इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, भर्ती विज्ञापन में कटऑफ तिथि के बाद स्वीकार नहीं होंगे दस्तावेज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर अहम फैसला सुनाया है कि विज्ञापन या नोटिस में तय कटऑफ तिथि के ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
कटऑफ तिथि के बाद पात्रता दस्तावेज जमा करने की अनुमति नहीं।
भर्ती नोटिस में स्पष्ट चेतावनी अनिवार्य शर्त मानी जाएगी।
समय पर दस्तावेज अपलोड न करने पर चयन का अधिकार समाप्त।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि भर्ती विज्ञापन या उससे जुड़े नोटिस में दस्तावेज अपलोड करने की अंतिम तिथि तय है और यह स्पष्ट चेतावनी है कि तय समय तक दस्तावेज न देने वाले को शार्टलिस्ट नहीं किया जाएगा तो कटआफ तिथि के बाद पात्रता प्रमाणपत्र जमा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वाराणसी की नेहा राव की विशेष अपील खारिज करते हुए की है। मामला यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के छह जनवरी 2022 के विज्ञापन संख्या 2-परीक्षा/2022 के तहत कास्मेटोलाजी ट्रेड में इंस्ट्रक्टर पद की भर्ती से जुड़ा है।
इस पद के लिए बेसिक कास्मेटोलाजी के बाद तीन साल का अनुभव अनिवार्य था। आयोग ने तीन फरवरी 2023 को नोटिस जारी कर सभी अभ्यर्थियों को 28 फरवरी 2023 की मध्यरात्रि तक दस्तावेज अपलोड करने को कहा। नोटिस में स्पष्ट था कि समय पर दस्तावेज अपलोड न करने वाले को शार्टलिस्ट नहीं किया जाएगा और बाद में मौका नहीं मिलेगा। अपीलार्थी ने आठ जनवरी 2015 को योग्यता हासिल की थी।
उसने 19 सितंबर 2017 का अनुभव प्रमाणपत्र अपलोड किया, जिसमें पहली सितंबर 2014 से 31 अगस्त 2017 तक का अनुभव दिखाया गया था। नियमों के अनुसार इसमें से केवल कोर्स के बाद का दो साल सात माह का अनुभव ही मान्य था। तीन साल पूरा करने में पांच माह की कमी रह गई। वह लिखित परीक्षा में पास हो गई और अस्थायी रूप से चयनित भी हो गई। कमी सामने आने पर उसने उसी संस्थान का 10 जनवरी 2022 को जारी दूसरा अनुभव प्रमाणपत्र पेश किया। आयोग ने इसे यह कहकर नहीं माना कि यह कटऑफ तिथि तक अपलोड नहीं किया गया था।
हाई कोर्ट में रिट याचिका 26 नवंबर 2025 को खारिज होने के बाद अभ्यर्थी ने अपील दाखिल की। उसकी दलील थी कि अनुभव पहले से था, केवल प्रमाणपत्र अपलोड करना रह गया और दूसरा प्रमाणपत्र कटऑफ से पहले ही जारी हो चुका था। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के दिव्या बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि नकारात्मक शर्त होने पर बाद में दस्तावेज से कमी पूरी नहीं की जा सकती।
हाई कोर्ट ने माना कि भले ही मूल विज्ञापन में नकारात्मक शर्त नहीं थी, लेकिन नोटिस में यह स्पष्ट रूप से थी और अभ्यर्थी ने उस नोटिस को चुनौती नहीं दी। इसलिए यह विज्ञापन का हिस्सा है। ऐसी शर्त अनिवार्य है, निर्देशात्मक नहीं। कोर्ट ने कहा कि 28 फरवरी 2023 तक दूसरा प्रमाणपत्र अपलोड करना जरूरी था। ऐसा न करने से चयन का अधिकार समाप्त हो गया।
