे के उन क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) सिम कार्ड्स के लिए है, जिसका इस्तेमाल रेलवे अधिकारी, ड्राइवर, गार्ड, स्टेशन मास्टर व अन्य कर्मचारी करते हैं। नेटवर्क बढ़ाने के लिए अब जब कंपनी पटरियों के किनारे नए टावर लगाएगी, तो इसका सीधा फायदा आम यात्रियों को भी मिलेगा।

    उपभोक्ताओं को भी बेहतर सिग्नल मिलेंगे 

    ट्रेनों के रास्तों पर 95% समय बेहतर सिग्नल और प्लेटफार्म पर कदम रखते ही फुल सिग्नल मिलना जरूरी होगा। अगर रेल पटरी के किनारे आधा किलोमीटर (500 मीटर) तक सिग्नल गायब मिला, तो उसे 'डार्क जोन' माना जाएगा और कंपनी के बिल में पांच से 10 प्रतिशत कटौती की जाएगी। साझा टावर व्यवस्था और इंट्रा-सर्कल रोमिंग (अपने आपरेटर का नेटवर्क न होने पर किसी दूसरी कंपनी के मोबाइल टावर का उपयोग करने की अनुमति) के चलते बीएसएनएल, एयरटेल और वीआइ के उपभोक्ताओं को भी बेहतर सिग्नल मिलने लगेंगे।

    क्या कहते हैं एनसीरआर के सीपीआरओ?

    Indian Railways इस संबंध में उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि यदि कंपनी काल सेटअप या काल ड्राप के दो प्रतिशत से अधिक रहा तो उस पर अलग से जुर्माना लगेगा।