नोएडा अथॉरिटी की नई योजना: दो लाख फ्लैट खरीदारों को मिलेगा मालिकाना हक, बिल्डरों के लिए ओटीएस प्रस्ताव
नोएडा प्राधिकरण बिल्डरों से 26 हजार करोड़ रुपये बकाया वसूलने में असफल रहा है, जिससे दो लाख फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री अटकी है।
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सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI
HighLights
बिल्डरों पर 26 हजार करोड़ रुपये का बकाया।
दो लाख फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री अटकी।
प्राधिकरण लाएगा वन टाइम सेटेलमेंट योजना।
कुंदन तिवारी, नोएडा। अमिताभकांत रिपोर्ट की सिफारिशों के बावजूद नोएडा प्राधिकरण बिल्डरों से 26 हजार करोड़ रुपये का बकाया वसूलने में असफल रहा है। कई बिल्डरों ने सिफारिशों का लाभ उठाने के बाद भी बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया। छूट का लाभ लेकर फ्लैट खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री भी नहीं कराई।
अब प्राधिकरण एक बार फिर बिल्डरों के सामने झुकने को तैयार है। दो लाख फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री के लिए छूट देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के तहत बिल्डरों से बकाया वसूलने के लिए वन टाइम सेटेलमेंट (ओटीएस) स्कीम लाने की योजना है, जिसके माध्यम से बिल्डर एक बार में बकाया राशि का भुगतान करेंगे।

भुगतान के बाद दो लाख फ्लैट खरीदारों को उनके मालिकाना हक का रास्ता साफ हो जाएगा। इस प्रस्ताव को शीघ्र शासन को भेजा जाएगा और अगले सप्ताह कैबिनेट की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी। प्राधिकरण के ओएसडी क्रांतिशेखर सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञात हो कि 21 दिसंबर 2023 को अमिताभकांत रिपोर्ट की सिफारिशों का शासनादेश प्राधिकरण में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य था कि बिल्डर और फ्लैट खरीदारों के बीच चल रहे विवाद को समाप्त कर रजिस्ट्री कराई जाए, जिससे खरीदारों को उनके आशियाने का मालिकाना हक मिल सके। इसके लिए 57 बिल्डरों को राहत देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने मार्जिनल कास्ट आफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) पर बकाया की गणना की। बिल्डरों को चार किस्तों में बकाया जमा करने की सुविधा दी गई थी।
बिल्डरों को कहा गया था कि यदि वह तय राशि का 25 प्रतिशत जमा करते हैं, तो उन्हें वर्ष 2013 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के तहत सेक्टर-95 स्थित ओखला पक्षी विहार के दस किलोमीटर परिधि में निर्माण कार्य बंद रखने के दौरान का जीरो पीरियड लाभ भी दिया जाएगा। इसके अलावा, कोरोना काल का लाभ भी उन्हें दिया जाएगा। 27 बिल्डरों ने 25 प्रतिशत राशि जमा कर दी और कोरोना काल का लाभ लिया। इसके साथ ही 13 बिल्डरों ने एनजीटी का लाभ भी उठाया।
हालांकि, इस योजना के तहत 57 बिल्डरों से नई गणना के अनुसार कुल बकाया में से 5500 करोड़ रुपये प्राधिकरण को मिलना था। 21 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री कराई जानी थी। 12 बिल्डरों ने प्राधिकरण के नोटिस का जवाब तक नहीं दिया। 14 बिल्डरों ने अमिताभकांत रिपोर्ट की सिफारिशों पर सहमति जताते हुए आंशिक भुगतान किया। पिछले दो वर्षों में प्राधिकरण को केवल 1200 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जिसके कारण मात्र 4364 फ्लैट खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री हो सकी है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डर परियोजनाओं के अनुसार कुल 4,31,064 यूनिट्स की पहचान की है। इनमें से 2,12,752 यूनिट्स के लिए प्राधिकरण ने ओसी जारी की है, जबकि 2,18,312 यूनिट्स को ओसी अभी तक जारी नहीं की गई है। इनका निर्माण कब तक होगा, इसकी जानकारी प्राधिकरण के पास नहीं है। बिल्डरों ने इनकी बुकिंग का पैसा दूसरी परियोजना में ट्रांसफर कर दिया है।
नोएडा में बिल्डर परियोजना की स्थिति इस प्रकार है
- बिल्डर परियोजना: 116
- अधूरी परियोजना: 47
- डिफाल्टर बिल्डर: 57
- आशियाना नहीं मिला: 2 लाख फ्लैट खरीदार
- मालिका हक नहीं मिला: 91 हजार फ्लैट खरीदार
- बिल्डरों पर बकाया: 26 हजार करोड़
- सुप्रीम कोर्ट (14) व एनसीएलटी (16) कुल केस: 30
- सुप्रीम कोर्ट व एनसीएलटी में बिल्डर परियोजनाओं पर बकाया: 2600 करोड़

