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मीरजापुर में वन विभाग की 40 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप, जेसीबी से पेड़ काटकर नींव की खोदाई

By ArunEdited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 01 Sep 2026 04:44 PM (IST)

राजगढ़ के सेमरी जंगल में वन विभाग की 40 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगा है, जहां जेसीबी ...और पढ़ें

हरे-भरे पेड़ों को काटने के साथ ही बाउंड्री निर्माण के लिए गड्ढे और नींव की खोदाई कर रहे हैं।

हरे-भरे पेड़ों को काटने के साथ ही बाउंड्री निर्माण के लिए गड्ढे और नींव की खोदाई कर रहे हैं।

HighLights

  1. सेमरी जंगल में 40 एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जा।

  2. जेसीबी से पेड़ काटकर बाउंड्री निर्माण की खुदाई जारी।

  3. ग्रामीणों ने वन विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाया।

जागरण संवाददाता, राजगढ़ (मीरजापुर)। सुकृत वन क्षेत्र के सेमरी जंगल में वन विभाग की लगभग 40 एकड़ जमीन पर लगातार दो दिनों से अवैध कब्जा किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, अतिक्रमणकारी जेसीबी और बुलडोजर का उपयोग कर जंगल की जमीन पर हरे-भरे पेड़ों को काटने के साथ ही बाउंड्री निर्माण के लिए गड्ढे और नींव की खोदाई कर रहे हैं।

मामले की सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। सेमरी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन कई वर्षों से वन विभाग के अधीन है। जमीन के दोनों तरफ जंगल, एक तरफ नदी और सामने चुनार-राजगढ़ संपर्क मार्ग स्थित है।

ग्रामीणों के अनुसार, वन विभाग ने पूर्व में बोल्डर लगाकर जमीन का घेराव भी कराया था, लेकिन इसके बावजूद पिछले दो दिनों से जेसीबी चलाकर जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों को मामले की जानकारी होने के बावजूद मौके पर समय पर नहीं पहुंचा गया।

ग्रामीणों में शिव कुमार, सरोज, जगन्नाथ, भोला, भूंवर, शिवबालक और रामनरेश समेत अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से जंगल की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर जंगलों को बचाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए वन नष्ट किए जा रहे हैं।

इस संबंध में डीएफओ मीरजापुर राकेश कुमार ने बताया कि, मौके पर जाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वन विभाग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए ताकि जंगल की जमीन को बचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग समय पर कार्रवाई करता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब देखना यह है कि वन विभाग इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी प्रभावित करती हैं।