डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा में बड़ा कदम: अब OTP-पासवर्ड नहीं, लेनदेन व्यवहार से AI तय करेगा बैंक खाते की सुरक्षा
डिजिटल बैंकिंग में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए एमएनएनआईटी प्रयागराज में आयोजित हैकाथॉन में एआई-आधारित समाधान प्रस्तुत किए गए। ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
एआई-आधारित समाधानों से डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा मजबूत होगी।
आईआईटी गुवाहाटी ने व्यवहार विश्लेषण तकनीक से पुरस्कार जीता।
सिम स्वैप धोखाधड़ी रोकने के लिए भी तकनीक विकसित।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में अकाउंट हैक, फर्जी लेनदेन, रिमोट एक्सेस फ्रॉड, सिम स्वैप और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध आम लोगों और बैंकों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। साइबर ठग अक्सर फिशिंग और अन्य तरीकों से ओटीपी, पिन और पासवर्ड हासिल कर लोगों की जीवनभर की कमाई मिनटों में साफ कर देते हैं।
ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने के लिए देशभर के युवा नवाचारकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अत्याधुनिक समाधान तैयार किए हैं। ऐसी तकनीक जो ओटीपी-पासवर्ड नहीं, आपके व्यवहार के बदलाव को पकड़कर बैंक खाते की सुरक्षा करेंगे।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में शनिवार को आयोजित पीएसबी हैकाथान सीरीज-2026 के ग्रैंड फिनाले में देशभर से चयनित आठ टीमों ने अपने अभिनव साइबर सुरक्षा समाधान प्रस्तुत किए। यह हैकाथान केंद्रीय बैंक ऑफ इंडिया, एमएनएनआईटी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पहल के तहत मई में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित बनाना था।
प्रतियोगिता में आईआईटी गुवाहाटी की टीम 'बार्ले मेड इट' ने पहला स्थान हासिल किया और उसे पांच लाख रुपये का पुरस्कार मिला। टीम ने एआई-ड्रिवन बिहेवियरल ऑथेंटिकेशन फार डिजिटल बैंकिंग सिस्टम विकसित किया है। यह तकनीक ग्राहक के बैंकिंग व्यवहार से जुड़े 42 से अधिक संकेतों का विश्लेषण करती है।
यानी बैंक केवल यह नहीं देखेगा कि पासवर्ड या ओटीपी सही है बल्कि यह भी पहचान सकेगा कि लेनदेन वास्तव में वही ग्राहक कर रहा है या कोई साइबर ठग। यदि किसी खाते से असामान्य तरीके से लेनदेन करने की कोशिश होती है, तो सिस्टम उसे तुरंत संदिग्ध मानकर अतिरिक्त जांच शुरू कर देता है।
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विजेता समाधान में बैंक अधिकारियों के लिए एक स्मार्ट डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है। जहां संदिग्ध लेनदेन का पता लगेगा और बैंक समय रहते कार्रवाई कर सकेंगे। इससे ओटीपी और पासवर्ड लीक होने की स्थिति में भी धोखाधड़ी की संभावना काफी कम हो जाएगी।
दूसरा स्थान थापर इंस्टीट्यूट पटियाला की टीम धुरंधर को मिला। टीम ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो मात्र 80 मिलीसेकेंड में सिम स्वैप फ्राड का पता लगा सकती है। वहीं, इसी संस्थान की टीम औरा को द्वितीय उपविजेता घोषित किया गया। प्रतियोगिता में अन्य टीमों ने भी रिमोट एक्सेस फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और संदिग्ध लेनदेन की पहचान से जुड़े प्रभावी एआई समाधान प्रस्तुत किए।
पुरस्कार वितरण समारोह में केंद्रीय बैंक ऑफ इंडिया के नामित निदेशक चंद्रदीप कुमार झा, कार्यकारी निदेशक रतन कुमार, कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे, एमएनएनआइटी के समन्वयक प्रो. मयंक पांडेय तथा डीन अनुसंधान प्रो. शिवेश शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।