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स्पेशल टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखना वैध, इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए खारिज की याचिका

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 01 Oct 2026 04:43 PM (GMT+05:30)Updated: Thu, 01 Oct 2026 07:24 PM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पेशल टीईटी से शिक्षा मित्रों को बाहर रखने के सरकारी फैसले को वैध ठहराया है। कोर्ट ने 221 शिक्षा मित्रों की याचिकाएं खारिज की।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. एकलपीठ ने वसीम अहमद व 220 अन्य की याचिकाएं खारिज की

  2. एकलपीठ ने माना कि यह अनुच्छेद 14-16 का उल्लंघन नहीं

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पेशल टीईटी (टीईटी) परीक्षा से शिक्षामित्रों को बाहर रखने संबंधी सरकार के फैसले को वैध ठहराते हुए 221 शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने गुरुवार को वसीम अहमद व 220 अन्य की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 14 तथा 16 के उल्लंघन का आरोप नहीं टिकता। कोर्ट ने माना कि शिक्षामित्रों की कानूनी स्थिति नौकरी कर रहे शिक्षकों से अलग है और संविधान राज्य से उस अंतर को खत्म करने के लिए नहीं कहता जो किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित हो।

तीन सितंबर 2026 को विज्ञापन जारी हुआ

याचियों का कहना था कि वे लगभग 26 साल से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार ने दो सितंबर 2026 को शासनादेश जारी कर उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज को स्पेशल टीईटी कराने का निर्देश दिया था। तीन सितंबर 2026 को विज्ञापन जारी हुआ। इसके तहत परीक्षा तीन नवंबर 2026 से प्रस्तावित है। 

याचियों ने कहा- उन्हें भी मौका मिलना चाहिए

याचियों के अनुसार शासनादेश में स्थानीय निकाय के शिक्षकों, राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थानों के शिक्षकों, एडेड स्कूलों के शिक्षकों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्लयूएसएन) के लिए संविदा/दैनिक वेतन पर लगे विशेष शिक्षकों को तो स्पेशल टीईटी में शामिल किया गया, लेकिन उन्हें नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र मामले में टीईटी अनिवार्य किया और इन सर्विस शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है, ऐसे में उन्हें भी मौका मिलना चाहिए।

राज्य सरकार और आयोग का तर्क

राज्य सरकार और आयोग की ओर से कहा गया कि स्पेशल टीईटी आरटीई एक्ट की धारा 23 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में केवल इन सर्विस शिक्षकों के लिए है। शिक्षा मित्र नियमित शिक्षक नहीं हैं। उनकी स्थिति अलग है। नियमित टीईटी दो, तीन और चार जुलाई 2026 को हुआ था, जिसमें 19,94,661 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इसका रिजल्ट 26 अगस्त 2026 को घोषित हुआ। याची उसमें शामिल हो सकते थे, लेकिन नहीं हुए।

कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने माना कि दो सितंबर 2026 का सरकारी आदेश आरटीई एक्ट की धारा 23 और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों पर आधारित है। इन-सर्विस शिक्षकों और नान-सर्विस व्यक्तियों के बीच वर्गीकरण का स्पष्ट आधार है और इसका उद्देश्य भी वैध है। यह नियुक्ति का अधिकार नहीं देता, बल्कि निर्धारित अवधि में योग्यता पूरी करने में मदद करता है। स्पेशल टीईटी में सिर्फ वही शिक्षक शामिल हो सकते हैं, जो सरकारी नौकरी पाकर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।

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