सौरभ राजपूत हत्याकांड: मुस्कान और साहिल दोषी करार, अब सजा का इंतजार; अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से की फांसी की मांग
मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला जज ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। 126 ...और पढ़ें
HighLights
जिला जज की अदालत ने दोनों को दोषसिद्ध कर दिया।
मेरठ में तीन मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या।
जागरण संवाददाता, मेरठ। शहर के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में 477 दिन बाद न्याय का समय आ गया। जिला जज अरविंद मिश्रा की अदालत ने सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को हत्या के लिए दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों ने मिलकर सौरभ की हत्या की और शव को नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से भर दिया।
निर्णय के समय अदालत में अधिवक्ताओं और पीड़ित पक्ष के लोगों की भीड़ थी, जबकि मीडिया का जमावड़ा भी बाहर मौजूद था। डीसीजी केके चौबे ने अदालत के निर्णय के बारे में जानकारी दीबताया कि अदालत ने साहिल तथा मुस्कान को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। इस मामले में सजा पर निर्णय के लिए 14 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गई है।
तीन मार्च 2025 को दिया था वारदात को अंजाम
तीन मार्च 2025 को ब्रह्मपुरी निवासी सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने हत्या कर दी थी। हत्या के दूसरे दिन दोनों हिमाचल में घूमने चले गए थे। वहां से 17 मार्च को लौटने के बाद 18 मार्च को सौरभ की हत्या का पर्दाफाश किया। 19 मार्च को पुलिस ने हत्या के आरोप में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
नीले ड्रम को काटकर से निकाला था सौरभ का शव
नीले ड्रम को काटकर घर के अंदर से सौरभ का शव निकाला था। ब्रह्मपुरी थाने में तैनात तत्कालीन इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी ने मुकदमे में 90 दिन बाद आरोप पत्र दाखिल कर दिया। 477 दिनों में 126 तारीखों पर सुनवाई हुई। सरकारी अधिवक्ता डीसीजी केके चौबे ने बताया कि 22 गवाह पेश किए।
14 अक्टूबर को सुनाई जाएगी सजा
बुधवार को अदालत से शाम 4:52 मिनट पर साहिल और मुस्कान ऑनलाइन रूबरू हुए। कोर्ट ने बताया कि साक्ष्य और गवाहों के मद्देनजर साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी माना जाता है। उनको अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया। सजा पर निर्णय 14 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।
सौरभ हत्याकांड के निर्णय को लेकर सुबह से अदालत के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ था। दोषी करार होने के समय पर भी अदालत अधिवक्ताओं से खचाखच भरी हुई थी। करीब तीन मिनट में ही जज अरविंद कुमार मिश्रा अपनी टिप्पणी सुनाकर वापस लौट गए। बाद में डीजीसी केके चौबे ने बताया कि पुलिस के आरोप पत्र पर सरकारी वकील ने साक्ष्यों को जोड़ा है, इसके बाद ही दोनों को दोषी करार दिया गया।
