UP में टीबी मुक्त अभियान को मिली गति, ग्रामीण क्षेत्रों में 2 घंटे में जांच का दावा
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अब दो घंटे में टीबी की जांच हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने 1639 नई आणविक मशीनें 75 जिलों और 827 विकास खंडों में भे ...और पढ़ें

विकास खंड स्तर के अस्पतालों में उपलब्ध कराई गईं हैं मशीनें। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
ग्रामीण क्षेत्रों में अब दो घंटे में टीबी जांच संभव।
1639 नई आणविक मशीनें ब्लॉक अस्पतालों में भेजी गईं।
16140 ग्राम पंचायतें क्षय रोग मुक्त घोषित हो चुकी हैं।
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश के प्रमुख सरकारी चिकित्सालयों के साथ ही अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दो घंटे में टीबी की जांच और रोग पहचान का दावा किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले वर्ष टीबी रोगियों की जांच के लिए 141 आणविक मशीनें खरीदी थीं। जिनका उपयोग मेडिकल कालेजों, चुनिंदा टीबी अस्पतालों में किया जा रहा था। टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू होने पर 1639 नई मशीनें और खरीदीं गईं। इन्हें 75 जिलों के साथ ही 827 विकास खंडों के अस्पतालों में भेजा गया है।
टीबी के रोगियों में प्रारंभिक दवा की संवेदनशीलता जांचने के लिए 14 प्रयोगशालाएं हैं। पांच मध्यस्तरीय संदर्भ प्रयोगशालाएं, 829 स्थिर डिजिटल एक्सरे और 357 पोर्टेबल एक्सरे इकाइयों को टीबी रोगियों की पहचान व इलाज के कार्य में लगाया गया है। वर्ष 2025 में में 7.7 लाख टीबी रोगियों का पंजीकरण हुआ जो निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत था। चालू वर्ष के छह माह में 3.37 लाख टीबी के रोगी खोजे गये हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इसके परिणाम स्वरूप प्रदेश के 16140 ग्राम पंचायत क्षय रोग मुक्त हो चुकी हैं।
एनएचएम की निदेशक व स्वास्थ्य सचिव डा.पिंकी जोवल का कहना है कि प्रत्येक ब्लाक, सीएचसी और क्षय रोग इकाइयों में आणविक जांच मशीनें भेजी गयी हैं। आरोग्य मंदिरों में कैंप लगाया जाता है, जहां लैब तकनीशियन जांच कर दो घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल जाती है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के क्षय रोग विभाग के प्रोफेसर संतोष कुमार का कहना है कि मशीन से दो घंटे में रिपोर्ट मिल जाती है। पहले स्पुटम (बलगम) के कल्चर में दो से तीन दिन लगते थे। स्वास्थ्य महानिदेशक डा.पवन कुमार अरुण का कहना है कि स्पुटम जांच और एक्सरे के लिए पोर्टेबल मशीने प्रत्येक अस्पताल में उपलब्ध करायी गयी है।
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कैसी होती है जांच
मशीन किसी भी व्यक्ति के बलगम से टीबी के बैक्टेरिया का जेनेटिक मटेरियल खोजती है। इसी वजह से कम मात्रा में होने के बाद भी टीबी के बैक्टेरिया को पहचान लेती है। विशेषता यह है कि दवा-प्रतिरोध का संकेत भी इससे मिल जाता है। मशीन को मरीज तक ले जाया जा सकता है और यह एक्सरे से बेहतर परिणाम देती है।