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मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ, किए गर्भगृह के दर्शन

By Digital Desk Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 04 Sep 2026 10:32 AM (IST)

सीएम योगी आदित्यनाथ जन्माष्टमी पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे, जहां उन्होंने गर्भगृह में लाला के दर्शन किए। यह मुख्यमंत्री ...और पढ़ें

HighLights

  1. गर्भगृह में लाला के दर्शन किए, चांदी से सजावट देखी।

  2. श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी की बधाई दी, संबोधित भी करेंगे।

जागरण संवाददाता, मथुरा। जन्माष्टमी के त्योहार पर सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह 9.55 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे। सीएम रहते 20वीं बार जन्मस्थान आए योगी ने सबसे पहले यहां गर्भगृह में लाला के दर्शन किए। पूरे गर्भगृह की दीवारों को चांदी की परत लगाकर सजाया गया। यहां की अद्भुत छटा सीएम निहारते रहे।

काफी देर तक उन्होंने गर्भगृह में विराजे लाला को निहारा। यहां श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। अभी सीएम योगी योगमाया मंदिर, केशवदेव मंदिर और फिर भागवत भवन में जाएंगे

मंदिर परिसर में ही श्रद्धालुओं को वह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई देंगे और संबोधित करेंगे। गुरुवार को मथुरा पहुंचे सीएम योगी ने वेटेरिनरी विश्वविद्यालय में रात्रि प्रवास किया था।

सीएम ने किया गो पूजन

सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर गो पूजन किया। कहा कि ब्रजभूमि ने सम व विषम परिस्थितियों का सामना किया है। कई आक्रमण हुए, अनेक लोगों ने अपनी आस्था को भारत पर थोपने का प्रयास किया। जिन्होंने सनातन की आस्था को मिटाने का प्रयास किया, वह मिट्टी में मिल गए।

न केवल ब्रजभूमि बल्कि पूरे भारत में श्रीकृष्ण और राधारानी की स्मृति न केवल वर्तमान में हम सबके लिए प्रेरणा है बल्कि भावी पीढ़ी के लिए आगे बढ़ने का उत्साहपूर्ण माहौल भी है। भगवान श्रीकृष्ण ने 5200 वर्ष पहले जो उद्घोष किए थे, वह आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। सज्जन शक्ति जहां होगी, उसका संरक्षण होगा।

राष्ट्र और समाज विरोधी शक्तियां जहां भी विद्वेष पैदा करने की कोशिश करेंगी, उसकी क्या गति होनी है, यह भगवान श्रीकृष्ण पहले ही कह चुके है। यह आस्था हमें एक गति देती है। अनास्था हमें नकारात्मकता की ओर ले जाती है। उसे कंस जैसी दुर्गति तय है।

यही भाव, यही आस्था ही सनातन की ताकत है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विरासत और विकास का समन्वय हम सब देख रहे हैं।

बाबा विश्वनाथ का परिसर हमें भव्यता से प्राप्त होगा, केवल कल्पना थी आज भव्य स्वरूप आ गया। हमने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की उसी कड़ी को प्रधानमंत्री ने आगे बढ़ाया है। आज अयोध्या जाते होंगे, ऐसा लगता है जैसे भगवान राम साक्षात वहां पधारे हैं, एक नई अयोध्या भव्यता के साथ है। 10 वर्ष पहले वहां ऐसे स्वरूप की कल्पना भी नहीं थी

गंदगी का मार्ग था। आज आप अयोध्या जाएं, प्रतिदिन एक लाख श्रद्धालु अयोध्या आता है। त्योहार पर संख्या और बढ़ जाती है। पांच से पचास लाख श्रद्धालु आते हैं। कहीं कोई असुविधा नहीं। अयोध्या का इंटरनेशनल एयरपोर्ट महर्षि वाल्मीकि के नाम पर बन गया। 1528 में विदेशी आक्रांता ने हमारी आस्था को समाप्त करने का प्रयास किया।

आज उन आक्रांताओं को आप ढ़ूढ़ नहीं पाएंगे, सब समाप्त हो गए। जिन लोगों को यह सब अच्छा नहीं लगता, वह अयोध्या को बदनाम कर रहे हैं। जिन्हें अच्छा लगता है, वह सोचते हैं रामलला फिर अयोध्या में विराजमान हो गए हैं। मैं योगमाया का दर्शन कर रहा था।

इसी धराधाम पर योगमाया ने अवतरित होकर कंस को चुनौती दी। योगमाया को देख मां विंध्यवासिनी धाम की याद दिलाई। ब्रज तीर्थ विकास परिषद यहां के सांस्कृितक और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए वृहद स्वरूप दे रहा है। मथुरा-वृंदावन में वही भव्य परिसर उपलब्ध कराने का प्रयास है, जैसे अयोध्या और काशी में हुआ है

इसे करने के लिए डबल इंजन की सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। यह पर्व व त्योहार केवल आस्था नहीं, आर्थिकी के आधार भी हैं। किसी न किसी रूप में समाज का हर तबके का व्यक्ति किसी न किसी रूप में जुड़ता है।

प्रभु ने हमेशा इस बात की प्रेरणा दी, उनका एक ही उद्देश्य था, अर्जुन से कहा कि तुम निमित्त मात्र हो, तुम अपना कर्तव्य करो। अगर निष्काम कर्म करोगे तो परिणाम पाओगे। किसी इच्छा से करोगे तो परिणाम नहीं पाओगे। हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें तो कोई समस्या नहीं।