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    गुप्त नवरात्र 15 से 23 जुलाई तक, कर्क राशि में गुरु-चंद्रमा का संचरण पुण्यकारी; मठ-मंदिरों में जनकल्याण को साधना करेंगे संत

    By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 09 Jul 2026 02:26 PM (IST)

    गुप्त नवरात्र 15 से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी, जिसमें कर्क राशि में गुरु और चंद्रमा का संचरण अत्यंत पुण्यकारी होगा। संत और सनातन धर्मावलंबी मां दुर्गा की ...और पढ़ें

    गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा नौका पर आसीन होकर आएंगी और गज से लौटेंगी।

    गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा नौका पर आसीन होकर आएंगी और गज से लौटेंगी।

    HighLights

    1. पुष्य नक्षत्र में गुप्त नवरात्र का शुभारंभ होगा

    2. मां दुर्गा की साधना आरंभ करेंगे संत-सनातनी

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक शक्ति जागृत करने का कालखंड गुप्त नवरात्र आषाढ़ शुक्लपक्ष की प्रतिप्रदा 15 जुलाई से आरंभ होगी। आत्मसंयम का पालन करके संत और सनातन धर्मावलंबी गुप्त साधना-उपासना से मां दुर्गा को प्रसन्न करने का प्रयत्न करेंगे।

    नौ दिवसीय गुप्त नवरात्र 

    नौ दिवसीय नवरात्र 23 जुलाई तक चलेगी। पुष्य नक्षत्र में नवरात्र का शुभारंभ होगा। उक्त तिथि पर कर्क राशि में गुरु और चंद्रमा का संचरण होना अत्यंत पुण्यकारी है। मां दुर्गा नौका पर आसीन होकर आएंगी और गज से लौटेंगी। सनातन धर्म के मर्मज्ञों के अनुसार गुप्त नवरात्र में जप-तप करने वाले साधक को मानसिक स्थिरता, अद्भुत आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होगी।

    तंत्र साधना के लिए गुप्त नवरात्र महत्वपूर्ण

    सनातन धर्मावलंबियों के लिए मां दुर्गा की स्तुति के लिए चार कालखंड है। पौष, चैत्र, आषाढ़ व आश्विन मास में नवरात्र पड़ती हैं। सभी शुक्लपक्ष की प्रतिप्रदा से आरंभ होती हैं। पौष व आषाढ़ की नवरात्र गुप्त होती हैं। जो तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। यह संतों की साधना का श्रेष्ठ कालखंड होता है। घट स्थापना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। तीर्थराज प्रयाग में मां आलोपशंकरी, मां ललिता देवी, मां कल्याणीदेवी, मां ललिता मनोकामेश्वरी देवी, मां कालीबाड़ी मंदिर, कैवल्यधाम आश्रम, श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा आश्रम, श्रीनिरंजनी अखाड़ा आश्रम में संत प्रवास करके मां दुर्गा की गुप्त साधना में लीन रहेंगे।

    चार नवरात्र मनाने का विधान : प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री 

    बीएचयू में ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री के अनुसार सनातन धर्म में चार नवरात्र मनाने का विधान है। सभी 90-90 दिनों के अंतराल में आती हैं। भ्रम के कारण तमाम लोग माघ मास की प्रतिप्रदा से गुप्त नवरात्र मनाते हैं, जो गलत है। पौष मास की प्रतिप्रदा से गुप्त नवरात्र मनानी चाहिए। श्रीधर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार बारिश के मौसम से प्रकृति को नया स्वरूप मिलता है। इसमें मां दुर्गा की स्तुति करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। नवरात्र व्रत के साधक को अपने अंदर व्याप्त काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार जैसे शत्रुओं का नाश करने की कामना करना चाहिए।

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    संयमित रहकर करें साधना : श्रीधरानंद

    श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत व द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के अनुसार गुप्त नवरात्र में साधना के लिए संत मंदिर आते हैं। सिद्धि प्राप्ति के लिए मां ललिता मनोकामेश्वरी देवी की स्तुति में लीन रहते हैं। गुप्त नवरात्र में बाहरी आडंबर से इतर साधक के भीतर शक्ति का जागरण होता है। श्रद्धालु क्षमता के अनुसार निराहार, फलाहार या एक समय भोजन कर व्रत रख सकते हैं। इस नवरात्र में संयम, मौन, ब्रह्मचर्य और नियमों का विशेष महत्व होता है।

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    नुशासन का विशेष महत्व : हरिचैतन्य

    टीकरमाफी आश्रम के प्रमुख महंत स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी के अनुसार गुप्त नवरात्र में अनुशासन का विशेष महत्व होता है। प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर देवी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद मंत्र जप, ध्यान और पाठ किया जाता है। दुर्गा कवच, शतनाम पाठ और विशेष मंत्रों का नियमित जाप रोग-शोक से मुक्ति, मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि करता है।

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    मानसिक पूजा का है महत्व : यमुना पुरी

    श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत यमुना पुरी बताते हैं कि चैत्र और शारदीय नवरात्र की तुलना में गुप्त नवरात्र में देवी की साधाना ज्यादा कठिन होती है। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाती है इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इन नवरात्र में मानसिक पूजा का महत्व है। वाचन गुप्त होता है, लेकिन सतर्कता भी आवश्यक है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि गुप्त नवरात्र केवल तांत्रिक विद्या के लिए ही होते हैं। 

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    पवित्रता का है विशेष महत्व : घनश्यामाचार्य

    जगदगुरु स्वामी घनश्यामाचार्य के अनुसार हर नवरात्र में मानसिक और शारीरिक पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। गुप्त नवरात्र में उसका अधिक ध्यान रखा जाता है। साधक के मन में भूल से भी किसी के प्रति गलत भाव नहीं आना चाहिए। ऐसा होने पर साधना व्यर्थ हो जाती है। यही कारण है कि संत एकांतवास में साधना करते हैं। 

    कलश स्थापित कर करें आह्वान

    पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर मां शक्ति का आह्वान करना चाहिए। मूर्ति स्थापना के बाद मां दुर्गा को लाल सिंदूर, लाल चुन्नी चढ़ाई जाती है। इसके बाद नारियल, केले, सेब, तिल के लडडू, बताशे चढ़ाएं और लाल गुलाब के फूल भी अर्पित करें। गुप्त नवरात्रि में सरसों के तेल के ही दीपक जलाकर ऊं दुं दुर्गायै नमः का जाप करना चाहिए।

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