यही है सनातन, यही है भारत! 'निजाम' के जनाजे को देख थमे हजारों कांवड़ियों के कदम, खामोश होकर दिया 'सौहार्द का रास्ता'
मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान इंसानियत की मिसाल देखने को मिली। हजारों शिवभक्त मुस्लिम व्यक्ति निजाम के जनाजे को रास्ता देने रूक गए। उन्होंने डीजे बं ...और पढ़ें

मेरठ-रुड़की हाईवे पर जनाजा लेकर निकल रहे मुस्लिम समाज के लोग। इस दौरान रूके कांवड़िये। जागरण
HighLights
मेरठ में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल।
हजारों शिवभक्तों ने जनाजा निकलने के दौरान डीजे भी बंद किया।
संवाद सूत्र, दौराला (मेरठ)। मेरठ-रुड़की हाईवे पर रविवार को कांवड़ यात्रा के बीच इंसानियत और भाईचारे की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सभी का दिल जीत लिया। सिवाया गांव निवासी 40 वर्षीय निजाम पुत्र शेरदीन की हार्टअटैक से मौत हो गई। स्वजन जनाजा लेकर कब्रिस्तान के लिए निकले। कब्रिस्तान कांवड़ मार्ग के दूसरी ओर है। हाईवे पर कांवड़ियों के सैलाब के बीच से जनाजा निकालने को लेकर हर कोई चिंतित था। इस चुनौती से निपटने को पुलिस ने व्यवस्था संभाली।

इस दौरान शिवभक्तों ने जो संयम और सहयोग दिखाया, उसका हर कोई मुरीद हो गया। सभी ने जमकर शिवभक्तों की सराहना की। जनाजा हाईवे पर आया तो शिवभक्ताें के कदम थम गए। भगवा सैलाब के बीच शिवभक्तओं ने जनाजे के लिए रास्ता बनाया। जनाजा हाईवे से जब गुजर गया, तब शिवभक्ताओं के कदम आगे बढ़े। इस दौरान शिवभक्तों ने सभी डीजे बंद कर दिए। भगवान भोले नाथ के जयकार भी नहीं किए।
निजाम की मौत के बाद स्वजन शव को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए जनाजा लेकर घर से निकले थे। कांवड़ यात्रा के चलते हाईवे पर बड़ी संख्या में शिवभक्त मौजूद थे। जनाजा निकालने के दौरान परेशानी से वह आशंकित थे। स्वजन ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी पर थाना दौराला प्रभारी सुमन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ ग्राम सिवाया पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग लगाने का प्रयास किया तो शिवभक्तों ने इसका कारण जानना चाहा।
पुलिस ने जब बताया कि गांव से जनाजा गुजरना है, तो कांवड़ियों ने खुद इस व्यवस्था को संभाल लिया। उन्होंने हाईवे पर आ रहे अन्य शिवभक्तों को इसकी जानकारी देनी शुरू कर दी। इसके बाद कांवड़ियों ने एक-दूसरे को रोककर जनाजे के लिए रास्ता खाली करा दिया। पुलिस देखती रही और जनाजा सहजता से हाईवे से गुजरकर कब्रिस्तान तक पहुंचा। कांवड़ मार्ग पर जहां कुछ देर पहले डीजे और भक्ति गीतों की गूंज सुनाई दे रही थी, वहीं जनाजा निकलने के दौरान पूरी तरह शांति छा गई।
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कांवड़ियों ने अपने डीजे बंद कर दिए और जनाजा निकलने तक सड़क पर अनुशासन के साथ खड़े रहे। किसी ने जल्दबाजी नहीं की। जनाजा कब्रिस्तान की ओर रवाना होने के बाद ही कांवड़ियों ने अपनी यात्रा दोबारा शुरू की। कांवड़ियों के इस सहयोग को देखकर ग्रामीण भी भावुक हो गए। ग्रामीणों ने कहा कि शिवभक्तों ने केवल जनाजे के लिए रास्ता ही नहीं दिया, बल्कि दूसरे समुदाय के व्यक्ति के अंतिम संस्कार के समय डीजे बंद कर सम्मान भी प्रकट किया।
सावन की कांवड़ यात्रा के बीच सिवाया में सामने आई यह तस्वीर आपसी भाईचारे, मानवता और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गई। शिवभक्तों के इस व्यवहार की क्षेत्र में खूब सराहना हो रही है। जनाजा कब्रिस्तान पहुंचने के बाद शिवभक्तओं ने भोले बम का जयकार किया और उनके रुके कदम आगे बढ़े। मौके पर माैजूद कई लोगों ने कहा कि यही हमारे भारत और सनातन की परंपरा है।