'आयकर संबंधी अपराधों में प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट का लाभ नहीं', हाई कोर्ट ने मीरजापुर से जुड़े मामले में राहत की रद
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयकर अधिनियम की धारा 277 के तहत आयकर अपराधों में प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट का लाभ देने से इनकार कर दिया है। ...और पढ़ें

HighLights
आयकर अपराधों में प्रोबेशन एक्ट का लाभ नहीं मिलेगा।
हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटा।
धारा 292ए के तहत स्पष्ट प्रतिबंध का हवाला।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयकर अधिनियम की धारा 277 के एक मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा है कि आयकर अपराधों में प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट का लाभ नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने पाया कि संबंधित अदालत ने धारा 292ए के स्पष्ट प्रतिबंध को नजरअंदाज किया था।
इसलिए 28 अप्रैल 1982 का आदेश रद कर अपील स्वीकार कर ली। संबंधित अदालत को निर्देश दिया कि वह दोनों पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देते हुए केवल सजा के बिंदु पर नए सिरे से आदेश पारित करे। प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य छोटे या पहली बार अपराध करने वाले व्यक्तियों को जेल भेजने के बजाय उन्हें सुधार का अवसर देना है।
क्या था आरोप?
मीरजापुर के आयकर अधिकारी ने कमरुद्दीन अंसारी और अजीमुल्लाह अंसारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। ये दोनों भदोही स्थित फर्म मेसर्स मोहम्मद इब्राहिम अजीमुल्लाह के साझेदार थे। आरोप था कि वर्ष 1968-69 के आकलन वर्ष में 26 अक्टूबर 1968 को दाखिल विवरणी में फर्म ने मेसर्स दामोदर दास एंड अदर्स से प्राप्त 1,15,470 रुपये की आय छिपाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अजीमुल्लाह अंसारी की मृत्यु हो गई। इसके बाद केवल कमरुद्दीन अंसारी के खिलाफ मुकदमा चलता रहा।
आरोपित ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि 50,810 रुपये की राशि हाई कोर्ट के आदेश से घटा दी गई थी और शेष 61,460 रुपये पर उसने कर व जुर्माना जमा कर दिया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मीरजापुर ने 28 अप्रैल 1982 को कमरुद्दीन अंसारी को धारा 277 के तहत दोषी करार दिया लेकिन मामला पुराना होने तथा आरोपित के पिता की मृत्यु और अपराध स्वीकार करने के आधार पर उसे प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट के तहत रिहा कर दिया। आयकर अधिकारी ने इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की।
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लागू नहीं हो सकता प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट
अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला ने तर्क दिया कि आयकर अधिनियम की धारा 292ए स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है कि इस अधिनियम के तहत दोषी पाए गए व्यक्ति पर धारा 360 सीआरपीसी या प्रोबेशन आफ आफेंडर्स एक्ट लागू नहीं होगा, जब तक कि वह व्यक्ति 18 वर्ष से कम उम्र का न हो।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के यूनियन आफ इंडिया बनाम ममता सेठी और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के कमिश्नर आफ इनकम टैक्स बनाम ओंकार नाथ मामलों का हवाला दिया गया, जिनमें इसी तरह के सिद्धांत स्थापित किए गए थे। प्रतिवादी की ओर से सूचना के बावजूद कोई पेश नहीं हुआ, इसलिए मामले की सुनवाई एकपक्षीय हुई।