पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रोपा पौधा, एक दिन भी नहीं टिक सका; वृंदावन में बंदर कर गए तहस नहस
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वृंदावन में गोपी उद्धव संवाद स्थल पर एक अशोक का पौधा रोपा था। सुरक्षा के अभाव में बंदरों ने एक ही दिन में उस पौधे को ...और पढ़ें

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा रोपित पौधा अगले दिन ही टूट गया।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। मानसून के दौरान देशभर में करोड़ों पौधे विभिन्न प्रजाति के रोपे जाते हैं। लेकिन, इनका उचित संरक्षण न होने के कारण पौधे वृक्ष का रूप लेने से पहले ही खत्म हो जाते हैं। वृंदावन में बंदरों के आतंक से पौधे भी सुरक्षित नहीं हैं।
एक दिन पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने वृंदावन प्रवास के दौरान गोपी उद्धव संवाद स्थल पर जो पौधा रोपित किया, उसे सुरक्षा इंतजाम के अभाव में बंदरों ने तोड़ दिया। ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति द्वारा रोपित पौधा एक दिन बाद ही अपना अस्तित्व खो बैठा।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिवसीय प्रवास पर वृंदावन में मंदिरों के दर्शन करने के लिए आए थे। शुक्रवार की दोपहर वृंदावन आए पूर्व राष्ट्रपति कोविंद होटल ताज विवांता में ठहरे और पहले दिन ठाकुर बांकेबिहारीजी व प्रेममंदिर के दर्शन किए। दूसरे दिन रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में मंदिर के दर्शन कर संतों से मुलाकात की और होटल सिग्नेचर का उद्घाटन कर इस्कान मंदिर के दर्शन किए।
अपने तीन दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन रविवार को पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ज्ञानगुदड़ी स्थित बैजयंती आश्रम पहुंचे। यहां धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के बाद भगवान श्रीराधा-कृष्ण की लीलास्थलियों में शामिल गोपी-उद्धव संवाद स्थल पर अशोक का पौधा रोपित किया। पूर्व राष्ट्रपति पौधारोपित कर चले गए।
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लेकिन, इस पौधे के संरक्षण की व्यवस्था न तो आयोजनकर्ता द्वारा की और न वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा की गई। सोमवार की सुबह गोपी-उद्धव संवाद स्थल पर पूर्व राष्ट्रपति काेविंद द्वारा रोपा गया पौधा टूटा पड़ा था। क्षेत्रवासियों ने बताया बंदरों ने इस पौधे को तोड़ दिया। अगर पौधारोपण के साथ ट्रीगार्ड लगाया गया होता तो पूर्व राष्ट्रपति द्वारा रोपा गया पौधा अपना अस्तित्व नहीं खोता।
गोपी उद्धव संवाद स्थल पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जो पौधा रोपित किया, वहां हमने जाल लगवाया था। जाल भी मौके पर गिरा मिला तो पौधा को भी हानि हो गई।
-आचार्य भारतीय, प्रवक्ता, बैजयंती आश्रम।