इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और सीट कटौती के विरोध में छात्र आंदोलित, पैदल मार्च निकाला व रास्ताजाम किया
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों की विभिन्न मांगों को लेकर नौवें दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। मंगलवार को बड़ी संख्या में एकजुट होकर छात्रों ने मार्च निकाला और रास्ताजाम किया।
HighLights
छात्रों का नवें दिन भी आमरण अनशन जारी रहा
आठवें दिन एक और छात्र की तबीयत बिगड़ गई थी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और सीटों में कटौती समेत विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया। नौ दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों के समर्थन में बड़ी संख्या में छात्र परिसर में जुटे।
रास्ताजाम से यातायात प्रभावित
छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकालने के बाद सड़क पर पहुंचकर रास्ताजाम कर दिया। इससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि वे 10 जुलाई से फीस वृद्धि और सीट कटौती के विरोध में धरना दे रहे हैं, लेकिन लंबे समय से आंदोलन चलने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं ले रहा है।

छात्र महाजुटान का किया था आह्वान
मंगलवार सुबह आंदोलनकारियों की ओर से छात्र महाजुटान का आह्वान किया गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र आमरण अनशन स्थल पर पहुंचे और आंदोलन के समर्थन में नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला। आमरण अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सोमवार को आंदोलन के दौरान आमरण अनशन कर रहे हरिओम की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बावजूद आंदोलनकारी छात्रों ने मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।
आमरण अनशन पर छात्र डटे हैं
वर्तमान में सच्चिदानंद यादव, दीपक और विवेक आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि लगातार उपवास के कारण अनशनकारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मांगों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
छात्र नेता आयुष महात्मा ने कहा कि आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद मांगों की अनदेखी किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मंगलवार को मार्च और चक्का जाम के दौरान छात्रों की संख्या बढ़ने से आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का संदेश गया। छात्रों ने कहा कि फीस वृद्धि और सीट कटौती से जुड़े मुद्दों पर समाधान नहीं होने तक आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
छात्रों ने निकाला फ्रीडम मार्च
स्त्री विरोधी अपराधों के खिलाफ पिंजरा तोड़ अभियान के तहत दिशा छात्र संगठन समेत विभिन्न प्रगतिशील छात्र संगठनों ने मंगलवार को फ्रीडम मार्च निकाला। मार्च की शुरुआत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास से हुई। छात्र-छात्राएं केपीयूसी, बालसन चौराहा और इंडियन प्रेस चौराहा होते हुए आजाद प्रतिमा तक पहुंचे। मार्च में सैकड़ों छात्राओं, छात्रों और नागरिकों ने हिस्सा लिया। अंजलि ने कहा कि दिल्ली और बीएचयू की छात्राओं के संगठित प्रतिरोध ने स्त्री अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी है।
महिलाओं को निजी फैसलों में पूरी स्वतंत्रता नहीं
उन्होंने कहा कि अपराधों के लिए महिलाओं के पहनावे, मोबाइल या आधुनिकता को जिम्मेदार ठहराना पितृसत्तात्मक सोच है। उन्होंने दावा किया कि 2023 में देश में चार लाख से अधिक स्त्री विरोधी अपराध दर्ज हुए, जबकि बड़ी संख्या में मामले सामाजिक दबाव और लोकलाज के कारण सामने नहीं आते। दिशा छात्र संगठन की अवनी ने कहा कि महिलाओं को आज भी पेशे, पहनावे और जीवनसाथी जैसे निजी फैसलों में पूरी स्वतंत्रता नहीं है।
स्त्री स्वतंत्रता के सामने गंभीर चुनौतियां
धार्मिक कट्टरता, रूढ़िवादी सोच और बाजारवादी संस्कृति स्त्री स्वतंत्रता के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और सुरक्षित सामाजिक वातावरण के लिए व्यापक आंदोलन की जरूरत बताई। सौम्या, पूजा, शिवानी, अंजना सहित सैकड़ों की संख्या में छात्राएं व छात्र शामिल हुए।
