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    इलाहाबाद HC में वकालतनामे तथा मेमो ऑफ अपियरेंस दाखिल होना बंद, अधिवक्ता कल्याण स्टांप की अनुपलब्धता बना कारण

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 21 May 2026 07:30 PM (GMT+05:30)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट में अधिवक्ता कल्याण स्टांप की अनुपलब्धता के कारण वकालतनामा और मेमो ऑफ अपियरेंस स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। इससे नए मुकदमों का दाखि ...और पढ़ें

    इलाहाबाद हाई कोर्ट अधिवक्ता कल्याण स्टांप का संकट है।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट अधिवक्ता कल्याण स्टांप का संकट है।

    HighLights

    1. महानिबंधक कार्यालय अंडरटेकिंग बिना स्वीकार करने से कर रहा इन्कार

    2. दाखिल होने वाले नये मुकदमों में टिकट लगाने के आश्वासन की अर्जी देने पर छूट 

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट में अधिवक्ता कल्याण स्टांप की अनुपलब्धता के कारण महानिबंधक कार्यालय वकालतनामा व मेमो आफ अपियरेंस स्वीकार नहीं कर रहा है। इससे इनका दाखिला ठप है। महानिबंधक की ओर से 18 मई को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जब तक अधिवक्ता कल्याण स्टांप छप कर नहीं आ जाता तब तक दाखिल होने वाले नये मुकदमों में टिकट की उपलब्धता पर इसे लगाने के आश्वासन की अर्जी देने पर छूट होगी। 

    यह अर्जी अधिवक्ता या वादकारी द्वारा दाखिल की जाएगी, लेकिन इसमें (अधिसूचना में) वकालतनामे व मेमो आफ अपियरेंस का जिक्र नहीं है। केंद्र सरकार के अधिवक्ता मेमो आफ अपियरेंस दाखिल करते हैं। इसमें अधिवक्ता कल्याण स्टांप अनिवार्य है। राज्य सरकार समय से स्टांप जारी करने में विफल रही है और पिछले 15 दिन से यह नहीं मिल रहा है।

    हाईकोर्ट में कोई भी अर्जी या अथारिटी दाखिल करने पर अधिवक्ता कल्याण स्टांप लगाना अनिवार्य है। अब टिकट नहीं मिल रहा तो काम प्रभावित हो रहा है। वकीलों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वकालतनामा या मेमो आफ अपियरेंस दाखिल न हो पाने के कारण अधिवक्ता का नाम काजलिस्ट में नहीं छपेगा और वे सूचना न होने के कारण अदालत में नहीं पहुंच सकेंगे। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई बाधित होगी अथवा अदालत के एकपक्षीय आदेश से अधिवक्ता का करियर प्रभावित होगा।

    बार कौंसिल की अधिवक्ताओं की भविष्य निधि योजना को राज्य सरकार ने मंजूरी दी थी। इसके बाद फंड बनाया गया। इसमें धन जमा करने के लिए हर वकालतनामे व मेमो आफ अपियरेंस में 10 रुपये का अधिवक्ता कल्याण स्टांप जारी किया गया। मुख्य न्यायाधीश की सहमति से हाई कोर्ट व सभी जिला अदालतों में लागू किया गया।

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    हर साल राज्य सरकार स्टांप जारी कर ट्रेजरी से स्टांप वेंडर को इसे उपलब्ध कराती है। अभी तक स्टांप जारी नहीं होने से अधिवक्ता कल्याण योजना को लेकर संकट पैदा हो गया है। इसी फंड से मृत अधिवक्ताओं के परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता भी दी जाती है और नये वकीलों को स्टाइपेंड देंने की योजना घोषित की गई थी, जो अधर में है।

    आदर्श अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सभाजीत सिंह व महासचिव पीयूष त्रिपाठी ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग से अधिवक्ता कल्याण स्टांप शीघ्र जारी करने की मांग की है।