मथुरा में पंचगव्य से ठाकुर राधारमणलाल का किया महाभिषेक, शाहजी मंदिर में मनाया गया जन्मोत्सव
वृंदावन के ठाकुर राधारमण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया, जहां आराध्य का 5100 किलो पंचामृत से महाभिषेक हुआ। यह जन्मोत्सव दिन में मनाया गया।

पंचगव्य से ठाकुर राधारमणलाल का किया महाभिषेक।
HighLights
ठाकुर राधारमण मंदिर में दिन में मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव।
आराध्य का 5100 किलो पंचामृत से भव्य महाभिषेक हुआ।
भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जयकारों से गूंजा पूरा वातावरण।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। सोलह कलाओं के अवतारी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास पूरे ब्रजमंडल में फैला है। पूरे ब्रज में रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। लेकिन ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी में शुक्रवार को इस पर्व को धूमधाम से मनाया गया। सप्तदेवालयों में शामिल ठाकुर राधारमण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव दिन में ही मनाया गया।
आराध्य ठाकुर राधारमणलाल के श्रीविग्रह का पंचामृत से महाभिषेक किया गया, जिसके दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंदिर सेवायताें ने आराध्य का महाभिषेक किया, जिससे भक्तों के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
ठाकुर राधारमण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर शुक्रवार सुबह नौ बजे सेवायतों ने आराध्य के श्रीविग्रह का 5100 किलो दूध, दही, शहद, घी, शर्करा, इत्र, यमुनाजल और जड़ी-बूटियों से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ महाभिषेक आरंभ किया।
इस अवसर पर वैष्णवाचार्य शरदचंद्र गोस्वामी, अभिषेक गोस्वामी, श्रीवत्स गोस्वामी, पद्मनाभ गोस्वामी, पुंडरीक गोस्वामी, सुमित गोस्वामी और अनुराग गोस्वामी सहित अनेक गोस्वामी उपस्थित थे।
सप्तदेवालयों में शामिल राधादामोदर मंदिर में सुबह साढ़े नौ बजे सेवायत कृष्ण बलराम गोस्वामी और कनिका गोस्वामी ने गिरिराज चरणशिला और ठाकुरजी के श्रीविग्रहों का महाभिषेक किया। शाहजी मंदिर में शाह एसके गुप्ता और प्रशांत शाह ने पुजारियों के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ठाकुर राधारमणलाल का महाभिषेक किया।
ठाकुरजी को परोसे छप्पनभोग
महाभिषेक के बाद ठाकुर राधारमण मंदिर में ठाकुरजी को पंजीरी, काले तिल और मिंगी पाग का भोग अर्पित किया गया। शाम को ठाकुरजी को छप्पन प्रकार के व्यंजन भोग में अर्पित किए गए।
इसलिए दिन में मनाया जाता है जन्मोत्सव
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मथुरा में रात को मनाया जाता है, लेकिन राधारमण मंदिर में दिन में मनाने की परंपरा है, क्योंकि मान्यता है कि ठाकुर राधारमणलाल सुबह प्रकट हुए थे। इसलिए यहां दिन में ही जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है।
