सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन! मेरठ में बनने जा रहा देश का पहला मानवरहित विमान व ड्रोन रन-वे, 26 को फाइनल होगा टेंडर
मेरठ में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा देश का पहला मानव रहित विमान और ड्रोन रन-वे बनाया जाएगा, जिसका टेंडर ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
मेरठ में देश का पहला ड्रोन रनवे बनेगा, टेंडर किया गया जारी
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए बीआरओ द्वारा निर्माण।
मध्यम श्रेणी के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी उपयोग कर सकेंगे।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा मेरठ में देश के पहले मानव रहित विमान व ड्रोन रन-वे का निर्माण किया जाएगा। प्रोजेक्ट शिवालिक के तहत अब मुख्य अभियंता बीआरओ देहरादून के बजाए बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक (उत्तर-पश्चिम) चंडीगढ़ कार्यालय स्तर से 371.15 करोड़ का टेंडर जारी हुआ है। 25 सितंबर तक टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। 26 सितंबर को टेंडर खोला जाएगा। सात महीने में चयनित कार्यदायी एजेंसी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करनी होगी। डीपीआर मंजूर होने के बाद 18 माह में निर्माण कार्य पूर्ण होगा। 24 महीने डिफेक्ट लायबिलिटी और बाकी के 36 महीने रखरखाव और निगरानी के लिए निर्धारित किए गए हैं।
इस रन-वे के लिए किला रोड पैरामिलिट्री फार्म की 900 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। फिलहाल इस जमीन पर प्रशिक्षण होता है। मेरठ छावनी में मिलिट्री फार्म की स्थापना वर्ष 1908 में हुई थी। 20 जुलाई 2017 को मिलिट्री फार्म बंद हो गया। मेरठ छावनी में मिलिट्री फार्म मवाना रोड से किला रोड तक फैला है। बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक (उत्तर-पश्चिम) चंडीगढ़ कार्यालय स्तर से जारी टेंडर के अनुसार इस जमीन पर 2,110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रन-वे बनाया जाएगा। यह रनवे केवल ड्रोन आपरेशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सी-295 और सी-130 जैसे मध्यम श्रेणी के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी संभालने में सक्षम होगा। बेस पर विमानों और ड्रोन को रखने के लिए 60 मीटर चौड़े और 50 मीटर लंबे 2 हैंगर भी बनाए जाएंगे।
टेंडर डालने की अंतिम तिथि 25 सितंबर
टेंडर की शर्तों के अनुसार इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर डालने की अंतिम तिथि 25 सितंबर है। 26 सितंबर को बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक (उत्तर-पश्चिम) चंडीगढ़ कार्यालय में टैंडर खोला जाएगा। इस टंडर के लिए संबंधित एजेंसी के पास एयरफील्ड या डिफेंस से जुड़े कामों का अनुभव हो और जो सेना की देखरेख में प्रोग्राम चलाने की क्षमता रखती हों।
