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ग्रेटर नोएडा में मेडिकल ठगी गिरोह का पर्दाफाश, मास्टर माइंड समेत चार सदस्य गिरफ्तार

Updated: Tue, 17 Mar 2026 10:27 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा पुलिस ने ईसीएचएस कार्ड का फर्जी इस्तेमाल कर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मास्टरमाइंड दानिश खान समेत चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।

पुलिस गिरफ्त में एसीएसएस कार्ड पर लोगों का फर्जी तरीके से इलाज कराने वाले गिरोह के चार आरोपित। गिरोह का पर्दाफाश करते डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी।

पुलिस गिरफ्त में एसीएसएस कार्ड पर लोगों का फर्जी तरीके से इलाज कराने वाले गिरोह के चार आरोपित। गिरोह का पर्दाफाश करते डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी।

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली पुलिस ने पूर्व सैनिक की बेटी के अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) कार्ड पर जालसाजी कर अस्पतालों में लोगों का इलाज करा ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरफ्तार चार आरोपितों की पहचान गाजियाबाद निवासी शिखा सिंह, उसका भाई यश सिंह, फिरोजाबाद निवासी जितेंद्र यादव और बुलंदशहर निवासी दानिश खान के रूप में हुई।

गिरोह करीब 40 लोगों से 10 लाख की ठगी कर चुका है। गिरोह इलाज का पूरा खर्च करने में असमर्थ लोगों को निशाना बनाता था। मरीज को दूसरे व्यक्तियों के नाम और कार्ड पर अस्पताल मुफ्त इलाज कराकर उनसे रकम ले लेते थे। दोनों आरोपित पूर्व में भी इसी तरह की ठगी के कारण जेल जा चुके हैं। जमानत के बाद फिर सक्रिय हो गए।

6. 50 लाख रुपये दिया अस्पताल का बिल

डीसीपी शक्तिमोहन अवस्थी ने बताया आरोपितों ने अलीगढ़ निवासी पूर्व सैनिक की बेटी शालिनी के इसीएचएस कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया। उनके कार्ड पर गाजियाबाद की तनु को 29 जुलाई 2025 को गाजियाबाद के अस्पताल में शालिनी के नाम पर भर्ती करा इलाज कराया। अस्पताल का बिल 6. 50 लाख रुपये बना।

पांच अगस्त को इलाज के दौरान तनु की मौत हो गई थी। आरोपितों ने अस्पताल में तनु की पहचान छिपाकर शालिनी के नाम से ही डेथ सर्टिफिकेट जारी करा शव ले लिया था, जब शालिनी इलाज कराने पहुंचीं तब कार्ड के दुरुपयोग की जानकारी हुई। पूर्व सैनिक की शिकायत पर बिसरख पुलिस ने जांच कर गिरोह का पर्दाफाश कर गिरफ्तारी की।

अच्छे अस्पताल में इलाज का झांसा देकर करते थे ठगी

एसीपी पवन कुमार के मुताबिक, गिरोह की मुख्य आरोपित शिखा सिंह की बहन तनु लंबे समय से बीमार थी। अस्पताल में काम करने वाली परिचित ने उसे दानिश खान से मिलवाया था। दानिश कम पैसों में अच्छे अस्पताल में इलाज कराने के लिए मरीज का नाम बदलकर किसी और के दस्तावेज पर भर्ती कराने का भरोसा दिया था।

दानिश ने शिखा के वॉट्सएप पर शालिनी का इसीएचएस और आधार कार्ड भेजा। दोनों कार्ड के आधार पर तनु को अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिखा ने इसके बदले दानिश को एक लाख रुपये दिए थे।

अस्पताल कर्मियों से सांठगांठ कर मरीज को कराते थे भर्ती

गिरोह के सदस्य जो लोग इलाज का पूरा खर्च नहीं उठा सकते उन्हें लालच देकर फर्जी नाम और दस्तावेजों से अस्पताल में भर्ती कराते थे। गिरोह का मास्टर माइंड दानिश व उसका साथी प्रदीप है। यही दोनों फर्जी इसीएचएस और आधार कार्ड का इंतजाम करते थे। अस्पताल कर्मियों से साठगांठ कर मूल दस्तावेज दिए बिना मरीज को भर्ती करा देते थे।

जेल से बाहर आने के बाद फिर से हो गए थे सक्रिय

दानिश और प्रदीप दो वर्ष से इसी तरह ठगी कर रहे थे। दोनों को ऐसे ही मामले में नोएडा फेज-दो कोतवाली पुलिस जेल भेज चुकी है। जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से दोनों सक्रिय हो गए। पुलिस फरार प्रदीप की तलाश कर रही है।

आरोपितों से बरामद आईफोन-15 से ही वॉट्सएप पर फर्जी इसीएचएस और आधार कार्ड भेजे गए थे। अन्य भी डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। दानिश पर वर्ष 2025 में नोएडा फेज-दो और वर्ष 2026 में बिसरख में भी ऐसे ही मामले दर्ज किए गए थे।

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