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405 करोड़ के विकास दावों के बीच बरखेड़ा में अधूरी आस, क्या तहसील और डिग्री कॉलेज का वादा होगा पूरा?

Published: Fri, 28 Aug 2026 12:03 AM (IST)

Uttar Pradesh MLA Report Card: पीलीभीत के बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में 405 करोड़ के विकास दावों के बावजूद नई तहसील ...और पढ़ें

स्‍वामी प्रवक्‍ता नंद

स्‍वामी प्रवक्‍ता नंद

HighLights

  1. राजकीय मेडिकल कालेज तो बना लेकिन बरखेड़ा क्षेत्र में सरकारी डिग्री कालेज होने से बाहर पढ़ाई करने जाते हैं युवा

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। लोधी बाहुल्य बरखेड़ा विधानसभा सीट के नाम पर अब तक तहसील नहीं बन सकी है, जिसकी आस अब तक अधूरी है। बीसलपुर व अन्य तहसीलों के हिस्से में आने वाली इस सीट पर करीब 405 करोड़ रुपये से विकास कार्य कराने के दावे किए जा रहे हैं। इसमें करीब सड़कों और पुल का जाल बिछाया गया। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए राजकीय मेडिकल कालेज को भी इसी विधानसभा क्षेत्र में बनवाया गया, लेकिन सरकारी डिग्री कालेज के न होने से युवाओं को बाहर जाना पड़ता है।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पीलीभीत की बरखेड़ा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने क्षेत्र के चहुंमुखी विकास का वादा किया था। तराई के इस कृषि प्रधान क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं में सुधार, नई तहसील के गठन और सड़कों के निर्माण जैसे तमाम मुद्दों को लेकर जनता ने उनसे काफी उम्मीद लगाई थीं।

इन्हीं उम्मीदों के साथ बरखेड़ा विधानसभा की जनता ने स्वामी प्रवक्तानंद को रिकार्ड 1,51,771 मतों के प्रचंड बहुमत के साथ विधानसभा भेजा, लेकिन वादों के अनुसार स्वामी प्रवक्तानंद के कार्यकाल सभी मुद्दों पर जनता की अपनी अलग-अलग राय है। चुनाव के दौरान बरखेड़ा या गजरौला को पीलीभीत जिले की छठी तहसील बनाने का मुद्दा सबसे प्रमुख था।

प्रशासनिक कार्यों के लिए जनता को आज भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। हर बार की तरह यह आश्वासन अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका है। ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए सरकारी डिग्री कालेज का न होना आज भी एक बड़ा मद्दा है।

युवाओं, विशेषकर छात्राओं को 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। जिससे कई गरीब बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण किसानों के मुद्दे यहां हमेशा चुनावी केंद्र में रहे हैं।

वहीं, ग्रामीण इलाकों में बेहतर सड़कों के मोर्चे पर भी जनता की मिली जुली राय है। विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों की परियोजनाओं के बीच बनकटी रोड, भिखारीपुर से धनकुना रोड समेत तंमाम प्रमुख ग्रामीण सड़कें आज भी जर्जर और गड्ढायुक्त हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिला मुख्यालय पर मेडिकल कालेज खुलना एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन बरखेड़ा में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के साधन न होना और बढ़ती महंगाई भी आम जनता से जुड़े बड़े सवाल बने हुए हैं।

 

बरखेड़ा विधानसभा में मेरे अब तक के कार्यकाल के दौरान अब तक 405 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं। क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया गया है। प्रमुख कार्यों में 280 करोड़ रुपये का मेडिकल कालेज, 80 करोड़ रुपये का उदय करनपुर पुल, 25 करोड़ रुपये का मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालय, 15 करोड़ रुपये का सकरिया से शाहगढ़ सड़क निर्माण, 10 करोड़ रुपये का एआरटीओ कार्यालय और चार से पांच करोड़ रुपये का आइटीआइ कालेज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टूटी तार फेंसिंग की मरम्मत और नई फेंसिंग के लिए मुख्यमंत्री से अपील की गई है। भविष्य के विकास के लिए शासन से लगभग 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की गई है। क्षेत्र की बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए एक महिला डिग्री कालेज बनवाने की विशेष मांग भी शासन के समक्ष रखी गई है।

- स्वामी प्रवक्तानंद, विधायक बरखेड़ा

 

हमारे कार्यकाल में पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 47 करोड़ रुपये की लागत से पीलीभीत से उत्तराखंड बार्डर का सुदृढ़ीकरण, 42 से 43 करोड़ रुपये की लागत से गौहनिया चौराहे से माधोटांडा मार्ग का चौड़ीकरण, गजरौला-बरखेड़ा-नवाबगंज मार्ग, पीलीभीत से धनकुना मार्ग और बनकटी रोड का निर्माण शामिल है। 300 बेड के जिला अस्पताल को मेडिकल कालेज में बदलना सरकार की नीति का हिस्सा था। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की लापरवाही के कारण आज मेडिकल कालेज और ओपीडी को 14 किलोमीटर की दूरी पर अलग-अलग कर दिया गया है। इसके चलते मरीजों को 14 किमी का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।

- हेमराज वर्मा, सपा प्रत्याशी, बरखेड़ा विधानसभा


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