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'यह कोई गलती नहीं, सोची-समझी साजिश है...' पीलीभीत वोटर लिस्ट फर्जीवाड़े पर चुनाव आयुक्त का कड़ा रुख

Published: Fri, 23 Oct 2026 11:50 PM (IST)Updated: Sat, 24 Oct 2026 02:11 AM (IST)

पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहां 10,000 से अधिक वोटर रिकॉर्ड्स में बिना वैध ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक इमेज

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HighLights

  1. 10,000 से अधिक मतदाता रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा उजागर।

  2. दो एसडीएम और ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज।

  3. चुनाव आयोग ने इसे 'सोचा-समझा अपराध' बताया।

डिजिटल डेस्क, पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। 10,000 से अधिक वोटर रिकॉर्ड्स में बिना किसी वैध दस्तावेज या आवेदन पत्र के फेरबदल किया गया। मामला सामने आने के बाद दो उप-जिलाधिकारियों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, यह कोई मानवीय भूल, लापरवाही या तकनीकी खामी नहीं है। यह एक जानबूझकर किया गया अपराध है।

क्या है मामला

10 अप्रैल 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके कुछ महीनों बाद, 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच बिना किसी मतदाता के आवेदन के 13,779 फॉर्म-8 (विवरण में संशोधन के लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्म) सिस्टम में दर्ज कर दिए गए।

इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दे दी गई, जबकि 3,309 आवेदनों को खारिज किया गया। जब चुनाव कार्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की गई, तो इन 13,779 प्रविष्टियों में से किसी भी आवेदन का कोई भौतिक फॉर्म या सहायक दस्तावेज मौजूद नहीं मिला।

22 अक्टूबर को पीलीभीत के कोतवाली थाने में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

प्रकरण में तत्कालीन एसडीएम अमरिया एवं ईआरओ मयंक गोस्वामी, तत्कालीन एसडीएम एवं ईआरओ हेमंत कुमार और कंप्यूटर सहायक एवं वीआरसी ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ओटीपी प्रक्रिया पर उठे सवाल

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने चुनाव प्रणाली की सुरक्षा प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की हैकिंग या सिस्टम की गड़बड़ी नहीं हुई है।

उन्होंने बताया कि ऑपरेटर के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी  के जरिए ही फॉर्म-8 दर्ज कर सकता है। ऑपरेटर ने बिना मतदाताओं के आवेदन प्राप्त किए फर्जी प्रविष्टियां कीं। इसके बाद एसडीएम/ईआरओ अपने अलग लॉगिन, पासवर्ड और मोबाइल ओटीपी के जरिए ही आवेदनों को अप्रूव करते हैं।

ऐसे में आप यह दावा नहीं कर सकते कि आपका पासवर्ड चोरी हो गया। आपके पंजीकृत फोन पर ओटीपी आता है। या तो आप खुद लेनदेन प्रमाणित करते हैं या किसी के साथ ओटीपी साझा करते हैं। बिना जांच के 10,000 से अधिक फॉर्म कैसे स्वीकृत हो गए?

इस तरह सामने आई सच्चाई

इस घोटाले की सबसे पहली शिकायत वकील फैजान अली खान ने की। 12 अक्टूबर को जब उन्होंने अपनी मतदाता पहचान पत्रसंख्या की जांच की, तो उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज था।

खान के अनुसार, 10 अप्रैल की अंतिम सूची में उनका और उनके परिवार का नाम बिल्कुल सही था। जब उन्होंने बाद के रिकॉर्ड का मिलान किया, तो उनके अपने पोलिंग बूथ के 1,037 मतदाताओं में से 142 मतदाताओं के विवरण में हेरफेर पाया गया।

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