ग्रेटर नोएडा बस आग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस, घटना पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना पर सड़क परिवहन मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के ...और पढ़ें

ग्रेटर नोएडा बस आग: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा बस आग घटना पर जानकारी मांगी।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई इस घटना में नौ लोगों की मौत हुई।
अदालत ने आग के कारणों और सुरक्षा नियमों पर रिपोर्ट मांगी।
जागरण ब्यूरो, नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के मामले में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि बस के ड्राइवर और मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। यह निर्देश न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा के मामले में सुनवाई के दौरन दिए।
याचिकाकर्ता केसी जैन ने अर्जी दाखिल कर कोर्ट के समक्ष स्लीपर बस में आग लगने का मुद्दा उठाते हुए इस तरह के मामलों में उचित आदेश देने की मांग की है। कोर्ट ने अर्जी पर नोटिस जारी किया। इससे पहले जैन ने अर्जी पर बहस करते हुए कहा कि यह किसी डबल डेकर बस में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में पहले ही चलती बसों में आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
यातायात नियमों के प्रवर्तन की व्यवस्था में गंभीर कमियां
जैन ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि वाहनों की सुरक्षा फिटनेस, परमिट, आपातकालीन निकास तथा यातायात नियमों के प्रवर्तन की व्यवस्था में गंभीर कमियां हैं। कोर्ट का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकर्षित किया कि दुर्घटनाग्रस्त बस के विरुद्ध कथित रूप से अनेक चालान लंबित थे। लगभग 1.75 लाख रुपये की चालान राशि बकाया बताई गई है। इसके बावजूद बस का राजमार्ग पर संचालन जारी रहना प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए गंभीर खतरा
उन्होंने कहा कि बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालक और वाहन सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे आदतन उल्लंघनकर्ताओं को राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस वे पर वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनकी अर्जी में मांग की गई है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 21(1) के खंड (25) के अनुसार एक वर्ष में पांच या अधिक यातायात अपराध अथवा उल्लंघन ड्राइविंग लाइसेंस के विरुद्ध कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।
अर्जी में ऐसे आदतन उल्लंघनकर्ताओं की पहचान, उनके ड्राइविंग लाइसेंस के विरुद्ध कार्रवाई तथा उन्हें एक्सप्रेस वे और राजमार्गों पर वाहन चलाने से रोकने सहित कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी करने की मांग की गई है। कोर्ट ने अर्जी पर उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
