यूपी के 67449 उपभोक्ताओं को पहला बिजली बिल ही नहीं दे पाईं बिजली कंपनियां, परिषद ने उठाई मुआवजे की मांग
उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों ने अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच झटपट पोर्टल से दिए गए 67,449 नए कनेक्शनों का पहला बिल जारी नहीं किया है। उपभोक्ता प ...और पढ़ें

HighLights
67,449 नए कनेक्शनों को पहला बिल नहीं मिला।
पूर्वांचल निगम में सबसे अधिक 22,277 मामले लंबित।
उपभोक्ता परिषद ने मुआवजे की मांग की है।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बिजली संबंधित सेवाएं लगातार बेहतर किए जाने के दावों के बाद भी प्रदेश की बिजली कंपनियां अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच झटपट पोर्टल के माध्यम से दिए गए 67,449 नए कनेक्शन पर पहला बिल नहीं दे पाई हैं।
पहला बिल नहीं बनने के सबसे अधिक 22,277 मामले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम से हैं। उपभोक्ता परिषद ने लंबित मामलों का निस्तारण कराने के साथ ही जिन उपभोक्ताओं को पहला बिल अधिक विलंब से दिया गया है, बिलिंग चक्र के हिसाब से मुआवजा उनके बिल में समायोजित किए जाने की मांग की है।
उपभोक्ता परिषद ने बताया है कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए सप्लाई कोड-2025 में पहला बिल जारी करने के संबंध में स्पष्ट प्रविधान है। जिसके मुताबिक नए कनेक्शन को ऊर्जा प्रदान किए जाने की तारीख से दो बिलिंग चक्र में प्रथम बिल जारी नहीं किए जाने पर संबंधित बिजली कंपनी प्रत्येक बिलिंग चक्र के लिए 500 रुपये की दर से उपभोक्ताओं को मुआवजा देगी।
वितरण कंपनियों के 1429 प्रकरण शामिल
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया है कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच झटपट पोर्टल पर प्रथम बिल जनरेशन के लंबित 67,449 मामलों में पूर्वांचल के 22,277, मध्यांचल के 18,914, पश्चिमांचल के 12,080, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के 12,749 तथा अन्य वितरण कंपनियों के 1,429 प्रकरण शामिल हैं।
खबरें और भी
निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के साथ भी ऐसी दिक्कतें हैं। निवेश मित्र पोर्टल पर प्रथम बिल जनरेशन के 1540 मामले लंबित हैं। इनमें दक्षिणांचल के 380, केस्को के 53, मध्यांचल के 362, पश्चिमांचल के 750 तथा पूर्वांचल के 295 मामले शामिल हैं।
यह भी पढ़ें- 4 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराएगा IRCTC, किराए की भी टेंशन खत्म; EMI की मिलेगी सुविधा
पहला बिल जारी करने में जितना विलंब होता है, संबंधित उपभोक्ताओं पर एक साथ उतरना ही अधिक बिलिंग भार पड़ता है। इस मामले में नियामक आयोग द्वारा बनाए गए कानून का उल्लंघन किया जा रहा है।