कुएं में धक्का देने वाली दोषी महिला की अपील इलाहाबाद HC ने खारिज की, चार साल की सजा बरकरार रखी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 42 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज करते हुए कुएं में धक्का देने की दोषी फूलमती की ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
कानपुर जनपद के मामले में हाई कोर्ट ने 42 साल बाद सुनाया निर्णय
अपीलार्थी ने 1982 में सत्र न्यायालय कानपुर के फैसले को चुनौती दी थी
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 42 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज करते हुए हत्या के प्रयास की दोषी फूलमती (अपीलार्थी) की चार साल की सजा को बरकरार रखा है। यह आदेश न्यायमूर्ति वानी रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने पारित किया है। अपीलार्थी ने 1982 में सत्र न्यायालय कानपुर के फैसले को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने उसे आइपीसी की धारा 307 में चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
क्या है पूरा मामला?
मुकदमे से जुड़े संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि वादी मुकदमा गोविंदी देवी ने अपनी पड़ोसी फूलमती के जरिए लाल बंगला स्थित सुनार के पास 500 रुपये में जेवर गिरवी रखे थे। सात मई 1980 को दोनों जेवर छुड़ाकर घर लौट रही थीं। शाम को कुष्ठ अस्पताल के कुएं के पास आराम करने के बहाने फूलमती ने गोविंदी देवी को जेवर लूटने की नीयत से कुएं में धकेल दिया। गोविंदी दीवार पकड़कर चिल्लाई तो लक्ष्मी, रामनाथ और फूल सिंह सहित राहगीरों ने रस्सी-डंडे से उसे बाहर निकाला।
जमानतदारों के खिलाफ कार्रवाई हुई
मेडिकल में कलाई की हड्डी टूटी मिली। अभियुक्त की अपील हाई कोर्ट ने छह जुलाई 1982 को स्वीकार की थी। तब से वह जमानत पर थी, इसके बाद से गुम है। वर्ष 2007 और 2013 में जमानती वारंट, फिर धारा 82-83 सीआरपीसी और 446 सीआरपीसी के तहत जमानतदारों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
सीजेएम कानपुर की रिपोर्ट
सीजेएम कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक वह दिए पते पर नहीं मिली। मकान मालिक राजकुमार साहू ने भी जानकारी से इनकार किया। हाई कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त का पता चलने की कोई उम्मीद नहीं है और अदालत अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकती।
ट्रायल कोर्ट को आदेश
सुप्रीम कोर्ट के केएस पांडुरंगा बनाम कर्नाटक केस में दिए गए फैसले के आलोक में कोर्ट ने रिकार्ड के आधार पर मेरिट पर सुनवाई की। कुल 10 गवाहों की गवाही को विश्वसनीय माना और अपील में कोई दम न पाते हुए इसे खारिज कर दिया। ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि दोषी को गिरफ्तार करा कर सजा भुगतने के लिए भेजा जाए।
