वीर चक्र विजेता पिता के नक्शेकदम पर बेटा, ले. जनरल श्रींजय प्रताप सिंह संभालेंगे आर्मी ट्रेनिंग कमांड की बागडोर
लेफ्टिनेंट जनरल श्रींजय प्रताप सिंह, वीर चक्र विजेता मेजर डीएन सिंह के बेटे, शिमला में आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC) के ...और पढ़ें

बेटे ले.जनरल श्रींजय प्रताप सिंह के आर्मी ट्रेनिंग कमांड के जीओसी-इन-सी बनने के बाद घर की दीवार पर सजी तीन पीढ़ियों से सेना की गौरवशाली परंपरा की यादाें से परिचय करातीं उनकी मां विजया कुमारी और श्रींजय प्रताप सिंह इनसेट में। जागरण
निशांत यादव, लखनऊ। सन 1965 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना की कब्र बनाने वाले वीर चक्र विजेता पिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बेटा देश की आर्मी ट्रेनिंग कमांड की कमान संभालेगा। शिमला स्थित इस कमांड का नेतृत्व अब लेफ्टिनेंट जनरल श्रींजय प्रताप सिंह करेंगे। वह इस कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग- इन- चीफ (जीओसी-इन-सी) होंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल श्रींजय प्रताप सिंह के बड़े भाई लेफ्टिनेंट जनरल वीरेश प्रताप सिंह भी रक्षा मंत्रालय के एजी ब्रांच में अहम पद पर तैनात हैं।
एक के बाद दूसरा भाई पहुंचा एनडीए
लेफ्टिनेंट जनरल वीरेश प्रताप सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल श्रींजय प्रताप सिंह की कक्षा पांच तक की शिक्षा गोरखपुर में हुई। इसके बाद कक्षा छह व सात की पढ़ाई प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में हुई। दोनों भाईयों ने कक्षा नौ और दस की पढ़ाई लखनऊ के छावनी स्थित सेंट पाल्स स्कूल से की।
इसके बाद एएमसी सेंटर केंद्रीय विद्यालय से इंटर करने के बाद 1988 में वीरेश प्रताप सिंह का चयन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में हो गया। अगले ही वर्ष 1989 में श्रींजय प्रताप सिंह भी सफल होकर एनडीए पहुंच गए।
मां विजया कुमारी बताती हैं कि श्रींजय शुरू से ही बहुत मेधावी रहे। वह पिता मेजर धीरेंद्र नाथ सिंह की वीरता और सैन्य परंपरा से प्रभावित थे। इसलिए कड़ी मेहनत कर एनडीए में सफलता प्राप्त की। एक सितंबर को श्रींजय ने फोन करके बताया कि मां मुझे अहम जिम्मेदारी मिल रही है।
विजया बताती हैं कि एक सैन्य अफसर के रूप में श्रींजय ने अपने कर्तव्य को सदैव प्राथमिकता दी। आखिरी बार दिसंबर 2025 में व्यस्त समय में से कुछ पल निकालकर वह लखनऊ आए थे। सन 1997 में शादी के बाद पत्नी अभिलाषा सिंह को कई बार एसएफ (अग्रिम मोर्चे पर तैनात होने वाले जांबाजों के परिवार के लिए बनी विशेष कालोनी) में रहना पड़ता था।
पिता की ही रेजीमेंट में मिली कमान
सन 1961 में पिता वीर चक्र विजेता मेजर डीएन सिंह को तीन कुमाऊं रेजीमेंट में कमीशंड प्राप्त हुआ था। अब वहीं बड़े बेटे ले. जनरल वीरेश प्रताप सिंह को भी तीन कुमाऊं रेजीमेंट में कमीशंड प्राप्त हुआ। साथ ही श्रींजय प्रताप सिंह को 12 कुमाऊं में कमीशंड मिला है।
लखनऊ में मेजर डीएन सिंह की पहले केंद्रीय विद्यालय की स्थापना
लखनऊ में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना में श्रींजय प्रताप सिंह के पिता मेजर डीएन सिंह की भूमिका अहम है। सन 1965 के युद्ध में घायल होने के बाद वीर चक्र प्राप्त मेजर डीएन सिंह ने जब अपना कार्यभार संभाला तो वर्ष 1968 में उनकी तैनाती लखनऊ में हुई। मेजर डीएन सिंह ने एएमसी सेंटर केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की।
तीन पीढ़ी ने तैयार की जांबाजों की पौध
मेजर डीएन सिंह सैन्य अफसर बनने वाले परिवार के पहले सदस्य थे। पिछले वर्ष उनका देहांत हो गया। मेजर डीएन सिंह के दो बेटे वीरेश प्रताप सिंह और श्रींजय प्रताप सिंह सैन्य अफसर बने। मेजर डीएन सिंह के नाती मेजर दिग्विजय सिंह ने तीन कुमाऊं रेजीमेंट में कमीशंड प्राप्त किया।
ले. जनरल श्रींजय प्रताप सिंह के बेटे अद्वैत विक्रम सिंह भी सैन्य अफसर बनेंगे, वह इस समय प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ले. जनरल श्रींजय प्रताप सिंह के सबसे छोटे भाई रुद्रवीर सिंह और उनकी पत्नी निशा सिंह शहर के जाने माने डॉक्टर हैं।
