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    यूपी के इस शहर की सड़कों पर बढ़ेंगी ई-बसें, लगाए जाएंगे C&D वेस्ट प्लांट; हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाए जाएंगे ये कदम

    Updated: Sat, 24 Jan 2026 10:30 PM (IST)

    मेरठ में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। शहर में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ेगा और निर्माण-विध्वंस कचरा संयंत्र स्थापित ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता,मेरठ। बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शहर में कई कदम उठाए जाएंगे। सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ईलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में विस्तार और निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए सी एंड डी (कंस्ट्रक्शन एंड डिमालिशन ) वेस्ट प्लांट स्थापित किया जाएगा। साथ ही प्रतिदिन उत्सर्जित ताजे कूड़े के शत-प्रतिशत निस्तारण की व्यवस्था बनेगी। शहर की कोई भी सड़क-गली कच्ची नहीं होगी। सड़कों की साइड पटरी को भी फुटपाथ व इंटरलाकिंग टाइल्स लगाकर पक्का किया जाएगा।

    शुक्रवार को लखनऊ में प्रमुख सचिव नगर विकास पी गुरु प्रसाद, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण अनिल कुमार तृतीय और कमीशन फार एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन नेशनल कैपिटल रीजन एंड एडज्वाइनिंग एरियाज के चेयरमैन राजीव वर्मा की मौजूदगी में बैठक हुई। जिसमें नगर आयुक्त सौरभ गंगवार की ओर से मेरठ शहर की वायु गुणवत्ता सुधार का वार्षिक एक्शन प्लान प्रस्तुत किया है।

    2030 तक 540 ई-बसों के संचालन की जरूरत

    परिवहन से हो रहे कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए 2030 तक 540 ई-बसों के संचालन की जरूरत पड़ेगी। इसके क्रम में 2026 में पीएम ई-बस सेवा स्कीम में 100 बसों का प्रस्ताव दिया गया है। शहर में अभी 50 ई-बसें संचालित हैं। ई-बसें बढ़ाने के साथ 22 ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने होंगे। सरकारी-प्राइवेट सब मिलाकर कुल 21 वाहन पार्किंग हैं। जिनमें 1050 वाहन खड़े करने की व्यवस्था है।

    शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए सीएम ग्रिड योजना की सड़कों पर 15 नई सरफेश पार्किंग बनाई जा रही हैं। एक मल्टीलेवल कार पार्किंग का निर्माण चल रहा है। 15 वें वित्त आयोग के तहत वायु गुणवत्ता सुधार के लिए 187 करोड़ मिले थे। जिसके सापेक्ष 166 करोड़ खर्च हो गए हैं। 88 करोड़ रुपये शेष हैं।

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    गांवड़ी में लगेगा सी एंड डी वेस्ट प्लांट
    नगर आयुक्त ने बैठक में जानकारी दी है कि गांवड़ी में सी एंड डी वेस्ट प्लांट लगाया जाएगा। संचालन के लिए एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। अक्टूबर 2026 तक 100 टन क्षमता का सी एंड डी वेस्ट प्लांट चालू हो जाएगा। इसमें 5.51 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है। इस प्लांट में मकानों व निर्माण कार्य के दौरान टूट-फूट से निकले मलबे को निस्तारित किया जाएगा।

    890 किमी सड़कों को धूल रहित बनाएंगे

    शहर में नगर निगम क्षेत्र में कुल 2967 किमी रोड नेटवर्क है। जिसमें से 2076 किमी नेटवर्क अच्छी कंडीशन में है। 890 किमी सड़कों को धूल रहित बनाने की आवश्यकता है। निर्माण अनुभाग के सर्वे रिपोर्ट को बैठक में रखा गया है। इन सड़कों की साइड पटरी को पक्का किया जाएगा।फुटपाथ और ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। इसमें 10 मीटर से लेकर 45 मीटर चौड़ी सड़कें शामिल हैं। 1300 करोड़ धनराशि की जरूरत पड़ेगी। निगम के पास इस मद मेें 103 करोड़ रुपये हैं।

    गांवड़ी में 900 टन ताजे कूड़े के निस्तारण का टेंडर फाइनल

    नगर आयुक्त ने बैठक में यह जानकारी दी है कि गांवड़ी में 900 टन प्रतिदिन ताजे कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था बना ली गई है। 30 टन प्रतिघंटे क्षमता का बैलेस्टिक सेपरेटर प्लांट पहले से संचालित हैं, अब लोहिया नगर का 60 टन प्रति घंटे की क्षमता वाला बैलेस्टिक सेपरेटर प्लांट भी गांवड़ी में शिफ्ट कर दिया गया है। दोनों प्लांट 10 घंटे चलने पर 900 टन कूड़े का निस्तारण होगा। कूड़े से आरडीएफ, कंपोस्ट और ईंट-पत्थर की छंटाई की जाएगी।

    आरडीएफ की बिक्री होगी और कंपोस्ट किसानों को देेंगे। ईंट-पत्थर भराव में उपयोग होगा। बताया गया है कि संचालन के लिए ब्रिजेंद्रा एनर्जी कंपनी का चयन हो गया है। करीब 190 रुपये प्रति टन की दर से ताजे कूड़े का निस्तारण होगा। इसके अलावा 900 टन क्षमता का वेस्ट टू चारकोल प्लांट प्रस्तावित है।

    एनटीपीसी से अनुबंध है। इस प्लांट के लगने पर अतिरिक्त कूड़ा निस्तारण की क्षमता विकसित होगी। लोहिया नगर में डंप कूड़े के लिए डीसीसी कंपनी ने लीगेसी वेस्ट प्लांट लगा दिया है। मई 2027 तक कूड़े को पूरी तरह निस्तारित किया जाना है। मंगतपुरम में भी लीगेसी वेस्ट प्लांट संचालित है। सितंबर 2026 तक यहां का कूड़ा समाप्त किया जाना है।

    वायु गुणवत्ता सुधार का ये है लक्ष्य

    बैठक में मेरठ के वार्षिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक को 117 तक, वार्षिक औसत पीएम 2.5 को 49 और वार्षिक औसत पीएम 10 को 119 तक लाने का लक्ष्य दिया गया है। यह लक्ष्य 2026 का है।

    ई बसों के विस्तार से शहर में परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए होगा। ये बसें जीरो इमीशन करती हैं। जिससे सूक्ष्म कणों पीएम 2.5 के स्तर में कमी आती है। सी एंड डी वेस्ट प्लांट चालू होने से सड़क-गली में पड़ा रहने वाला मलबा खुले में फेंकने के बजाए निस्तारित होने से धूल कणों में कमी आएगी। एक अनुमान है कि परिवहन से कार्बन उत्सर्जन और धूल कण मिलकर लगभग 40 प्रतिशत शहरी प्रदूषण में योगदान करते हैं।

    ई बसें बढ़ने,कूड़ा प्रबंधन की शत-प्रतिशत व्यस्था, सीएंडी वेस्ट निस्तारित होने और सड़क पटरी पक्की होने से वायु गुणवत्ता सुधरेगी। 2026 के अंत तक वायु गुणवत्ता सूचकांक में 20 से 30 प्रतिशत तक सुधार लाना है। वार्षिक एक्शन प्लान के अनुसार निगम अपनी कार्य योजना पर अलम करेगा। -सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त।