सपा एमएलसी मुकुल यादव के नाम पर फर्जी सवाल, विधान परिषद में जांच के आदेश, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
सपा एमएलसी मुकुल यादव के फर्जी हस्ताक्षर कर विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित प्रश्न लगाने का मामला सामने आया है। ...और पढ़ें

HighLights
सपा एमएलसी मुकुल यादव के फर्जी हस्ताक्षर से प्रश्न दाखिल।
विधान परिषद सभापति ने अनुसचिव को सौंपी जांच का जिम्मा।
जालसाजी करने वाले की पहचान को सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सपा के विधान परिषद (एमएलसी) सदस्य मुकुल यादव के फर्जी हस्ताक्षर के विधान परिषद के मानसून सत्र में प्रश्न लगाने को लेकर खलबली मची हुई है। विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने सपा एमएलसी की शिकायत के बाद अनुसचिव रामेंद्र भाई पटेल को जांच का जिम्मा सौंपा है।
आशंका जताई जा रही है कि सवाल दाखिल करने की आफलाइन व्यवस्था में फर्जी हस्ताक्षर से प्रश्न लगाया गया, ऐसे में सवाल लगाने वाले की पहचान के लिए परिषद में लगे सीसी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। एमएलसी के नाम से पूछे गए प्रश्न में स्वास्थ्य विभाग संबंधी सूचना मांगी गई थी।
तीन से पांच अगस्त तक चले विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान सपा सदस्य के नाम से नियम 111 के तहत प्रश्न लगाया गया था, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों के सुबह 9.45 बजे तक कार्यालय आना अनिवार्य होने और देरी होने पर आधा दिन का वेतन काटे जाने के संबंध में सूचना मांगी गई थी। इसकी जानकारी मिलने पर सपा सदस्य ने सभापति को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है।
सपा सदस्य ने लिखा है कि उनके नाम व कथित हस्ताक्षर का प्रयोग कर पांच अगस्त को एक सूचना प्रस्तुत की गई है। उनके द्वारा ऐसी कोई सूचना नहीं मांगी गई और न ही पत्र पर उनके हस्ताक्षर हैं। इस पर सभापति ने जांच के आदेश दिए हैं।
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विधान परिषद में प्रश्न लगाने-सूचना मांगने के लिए आनलाइन और आफलाइन, दोनों व्यवस्थाएं हैं। आफलाइन के लिए एक बाक्स भी रखा गया है। प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि सूचना को आफलाइन व्यवस्था से मांगा गया है।
विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह ने बताया कि मामले की जांच अनुसचिव को सौंपी गई है। 15 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जहां प्रश्नों को लिया जाता है वहां के सीसी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है ताकि जालसाजी करने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके।
पिछले वर्ष भी फर्जी हस्ताक्षर से मांगी गई थी सूचना
विधान परिषद में पिछले वर्ष भाजपा सदस्य विजय बहादुर पाठक के नाम से इसी तरह फर्जी हस्ताक्षर कर प्रश्न लगाया गया था। भाजपा सदस्य ने इस मामले को सदन में भी उठाया था। इस पर सभापति ने जांच के आदेश देने के साथ ही आफलाइन प्रश्न लगाने वाले क्षेत्र में सीसी कैमरों को इस तरह लगाने के निर्देश दिए थे कि प्रश्न जमा करने वालों की पहचान की जा सके।