Border 2 Box Office: 'बॉर्डर ही बदल देंगे...' वरुण धवन के डायलॉग पर सिनेमाघरों में मची धूम, 26 तक एडवांस बुकिंग फुल!
मुरादाबाद में देशभक्ति फिल्म 'बॉर्डर 2' सिनेमाघरों में छा गई है। रिलीज के दूसरे दिन ही सभी प्रमुख सिनेमा हॉल हाउसफुल रहे, दर्शकों में जबरदस्त उत्साह द ...और पढ़ें

बार्डर 2
HighLights
सनी देओल फतेह सिंह के किरदार में दर्शकों को खूब आए पसंद
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बहु प्रतीक्षित देशभक्ति फिल्म बार्डर 2 शहर के सिनेमाघरों में रिलीज होते ही छा गई। रिलीज के दूसरे दिन शनिवार को फिल्म को लेकर सुबह से ही दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। शहर के वेव ,पीवीआर, मूवीटाइम मिग्लानी सहित प्रमुख सिनेमा हाल हाउसफुल रहे। सुबह पहले शो से ही सिनेमाघरों के बाहर लोगों की भीड़ रही।
28 साल पहले आई सुपरहिट फिल्म बार्डर की यादें ताजा करते हुए बड़ी संख्या में लोग अपने पूरे परिवार के साथ फिल्म देखने पहुंचे। कहीं बुजुर्ग अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ सिनेमाघरों के भीतर प्रवेश करते नजर आए। जैसे ही परदे पर सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी और सोनम बाजवा की दमदार मौजूदगी सामने आई, दर्शकों का जोश दोगुना हो गया।
खासकर जब वरुण धवन का डायलाग इस बार बार्डर में घुसेंगे नहीं, बार्डर ही बदल देंगे परदे पर गूंजा, तो पूरा सिनेमा हाल तालियों और सीटियों से गूंज उठा। कई दर्शक अपनी सीटों से खड़े होकर जवानों के सम्मान में तालियां बजाते नजर आए। वहीं सनी देओल फतेह सिंह के किरदार में आकर कहा हमारे गांव में एक कहावत है, हम पूजा भले ही राम की करें, लेकिन तेवर परशुराम के रखते हैं।
जिस पर दर्शकों ने खूब तालियां और सीटियां बजाईं। वेव सिनेमा के मैनेजर चमन कुमार ने बताया कि फिल्म को जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है। दर्शकों ने आनलाइन के साथ-साथ खिड़की से भी 26 जनवरी तक की टिकटें एडवांस में बुक करा ली हैं।
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कहानी : किरदार में सनीलौटे हैं। 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग से, जब दुश्मन देश एक बार फिर नापाक इरादों के साथ भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश करता है। तो सिख रेजिमेंट के शेरदिल कमांडर फतेह सिंह अपने जवानों के साथ सीमा पर डटे हुए हैं।
वहीं दूसरी ओर मेजर होशियार दहिया (वरुण धवन) दुश्मन के हर मंसूबे को नाकाम करने के लिए तैयार हैं। इसको देख दर्शक भारत माता की जय के नारे लगाने लगे। फिल्म में 1961 के नेशनल वार अकादमी में, जहां थलसेना, वायुसेना और नौसेना के कैडेट्स को एक साथ ट्रेनिंग दी जाती है।
यहीं पर होशियार की मुलाकात महेंद्र सिंह रावत (अहान शेट्टी) और निर्मल सिंह (दिलजीत दोसांझ) से होती है। फिर जब गोलियों की आवाज, टैंकों की गड़गड़ाहट और जवानों का अदम्य साहस ओर सैनिकों के परिवारों की चिंता, मां की आंखों में इंतजार और पत्नी की खामोशी दर्शकों का दिल को छू जाती है।
फिल्म के आखिरी 30 मिनटों ने किया भावुक
फिल्म के आखिरी 30 मिनट दर्शकों को भीतर तक झकझोर देते हैं। युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंचता है और सैनिकों के बलिदान की कीमत साफ दिखाई देने लगती है। सीमा पर गोलियों की बौछार, धुएं से भरा मैदान और घायल साथियों को कंधे पर उठाकर ले जाते जवानों के दृश्य ने पूरे सिनेमा हाल को खामोश कर दिया।
कई दर्शक भावुक होकर अपनी आंखें पोंछते नजर आए। अंतिम युद्ध दृश्य में जब फतेह सिंह अपने घायल जवानों के साथ आखिरी मोर्चा संभालते हैं, तो सिनेमा हाल में कहीं से भी बातचीत की आवाज नहीं सुनाई दी। फिल्म के अंतिम दृश्य में शहीदों को दी गई सलामी और बैकग्राउंड में बजता भावनात्मक संगीत दर्शकों की आंखें नम कर गया।
देशभक्ति के गानों ने बढ़ाया जोश
फिल्म के गाने भी दर्शकों को खासा पसंद आ रहे हैं। फिल्म का मुख्य देशभक्ति गीत सरहद की मिट्टी पुकारे सिनेमाघरों में आते ही तालियों की गूंज पैदा कर देता है। यह गीत जवानों के हौसले और देश के लिए मर-मिटने के जज़्बे को बखूबी बयां करता है। वहीं मां तुझे सलाम जैसे भावनात्मक गीत ने दर्शकों को भावुक कर दिया।