नेपाल में सुलग रही 'हिंदू राष्ट्र' की आग, तनाव के बीच पीलीभीत के बाजार बने नेपालियों का सहारा
नेपाल में 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन से सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव है। इस तनाव और कम दूरी के कारण नेपाली नागरिक खरीदारी के ...और पढ़ें

कलीनगर तहसील क्षेत्र में नेपाल सीमा से सटे गांव नौजल्हा नकटाह की बाजार। जागरण
HighLights
नेपाल में की बर्बरतापूर्वक हत्या के बाद बार्डर के आसपास के गांवों के लोग महसूस कर रहे तनाव
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। नेपाल में बर्बरतापूर्वक हत्या के बाद आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करने और हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग अब आंदोलन के रूप में परिवर्तित हो चुकी है। इसकी गूंज बार्डर से सटे क्षेत्रों में भी सुनाई दे रही है। हालांकि, यहां आंदोलन की आग का असर नहीं है, लेकिन हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग से बाजारों में आंदोलन की गूंज है।
नेपाल को हिंदू राष्ट्र की मांग करते हुए संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना व राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी का नेपाल में चलाया जा रहा संयुक्त आंदोलन अब वहां के लोगों की जुबां पर छाया हुआ है। हिंदू युवाओं की हत्या करने के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने, देश में संचालित अवैध मदरसा बंद कराने और मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने की मांग जोर पकड़ चुकी है।
आंदोलन के प्रतिनिधियों की नेपाल के गृहमंत्री सूदन से वार्ता हो चुकी है। काठमांडू के आसपास क्षेत्रों में हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहा है। नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की आग अंदर ही अंदर धधक रही है, लेकिन अन्य किसी धर्म के बाशिंदे न होने से वहां पर ऊपरी तौर पर आक्रोश नहीं है।
पीलीभीत बार्डर से सटे गांवों में इसको लेकर कोई हलचल प्रतीत नहीं है, लेकिन तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। बार्डर से सटे नेपाल के गांव मोहन चौक, बाबा थान, प्रगति टोल और कालिका हाट बाजार, निशानी टोला, सुंदरनगर, अट्ठारह नंबर पिलर कालोनी, आदि गांवों के लोग अधिकतर बाजार और कुतिया कवर में आकर खरीदारी करते हैं।
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झूला पुल से साइकिल, बाइक और पैदल ही नेपाल के नागरिक आते रहते हैं। यहां से दाल, आटा, सब्जी, राशन, चीनी, सब कुछ खरीदते हैं, क्योंकि इन कालोनियों से और कुतिया कवर कालोनी के बाजारों की दूरी तीन से पांच किलोमीटर है।
वहीं, नेपाल के बाजार में जाने के लिए 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना है। नेपाली नागरिकों का कहना है कि सीमा पर सख्ती न हो तो भारत हमारे लिए घर जैसा ही है। कम दूरी और नेपाल में व्याप्त तनाव से बचने के लिए यहां खरीदारी करने के लिए आते हैं।
एसआरएमएस मेडिकल में कराते इलाज, उत्तराखंड से करते खरीदारी
नेपाली नागरिकों का कहना है कि उनके यहां किसी को गंभीर बीमारी होती है तो नेपाल में जाने के बजाय बरेली के एसआरएमएस मेडिकल कालेज में इलाज कराने के लिए पहुंच जाते हैं। यह नजदीक पड़ता है।
वहीं, पीलीभीत के साथ उत्तराखंड के खटीमा में बाजार करते हैं। वहां से बड़ी संख्या में लोग यहां पर खाद्य वस्तुएं बिक्री करने के लिए पहुंचते हैं। हम लोगों का भारत से रोटी बेटी का रिश्ता होने के साथ ही मेडिकल और बाजार से भी जुड़ाव रहता है।
आंदोलन को लेकर उपदव, आगजनी, हंगामा यहां आसपास क्षेत्र में भले नहीं हो रहा हो, लेकिन तनाव तो सभी महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि खरीदारी के लिए हम लोगों की प्राथमिकता पीलीभीत के बाजार होते है। - योगेश खड़का, नेपाली नागरिक
आसपास क्षेत्रों में दूसरे धर्म के लोग हिंदू राष्ट्र को लेकर एकमत हैं। हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग शांतिपूर्ण ढंग से होने किसी तरह का बवाल नहीं है। लेकिन नेपाल के बाजारों में जाने से बेहतर पीलीभीत के बाजारों में खरीदारी कर लेते हैं। - नर बहादुर, नेपाली नागरिक