रेलवे बोर्ड का नया नियम : ट्रेन दुर्घटनाओं के बाद सिर्फ सजा नहीं, हादसे की असली वजह भी तलाशी जाएगी
रेलवे बोर्ड ने ट्रेन दुर्घटनाओं की जांच के तरीके में बड़ा बदलाव किया है, अब सिर्फ दोषी खोजने के बजाय हादसे की असली वजह पर ध्यान दिया जाएगा। नई नीति के ...और पढ़ें

भारतीय रेलवे ने दुर्घटना संभावित मामलों में अपना नजरिया बदला है।
HighLights
प्रारंभिक विभागीय जांच पहले की तरह 10 दिनों में ''पार्ट-बी'' रिपोर्ट को 30 दिनों में देना अनिवार्य
सिस्टम की हर तकनीकी खामी, सिग्नलिंग की गड़बड़ी या ट्रैक मैनेजमेंट की चूक आएगी सामने
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रेल दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन हादसों की विभागीय जांच के पुराने ढर्रे को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। इसके तहत अब जांच के बुनियादी नजरिए में ही बड़ा बदलाव कर दिया गया है।
किसी कर्मी पर दोष मढ़ दिया जाता था
पहले जब भी कोई बड़ा ट्रेन हादसा (कंसीक्वेशल ट्रेन एक्सीडेंट) होता था, तो जांच कमेटियों का पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर रहता था कि 'दोषी कौन है'? किसी कर्मचारी पर जिम्मेदारी डाल दी जाती थी, उस पर कार्रवाई होती थी और बात वहीं खत्म मान ली जाती थी। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा।
अब हादसे की असली वजह पता लगाना होगा
रेलवे बोर्ड ने साफ कहा है कि सिर्फ किसी को दोषी ठहराने से काम नहीं चलेगा। अब जांच में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर देना होगा कि 'हादसा क्यों हुआ'? यानी हादसे की असली वजह (रूट काज) क्या थी, यह पता लगाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि रेलवे हादसों की जड़ तक जाकर लापरवाही को हमेशा के लिए खत्म कर सके।
सभी जोनल रेलवे जीएम को निर्देश जारी
रेलवे बोर्ड के पीईडी यानी प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सेफ्टी) उपिंदर सिंह ने देश के सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों (जीएम) को निर्देश जारी किया है कि अब किसी भी दुर्घटना के बाद जांच कमेटी को अपनी मुख्य रिपोर्ट के साथ 'पार्ट-बी' (विस्तृत दुर्घटना अध्ययन एवं विश्लेषण रिपोर्ट) को भी जोड़ना होगा। इसमें जांच टीम को तकनीकी और इंसानी चूक का गहराई से पोस्टमार्टम करना होगा। उन्हें यह स्पष्ट लिखना होगा कि सिस्टम में कहां कमी रह गई थी और उसे दुरुस्त करने के लिए क्या तकनीकी या प्रक्रियात्मक बदलाव करने की जरूरत है।
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हर छोटी तकनीकी खामी रिकार्ड होगी
पीईडी (सेफ्टी) उपिंदर सिंह ने बताया कि सिस्टम की हर छोटी से छोटी तकनीकी खामी, सिग्नलिंग की गड़बड़ी या ट्रैक मैनेजमेंट की चूक को रिकार्ड पर लाया जाएगा और उसे हमेशा के लिए ठीक किया जाएगा। हादसे के बाद प्रारंभिक विभागीय जांच को हमेशा की तरह सिर्फ 10 दिनों (डी 10) के भीतर ही पूरा करना होगा। हादसे के असली कारणों और उससे जुड़े तकनीकी सुधारों का पूरा खाका तैयार करने यानी 'पार्ट-बी' रिपोर्ट को अंतिम रूप देने और सक्षम अधिकारी से मंजूर कराने के लिए रेलवे को कुल 30 दिनों (डी 30) का समय मिलेगा।