नमो भारत स्टेशन बनेंगे आर्ट और कल्चर के 'सोशल हब', क्रांति भूमि मेरठ से राजधानी दिल्ली तक यात्रियों को मिलेगा नया अनुभव
Namo Bharat Stations: एनसीआरटीसी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने नमो भारत स्टेशनों को कला और संस्कृति के केंद्र ...और पढ़ें

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान मौजूद अधिकारी।
HighLights
एनसीआरटीसी और आईजीएनसीए ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
यात्रियों को मिलेगा भारतीय विरासत का अनूठा अनुभव।
जागरण संवाददाता, मेरठ। नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को अब अपनी यात्रा के दौरान भारतीय इतिहास, कला और समृद्ध संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिलेगी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने नमो भारत स्टेशनों को कला और विरासत से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक परंपराओं को आम जनमानस की दैनिक जीवन शैली से जोड़ना है।
सांस्कृतिक आयोजनों और प्रदर्शनियों का बनेगा केंद्र
इस साझेदारी के तहत नमो भारत स्टेशनों पर विशेष कला एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनियां,साहित्यिक कार्यक्रम, वर्कशॉप, व्याख्यान और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे। यह कदम नमो भारत स्टेशनों को केवल एक परिवहन केंद्र न बनाकर एक जीवंत 'सोशल हब' के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है। इससे यात्रियों, छात्रों, कलाकारों और स्थानीय समुदायों को भारत की विविधतापूर्ण विरासत को समझने और सराहने का सीधा अवसर मिलेगा।
ऐतिहासिक गलियारे का विशेष महत्व
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर दो ऐसे ऐतिहासिक शहरों को जोड़ता है जिनकी अपनी अलग पहचान है। देश की राजधानी दिल्ली जहां सदियों से राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रही है, वहीं मेरठ महाभारतकालीन धरोहर और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति की ऐतिहासिक भूमि है। ऐसे में इन दोनों शहरों के बीच स्थित स्टेशनों पर सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को और अधिक जीवंत बनाएगा।
दैनिक यात्रियों के लिए नया अनुभव
वर्तमान में नमो भारत कॉरिडोर पर प्रतिदिन लगभग 1.1 लाख यात्री सफर कर रहे हैं और यह नेटवर्क अब तक 4.5 करोड़ से अधिक कम्यूटर ट्रिप्स का आंकड़ा पार कर चुका है। एनसीआरटीसी का मानना है कि संस्कृति को लोगों तक पहुँचने के लिए केवल विशेष अवसरों का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि यह उनके दैनिक रास्तों का हिस्सा भी बन सकती है। आईजीएनसीए की सांस्कृतिक विशेषज्ञता और एनसीआरटीसी के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का यह संगम यात्रियों के सफर को ज्ञानवर्धक और सुखद बनाएगा।
