साइबर फ्रॉड में डूबी रकम भी होगी वापस, करना होगा बस ये काम
साइबर फ्रॉड या डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या एनसीआरबी पोर्टल पर शिकायत करें। एक घंटे के भीतर सूचना देने से रक ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। साइबर फ्रॉड या डिजिटल अरेस्ट से ठगी का शिकार बने हैं तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पोर्टल पर इसकी सूचना दें।
यदि एक घंटे के अंदर ठगी की सूचना दर्ज करा दी जाए तो, आपकी रकम का काफी हिस्सा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। जल्द शिकायत और पुलिस-बैंक समन्वय से उत्तर प्रदेश पुलिस ने जनवरी में 48.45 करोड़ रुपये संदिग्ध खातों में फ्रीज कराकर वापस पाने में सफलता पाई है। इस उपलब्धि के लिए देश भर में उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर है।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बुधवार को बताया कि साइबर अपराध होने के बाद एक घंटे के अंदर शिकायत दर्ज कराने को ‘गोल्डन आवर’ का नाम दिया गया है।
ठगी का शिकार होने की जल्द सूचना मिल जाने से साइबर सेल संबंधित बैंक और पेमेंट गेटवे से संपर्क कर संदिग्ध खातों में गई रकम को तुरंत फ्रीज कराता है, जिससे रुपया किसी अन्य खाते में ट्रांसफर होने से बच जाता है।
जनवरी में प्रदेश में 29,715 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 138.32 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस रकम में से पुलिस ने 48.45 करोड़ रुपये संदिग्ध खातों में 'लियन' लगाकर फ्रीज कराया गया।
लियन प्रक्रिया से रोका जाता है लेन-देन
डीजीपी ने बताया कि लियन वह प्रक्रिया है, जिसमें संदिग्ध खातों में रकम को ट्रांसफर करने से रोका जाता है। इस तरह रकम को वापस पाने का प्रतिशत लगभग 35.02 है।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया संदेशों, थानों, स्कूल–कालेज में जागरूकता अभियान से हेल्पलाइन नंबर पर घटना के तुरंत बाद शिकायत करने वालों की संख्या बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश पांच महीने में 24वें नंबर से देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
साइबर ठगी की रकम को बचाने में दादरा नगर हवेली और दमन दीव लगभग 62.45 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर हैं। हरियाणा 35.72 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। इस सूची में गुजरात को चौथा और चंडीगढ़ को पांचवा स्थान मिला है।
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थानों पर मदद कर रहे प्रशिक्षित सिपाही
कोई पीड़ित हेल्पलाइन नंबर और पोर्टल पर शिकायत नहीं कर पाता है, तो वह नजदीकी थाने पर मदद के लिए जा सकता है। दो प्रशिक्षित सिपाही और एक इंस्पेक्टर साइबर फ्रॉड की स्थिति में मदद के लिए तैनात किए गए हैं। थानों पर साइबर ठगी की शिकायत लेकर जाने वालों को अब वापस नहीं लौटना पड़ेगा।