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घरेलू नौकर से निठारी के कसाई तक...फिर 2025 के 'सुप्रीम' फैसले ने बदल दी सुरेंद्र कोली की पूरी कहानी

By Deepti MishraEdited By: Anup Tiwari
Published: Fri, 18 Sep 2026 08:35 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 11:10 PM (IST)

निठारी का खौफनाक सच: नाले में मिले कंकाल, कबूलनामे और अदालत से बरी होने तक की पूरी कहानी...

यह तस्वीर एआई से एडिट किया गया है। (फोटो सोर्स - जागरण आर्काइव)

यह तस्वीर एआई से एडिट किया गया है। (फोटो सोर्स - जागरण आर्काइव)

HighLights

  1. हरिद्वार में कोली की आत्महत्या से निठारी कांड चर्चा में आ गया।

  2. सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया गया, फिर अदालती लड़ाई के बाद बरी।

डिजिटल डेस्‍क, नोएडा। नोएडा में गरीब मजदूर परिवारों के बच्चे एक-एक कर गायब हो रहे थे। कोई बच्चा बाजार गया तो फिर घर नहीं लौटा। कोई खेलते-खेलते अचानक लापता हो गया तो किसी का इंतजार करते-करते मां की आंखें पथरा गई थीं। उम्‍मीद थी कि जल्‍द कलेजे का टुकड़ा घर लौट आएगा। शायद बेटी किसी रिश्‍तेदार के यहां चली गई होगी; आ जाएगी।

लेकिन 29 दिसंबर, 2006 की सर्द सुबह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 (निठारी गांव) बंगले के पीछे एक नाले से 15 बच्चों के कंकाल मिले तो कुछ घरों में हफ्तों से पसरा सन्‍नाटा बेचैनी में बदल गया। कुछ उम्‍मीदें टूट गईं तो कुछ को न भरने वाले जख्‍म मिले।

इसके बाद जो कुछ पता चला, वह बेहद भयावह था। नोएडा का निठारी गांव देश की सुर्खियां बन गया। सालों तक कानूनी लड़ाई चली, कबूलनामे हुए, सजा मिली और फिर बरी होने का सिलसिला चला, लेकिन बच्‍चों को किसने गायब किया; इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला।

Nithari Kand

30 दिसंबर 2006 को दैनिक जागरण ने निठारी कांड पर प्रथम पृष्ठ पर विस्तृत कवरेज प्रकाशित की थी। हालांकि, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के बाद इस मामले की पूरी कहानी बदल गई। (जागरण आर्काइव)

निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। जिसके बाद यह नरसंहार एक बार फिर चर्चा में आ गया। बच्‍चों के गायब होने से लेकर खुलासों और फिर कानूनी लड़ाई से बरी होने तक की पूरी कहानी यहां पढ़ें...

लापता पायल के मोबाइल का कनेक्शन 

2006 की सर्दियां थीं। गरीब मजदूरों के बच्‍चे गायब हो रहे थे। कुछ परिवारों ने पुलिस का दरवाजा भी खटखटाया। शिकायतें दर्ज हुईं। सवाल पूछे गए, लेकिन शुरुआती दौर में उन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। फिर एक युवती के गायब होने की कहानी ने पूरी जांच की दिशा बदल दी।

युवती का नाम था - पायल। उसके परिजनों ने हंगामा काटा तो पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने पायल का मोबाइल ट्रेस किया तो जांच रिक्‍शा चालक तक पहुंची। पूछताछ में रिक्‍शा चालक ने बताया कि मोबाइल नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी -5 (निठारी गांव) बंगले रहने वाले एक शख्‍स ने दिया था। यह वही बंगला था, जहां कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर रहता था और यहीं पर सुरेंद्र कोली काम किया करता था।

Nithari Case

30 दिसंबर 2006 को दैनिक जागरण ने नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 (निठारी गांव) बंगले के पीछे एक नाले से 15 बच्चों के कंकाल मिलने का फोटो प्रकाशित किया था। (जागरण आर्काइव)

जांच आगे बढ़ी तो पंधेर के बंगले के पीछे नाले के पास से प्लास्टिक की बोरियों में 15 खोपड़ियां, हड्डियां और कपड़े मिले। मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को अरेस्‍ट किया गया। जनवरी, 2007 में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। नोएडा पुलिस ने 19 अलग-अलग गुमशुदगी/अपराध से जुड़ीं एफआईआर दर्ज किए थे, जिनमें से सीबीआई ने 16 मामलों में चार्जशीट दायर की थी। इन मामलों में सुरेंद्र कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने के आरोप लगे।

पंधेर की कोठी में मिलने के बाद आगे बढ़ी जांच

जांच रिपोर्टों में शवों को कसाई जैसे काटने की बात सामने आई। तब कोली ने बच्चों को अगवा करने, उनका यौन शोषण व उनके शवों को बंगले के पीछे नाले में फेंकने की बात स्वीकारी थी। ऐसी चर्चाएं भी रहीं कि बच्चों के शरीर के कुछ अंगों को खाया या बेचा गया था। हालांकि किसी भी वैज्ञानिक साक्ष्य में इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।

सुरेंद्र कोली घरेलू नौकर से निठारी का कसाई कहलाने लगा था। दोनों ने जुर्म स्वीकारा, सजा हुई व फिर दोनों बरी हुए।

 

Nithari Case SC

आधी रात को आया था आदेश, फांसी से बचा था कोली

कोली व पंधेर पर दुष्कर्म, हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोप लगे थे। दोनों पर 16 केस दर्ज हुए थे। कोली को कई मामलों में मौत की सजा, तो पंधेर को मौत व उम्रकैद, दोनों सजाएं मिली थीं। कोली ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। 2011 में मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।

राष्‍ट्रपति ने खारिज कर दी सुरेंद्र कोली की दया याचिका

मामला तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भी पहुंचा था। उन्होंने कोली की दया याचिका खारिज की थी। कोली को 12 सितंबर 2014 को फांसी दी जानी थी, पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने आठ सितंबर को रात 1:30 बजे एक आदेश जारी कर फांसी को एक सप्ताह के लिए टाल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को बरकरार रखा था।

2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी दया याचिका पर निर्णय लेने में हुई देरी का हवाला दे मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

चार साल बाद 2019 में कोली को उसकी 10वीं दोषसिद्धि में एक और मौत की सजा सुनाई गई थी। कोली को 13 मामलों में दोषी ठहराया गया था।

surendra koli

साक्ष्यों के अभाव में हुए थे बरी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में भरोसेमंद सुबूत का अभाव का हवाला देते हुए कोली व पंधेर दोनों को बरी किया था। कोर्ट ने जांच में कई कमियों की ओर इशारा किया था, जैसे खोदाई शुरू होने से पहले क्राइम सीन को सुरक्षित न करना, कोली का कथित कबूलनामा कानून के तहत ठीक से रिकार्ड न करना, रिमांड के कागजात में विरोधाभासी जानकारी व वैज्ञानिक साक्ष्यों का या तो गायब होना या खराब हो जाना।

नाले के साक्ष्य को सार्वजनिक पहुंच वाला बताया गया था। सीबीआइ ने सरकार व पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी आरोपों से बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी कर कहा था कि शक कितना भी गहरा क्यों न हो, पुख्ता सुबूत की जगह नहीं ले सकता।

कब-कब क्या हुआ?

  • 29 दिसंबर 2006: निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। मालिक मनिंदर सिंह पंधेर और उसका नौकर सुरेंद्र कोली गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की
  • 11 जनवरी 2007: मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सीबीआई का पहला दल निठारी पहुंचा। कोठी के पास से 30 और हड्डियां बरामद कीं।
  • 22 मई 2007 : सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। मोनिंदर सिंह पंधेर पर हल्के आरोप लगाए गए। कोली पर दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए।
  • 13 फरवरी 2009: निठारी में सिलसिलेवार 19 हत्याओं में से एक 14 वर्षीय रिम्पा हालदार के साथ रेप और उसकी हत्या के लिए विशेष अदालत ने पंधेर तथा कोली को मौत की सजा सुनाई।
  • 11 सितंबर 2009 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को सुनाई गई मौत की सजा से से बरी किया।
  • 20 जुलाई 2014: सुरेंद्र कोली की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी।
  • 08 सितंबर 2014 : कोर्ट ने रात एक बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी, कोली की सजा उसी दिन होनी थी।
  • 24 जुलाई 2017: कोली और पंधेर को 20 वर्ष पिंकी सरकार की हत्या और बलात्कार के प्रयास में सीबीआइ अदालत ने दोषी ठहराया। दोनों के खिलाफ हत्या के 16 मामलों में से यह आठवां मामला है, इसमें फैसला सुनाया गया है।
  • 13 फरवरी 2019: सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा। हाई कोर्ट से पंधेर बरी।
  • 02 मार्च 2019: सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा पंधेर बरी
  • 06 अप्रैल 2019: सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, पंधेर बरी
  • 15 जनवरी 2021: सुरेंद्र कोली को फांसी, पंधेर बरी
  • 26 मार्च 2021: सुरेंद्र कोली बरी
  • 19 मार्च 2022: कोली को फांसी व पंधेर को सात वर्ष की कैद
  • 16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया।
  • 11 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की याचिका मंजूर करते हुए उसे आखिरी लंबित मामले में भी बरी कर दिया, जिसके बाद वह जेल से रिहा हो गया।
  • 18 सितंबर 2026: निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। उसका शव चाय के खोखे में रस्सी के सहारे लटका मिला।
Nithari Case Timeline

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