स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ मानहानि का मामला प्रयागराज में दाखिल, ब्राह्मण की कुछ उप जातियों पर गलत टिप्पणी का आरोप
स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ प्रयागराज जिला अदालत में ब्राह्मणों की उपजातियों पर टिप्पणी को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग ...और पढ़ें

स्वामी रामभद्राचार्य। जागरण आर्काइव
HighLights
प्रयागराज की मजिस्ट्रेट अदालत ने विपक्षी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है
परिवाद चित्रकूट के तुलसी पीठाधीश्वर के बयान के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की ओर से ब्राह्मण समाज की कुछ उप जातियों को लेकर दिए गए बयान के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रयागराज की मजिस्ट्रेट अदालत ने मामले में केस रजिस्टर्ड कर, विपक्षी को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
स्वामी रामभद्राचार्य के प्रसारित वीडियो से जुड़ा मामला
मामला स्वामी रामभद्राचार्य के एक प्रसारित वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में उन्होंने ब्राह्मण समाज की कुछ उप जातियों का जिक्र करते हुए टिप्पणी की थी। उन्होंने उपाध्याय, पाठक, चौबे, त्रिगुणायक और दीक्षित जैसी उप जातियों को लेकर कहा था कि ब्राह्मण समाज इन उप जातियों में अपनी बेटियों की शादी नहीं करता।
अदालत में परिवाद दाखिल
बयान सामने आने के बाद करछना प्रयागराज निवासी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी से उनके समाज और समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और मानहानि हुई। उन्होंने पहले पुलिस के स्तर पर कार्रवाई का प्रयास किया गया। इसके बाद अदालत में परिवाद दाखिल करते हुए मांग की कि विपक्षी को तलब कर दंडित किया जाए। अदालत ने परिवाद को रजिस्टर करने एवं विपक्षी को नोटिस भेजने का आदेश दिया। मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।
कौन हैं स्वामी रामभद्राचार्य?
बताया गया है कि स्वामी रामभद्राचार्य रामानंद संप्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानंदाचार्य में से एक हैं। वह 1988 से इस पद पर हैं। चित्रकूट स्थित तुलसी पीठ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के संस्थापक व आजीवन कुलाधिपति हैं। एक प्रख्यात संस्कृत विद्वान, रचनाकार और बहुभाषी संत हैं। उन्होंने 100 से अधिक पुस्तकें भी लिखी हैं।
