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38 साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को किया बरी

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Fri, 09 Oct 2026 03:47 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 38 साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी को बरी कर दिया है। कोर्ट ...और पढ़ें

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HighLights

  1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 38 साल पुराने अपहरण-दुष्कर्म मामले में बरी किया।

  2. अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

  3. मेडिकल और मौखिक साक्ष्य में गंभीर विरोधाभास पाए गए, कोर्ट ने माना।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। करीब 38 साल पुराने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोषी को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकलपीठ ने सात अक्टूबर को मेरठ की अपर सत्र अदालत के 26 सितंबर 1988 के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। कोर्ट ने यह भी माना कि अभियोजन की कहानी में गंभीर विरोधाभास हैं और उपलब्ध मेडिकल व मौखिक साक्ष्य उससे पुष्ट नहीं होते। 2

5 फरवरी 1986 को सुभाष और उसके पिता युवती को उसकी बहन की बीमारी का बहाना बनाकर घर से ले गए थे। घटना के अगले दिन 26 फरवरी को प्राथमिकी दर्ज हुई। युवती की बरामदगी 11 मार्च 1986 को हुई। मेरठ की अदालत ने सुभाष को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376 के तहत दोषी ठहराया था, जबकि उसके पिता को बरी कर दिया गया था।

बयानों को भी पाया संदेहपूर्ण

सुभाष की ओर से दलील दी गई कि युवती के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले और मेडिकल परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि करने वाला कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं था। एक्स-रे से उसकी उम्र 19 वर्ष से अधिक पाई गई थी। वह कई जिलों में सुभाष के साथ गई, लेकिन इस दौरान न शोर मचाया और न शिकायत की। हाई कोर्ट ने अभियोजन के प्रमुख गवाहों के बयानों को भी संदेहपूर्ण पाया।

गवाहों ने आरोपित और युवती को पहचानने से इन्कार किया। बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह भी मौजूद नहीं था। युवती के पिता ने घटना की जानकारी उसी दिन मिलने की बात कही, जबकि प्राथमिकी अगले दिन दर्ज हुई।

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युवती की उम्र 19 वर्ष से अधिक थी और उसके आचरण को देखते हुए यह संभावना खारिज नहीं की जा सकती कि वह अपने कार्यों और उनके परिणामों से परिचित थी तथा उसकी सहमति रही हो। सुभाष जमानत पर है, इसलिए उसे आत्मसमर्पण नहीं करना होगा और उसकी जमानतदारियों से मुक्ति दी गई है।