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    जूना अखाड़े का बड़ा फैसला: सिद्धपीठ काली माता और नौ देवी मंदिर को मिले नए महंत, विवाद का पटाक्षेप

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 10:54 PM (IST)

    जूना अखाड़ा ने मुरादाबाद के लालबाग स्थित काली माता और नौ देवी मंदिरों में चल रहे विवाद को समाप्त करते हुए नए महंत नियुक्त किए हैं। सज्जन गिरि और राम ग ...और पढ़ें

    मंदिर से हाथ पकड़कर सज्जनगिरी महाराज(बाएं) और रामगिरि महाराज(दाएं) को पकड़कर लेकर जाते जूना अखाड़ा के पदाधिकारी।जागरण

    मंदिर से हाथ पकड़कर सज्जनगिरी महाराज(बाएं) और रामगिरि महाराज(दाएं) को पकड़कर लेकर जाते जूना अखाड़ा के पदाधिकारी।जागरण

    HighLights

    1. सज्जन गिरि का जूना अखाड़ा व्याधमेध घाट प्रयागराज व राम गिरी का दस मंदिर जूना अखाड़ा स्थानांतरण

    2. प्रतिनिधिमंडल के प्रवेश करते ही डेढ़ घंटे दर्शन और पूजन रहा बंद, छावनी में तब्दील रहा पूरा मंदिर परिसर

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। लालबाग स्थित सिद्धपीठ प्राचीन काली माता मंदिर और सिद्धपीठ नौ देवी मंदिर को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद का गुरुवार को पटाक्षेप हो गया। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने निवर्तमान महंत सज्जन गिरि और राम गिरि को हटाकर महाकाल गिरि महाराज व हितेश्वर गिरि महाराज को विधि-विधान के साथ कार्यवाहक महंत के रूप में गद्दी पर बैठा दिया। दोनों मंदिरों की व्यवस्था नए महंतों को सौंप दी गईं।

    पहले से कार्यरत पुजारियों को भी हटा दिया गया और उनकी जगह वशिष्ठ गिरि व इच्छा गिरि को नया पुजारी नियुक्त किया गया। सज्जन गिरि और राम गिरि को कार में बैठाकर जूना अखाड़ा का प्रतिनिधि मंडल प्रयागराज ले गया। सज्जन गिरि को जूना अखाड़ा व्याधमेध घाट प्रयागराज व राम गिरी को दस मंदिर जूना अखाड़ा स्थानांतरण किया गया।

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    शाम करीब 6:30 बजे जूना अखाड़ा का प्रतिनिधि मंडल मंदिर पहुंचा। स्थिति को देखते हुए पुलिस सक्रिय दिखी और मंदिर परिसर का कोना-कोना छावनी में तब्दील रहा। प्रतिनिधि मंडल ने अंदर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन बंद करा दिया और करीब डेढ़ घंटे तक किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

    वीडियो बनाने और फोटो खींचने पर भी रोक लगा दी गई। कार्रवाई के दौरान निवर्तमान महंत सज्जन गिरि अपने कमरे से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे। इसके बाद जूना अखाड़ा के महंतों ने उन्हें बाहर निकाला और सिद्धपीठ नौ देवी मंदिर में ले जाकर एक कमरे में बैठा दिया।

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    वहीं मंदिर के चारों कमरों पर अखाड़े के प्रतिनिधियों ने ताले लगा दिए। इसके बाद दोनों कार्यवाहक महंतों को गद्दी सौंपी गई। बता दें कि मंदिर की संपत्ति और व्यक्तित्व को लेकर सज्जन गिरि व राम गिरि के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो सिविल कोर्ट में विचाराधीन है।

    दोनों एक-दूसरे पर मंदिर संपत्ति के दुरुपयोग और व्यक्तिगत आरोप लगाते रहे हैं। बुधवार को जूना अखाड़ा की ओर से जब दोनों को हटाया गया। तब दोनों एकजुट हो गए। संयुक्त रूप से बयान जारी कर विवाद समाप्त होने की बात कही।

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    सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर गाजियाबाद के पीठाधीश्वर व जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरी महाराज ने बताया कि बीते कई वर्षों से दोनों महंतों के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं। कई बार पंचायत व चेतावनी भी दी गई, लेकिन सुधार नहीं हुआ।

    बुधवार को मुरादाबाद आकर पहले मंदिर में पंचायत की फिर कलक्ट्रेट पहुंचकर दोनों महंतों को हटाए जाने की जानकारी दी थी। गुरुवार को नियुक्ति पत्र सार्वजनिक कर नए महंतों को गद्दी सौंपी गई। नारायण गिरी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार मंदिरों में बेहतर व्यवस्था के लिए योग्य महंत नियुक्त किए जा रहे हैं।

    जूना अखाड़ा की परंपरा के अनुसार महंत प्रबंधक की भूमिका में होते हैं, मालिक नहीं। विशेष परिस्थितियों में उन्हें हटाने का अधिकार अखाड़े के शीर्ष नेतृत्व को है। आगे का निर्णय अखाड़े की 52 सदस्यीय महासभा लेगी।

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