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अनोखा विरोध प्रदर्शन: बंदरों का रूप धरकर डीएम ऑफिस पहुंचे लोग; मेरठ नगर निगम और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी 

By Dileep Patel Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 08 Oct 2026 05:40 AM (IST)

मेरठ में बंदरों के आतंक से परेशान फूलबाग और नेहरू नगर के निवासियों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने ...और पढ़ें

वार्ड-60 के क्षेत्रवासियों ने बंदर का मुखौटा पहन व बंदरों की तरह कर नगर निगम और वन विभाग के खिलाफ किया प्रदर्शन। जागरण

वार्ड-60 के क्षेत्रवासियों ने बंदर का मुखौटा पहन व बंदरों की तरह कर नगर निगम और वन विभाग के खिलाफ किया प्रदर्शन। जागरण

HighLights

  1. निगम और वन विभाग की खींचतान से समस्या का निदान नहीं।

  2. डीएम को ज्ञापन सौंप, बंदरों को पकड़ने की मांग की।

जागरण संवाददाता, मेरठ। फूलबाग और नेहरू नगर कालोनी में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि स्थानीय लोगों का जीना मुहाल है। बंदरों का झुंड सड़कों पर आ जाता है। कभी आवागमन रोक देता है तो कभी लोगों को काटने दौड़ते हैं। बंदरों के उत्पात और प्रशासन की अनदेखी से आक्रोशित यहां के निवासियों ने बुधवार को विरोध का अनोखा तरीका अपनाया।

चेहरे पर बंदर का मुखौटा पहनकर सीधे कलक्ट्रेट पहुंचे और नगर निगम व वन विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। यह प्रदर्शन भाजपा से क्षेत्रीय पार्षद रेखा सिंह और पूर्व पार्षद नीरज सिंह के नेतृत्व में हुआ। जिलाधिकारी डा. वीके सिंह को ज्ञापन सौंपा। बंदरों को पकड़ने के बाद उन्हें छोड़ने के लिए स्थान तय करने की मांग की।

कमिश्नरी चौराहे पर लोग एकत्र हुए। यहां से पैदल नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। क्षेत्रीय पार्षद सहित लोगों ने कहा कि दो महीने से बंदरों का उत्पात बढ़ गया है। 250 से 300 बंदरों का झुंड न जाने कहां से आ गया है। दिन हो या रात सड़कों पर ही बैठे रहते हैं। छतों पर पानी की टंकी तोड़ रहे हैं। सुखाने के लिए डाले गए कपड़े फाड़ रहे हैं।

गमले पटककर तोड़ देते हैं। कई लोगों को काट भी चुके हैं। पूर्व पार्षद नीरज सिंह ने ज्ञापन देते हुए कि ये बड़ा संवेदनशीन विषय है। जिस दिन किसी व्यक्ति के साथ अनहोनी हो गई उस दिन किसी अधिकारी के पास जवाब नहीं होगा।बंदर का मुखौटा पहनकर प्रदर्शन करने वाले राहुल, सुरेश, राजकुमार ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल है। तंज कसते हुए कहा कि बंदरों से बचाओ, वरना अब कालोनी में इंसान नहीं, सिर्फ बंदर ही नजर आएंगे।

खींचतान हो बंद, बंदरों से मिले निजात
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि नगर निगम और वन विभाग की आपसी खींचतान के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। वन विभाग को स्थान तय करके बताना है। नगर निगम को बंदर पकड़वाने हैं। दोनों ही विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये के कारण जनता पिस रही है।

शहर में लगभग 50 हजार बंदर है। पत्थरवालान, खैरनगर, नेहरू नगर, स्वामीपाड़ा सहित कई मुहल्ले ऐसे हैं, जहां बंदरों की वजह से लोग मकान को लोहे के पिंजरों से ढक रहे हैं।

कपि और अन्नपूर्णा वन लगाएगा वन विभाग
शहर में लगातार बढ़ रहे बंदरों के आतंक से शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए प्रदेश सरकार के आदेश पर वन विभाग शहर के बाहरी हिस्सों में कपि और अन्नपूर्णा वन लगाएगा। इसके लिए शहर के दौराला, मोहिउद्दीनपूर, रजपुरा, परतापुर में जमीन चिन्हित की गई है। प्रत्येक कपि वन पांच हेक्टेयर में लगाए जाएंगे। इन वनों में फलदार और छायादार पौधे लगाए जाएंगे।

यह विशेष ध्यान रखा जाएगा कि बंदरों के खाने का सामान कपि वन में उपलब्ध हो। नगर निगम से अभी लिखित में बंदर छोड़ने के लिए पत्र नहीं मिला है। जब पत्र आएगा तब उपयुक्त जगह की अनुमति देने पर विचार किया जाएगा।-वंदना फोगाट, प्रभागीय निदेशक वानिकी