कैडी से देश के नंबर-1 गोल्फर बने विजय कुमार का निधन, लखनऊ को दिलाई गोल्फ में पहचान
कैडी से देश के नंबर-1 गोल्फर बने विजय कुमार का 57 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन से लखनऊ सहित पूरे देश का गोल्फ जगत स्तब्ध ह ...और पढ़ें

विजय कुमार। इंटरनेट मीडिया
HighLights
कैडी से देश के नंबर-1 गोल्फर बने विजय कुमार
57 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन
2002 इंडियन ओपन विजेता, कई राष्ट्रीय खिताब जीते
जागरण संवाददाता, लखनऊ। कैडी से देश के नंबर-1 एक गोल्फर बने विजय कुमार का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन से लखनऊ ही नहीं, देश का गोल्फ जगत स्तब्ध है। मंगलवार की शाम ही वह लखनऊ गोल्फ क्लब में ट्रेनिंग देकर गए थे। वापस घर पहुंचे। शौचालय गए और वहीं उनकी सांसें थम गईं। वह 57 वर्ष के थे।
कैडी यानी गोल्फरों का बैग उठाकर उनके पीछे-पीछे चलने वाले विजय कुमार ने लखनऊ को गोल्फ की दुनिया में बड़ी पहचान दिलाई थी। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि वर्ष 2002 में दिल्ली गोल्फ क्लब में इंडियन ओपन की खिताबी जीत थी। इस जीत से वह अरसे तक सुर्खियों में रहे।
विजय ने वर्ष 1999 में स्काटलैंड के सेंट एंड्रयूज में आयोजित अल्फ्रेड डनहिल कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। यह बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले वह लखनऊ ही नहीं राज्य के पहले गोल्फर थे। विजय ने जब गोल्फ खेलना शुरू किया तो शायद उन्हें भी यह पता नहीं था कि एक दिन वह इस खेल पर राज करेंगे। करीब 80 के दशक में ला-मार्टीनियर ब्वायज कालेज से सटे मार्टिन पुरवा में आर्थिक तंगी से जूझने वाले युवकों ने गोल्फ क्लब में कैडी का काम शुरू किया।
ये कैडी गोल्फरों के साथ बैग उठाते-उठाते खुद भी पेशेवर खिलाड़ी बने गए। हालांकि, कुछ बड़े गोल्फरों ने कैडियों को खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। उनमें से एक कैडी विजय कुमार भी थे। 29 दिसंबर, 1968 को लखनऊ में जन्मे विजय ने वर्ष 1988 में पेशेवर गोल्फ खेलना शुरू किया। उन्होंने 1990 के दशक के मध्य से लेकर अगले दशक के आरंभ तक भारतीय घरेलू गोल्फ पर अपना दबदबा कायम रखा और कई खिताबों से न सिर्फ अपने करियर को संजोया, बल्कि लखनऊ को गोल्फ की दुनिया में पहचान दिलाई।
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कई खिताब, 'चार बार के आर्डर आफ मेरिट' विजेता विजय कुमार ने अपने करियर में कई राष्ट्रीय खिताब जीते और चार बार 'आर्डर आफ मेरिट' चैंपियन बने। उन्होंने 1995-96, 1997-98, 1998-99 और 1999-2000 सीजन में यह उपलब्धि हासिल की। यह एक रिकार्ड भी है, जो अभी भी बरकरार है। लखनऊ गोल्फ क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सदस्य डा. नवनीत सहगल ने उन्हें भारतीय गोल्फ का स्तंभ बताते हुए कहा कि विजय की उपलब्धियां और सादगी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।