महिलाएं मस्जिद में नमाज पढ़ना चाहें तो अनुमति होनी चाहिए, पटना हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस ने की सुधारों की वकालत
मेरठ में सामाजिक सौहार्द सेमिनार में मुस्लिम समाज के प्रबुद्धजन जुटे, जहां महिलाओं के मुद्दों और मदरसों की शिक्षा पर चर्चा हुई। पटना हाईकोर्ट के पूर्व ...और पढ़ें

चैंबर आफ कामर्स में आयोजित सेमिनार में मंचासीन पटना हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी व अन्य प्रबुद्धजन। जागरण
HighLights
महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति की वकालत।
तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता मिलना कुरान सम्मत है।
मदरसों में विज्ञान की शिक्षा को बढ़ावा देना बेहद आवश्यक।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सामाजिक सौहार्द और विकास के मुद्दे पर आयोजित सेमिनार में मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध लोग जुटे व अपनी राय रखी। इस खास मौके पर मदरसों में दी जाने वाली तालीम को लेकर परस्पर विरोध का माहौल बना।
चैंबर आफ कामर्स में आयोजित सेमिनार में आयोजक इंपार संस्था के अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला और नियम-प्रविधानों में सुधार की वकालत की। उन्होंने शाहबानो मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि कुरान में कहीं नहीं लिखा है कि तलाकशुदा महिला को गुजारा भत्ता नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने इसी तरह मस्जिदों में महिलाओं को नमाज पढ़ने की अनुमति की बात भी की। कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर हुई है।पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर महिलाएं मस्जिद में नमाज पढ़ना चाहें तो उन्हें अनुमति होनी चाहिए। मस्जिदों में इमाम के प्रतिष्ठित ओहदे की वर्तमान में कद्र न किए जाने की बात को भी उन्होंने उठाया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ताहिर अली ने मदरसों में विज्ञान की शिक्षा दिए जाने की आवश्यकता जताई। सेवानिवृत्त मेजर जनरल जावेद इकबाल, काजी हिफजुर्रहमान, रियासत अली, जैनुर राशिदीन, रियासत अली खां, अब्दुल मजिद मौजूद रहे।