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यूपी में आयुष शिक्षा का डिजिटल कायाकल्प, बिना शव के मानव शरीर रचना सीखेंगे छात्र; योगी सरकार लाएगी 3-D एनाटोमेज टेबल

Updated: Sat, 16 May 2026 07:50 PM (IST)

योगी सरकार उत्तर प्रदेश के आयुष चिकित्सा संस्थानों में 3-डी एनाटोमेज टेबल (डिजिटल शवगृह) ला रही है। यह तकनीक छात्रों को शवों की कमी के बावजूद मानव शरीर रचना का आधुनिक और सटीक अध्ययन करने में मदद करेगी, जिससे यूपी चौथा राज्य बनेगा।

यूपी आयुष कॉलेजों में 3-डी एनाटोमेज टेबल से डिजिटल शरीर रचना अध्ययन

यूपी आयुष कॉलेजों में 3-डी एनाटोमेज टेबल से डिजिटल शरीर रचना अध्ययन

HighLights

  1. आयुष चिकित्सा शिक्षा में 3-डी एनाटोमेज टेबल का उपयोग।

  2. शवों की कमी दूर कर डिजिटल शरीर रचना अध्ययन संभव।

  3. उत्तर प्रदेश चौथा राज्य, आधुनिक तकनीक से लैस होगा।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार आयुष चिकित्सा शिक्षा को ग्लोबल स्टैंडर्ड पर ले जाने के लिए तकनीक का एक नया अध्याय शुरू करने जा रही है। प्रदेश के आयुष चिकित्सा संस्थानों में पढ़ाई और व्यावहारिक प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार अब अत्याधुनिक 3-डी एनाटोमेज टेबल (डिजिटल शवगृह) उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इस क्रांतिकारी कदम का उद्देश्य आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी पद्धतियों से जुड़े छात्रों और डॉक्टरों को मानव शरीर रचना (Anatomy) का आधुनिक, सटीक और वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध कराना है, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नए युग की तकनीक से जोड़ा जा सके।

शवों की कमी का हाई-टेक समाधान

दरअसल, देश भर के चिकित्सा संस्थानों में पढ़ाई के लिए वास्तविक शवों (कैडेवर) की उपलब्धता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। सीमित संसाधनों के कारण आयुष छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने में काफी कठिनाई होती थी। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए योगी सरकार ने डिजिटल रणनीति अपनाई है, जिसे लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का चौथा राज्य बनने जा रहा है। आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी ने बताया कि शुरुआती चरण में यह अत्याधुनिक सुविधा लखनऊ स्थित राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज और राजकीय तकमील-उत्तिब यूनानी कॉलेज में शुरू की जाएगी।

क्या है 'डिजिटल शवगृह' और इसकी खासियत?

तकनीकी रूप से बेहद उन्नत 3-डी एनाटोमेज टेबल को “डिजिटल शवगृह” भी कहा जाता है। यह एक विशाल टच-स्क्रीन आधारित प्रणाली होती है, जिसमें वास्तविक मानव शरीर के हाई-रिजॉल्यूशन 3-डी मॉडल पहले से लोड रहते हैं। इसकी मदद से छात्र बिना किसी वास्तविक शव के भी मानव शरीर की त्वचा, मांसपेशियों, नसों, रक्त वाहिकाओं और हड्डियों को परत-दर-परत (Layer-by-Layer) देखकर बेहद सूक्ष्मता से अध्ययन कर सकते हैं।

आभासी विच्छेदन और सटीक इलाज में मददगार

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसका आभासी विच्छेदन (वर्चुअल डिसेक्शन) है। विद्यार्थी स्क्रीन पर केवल उंगलियों के स्पर्श से शरीर के किसी भी हिस्से को 360 डिग्री घुमा सकते हैं, ज़ूम कर सकते हैं और एक्स-रे व्यू के जरिए आंतरिक संरचनाओं को गहराई से समझ सकते हैं। यह तकनीक सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है; इसमें मरीजों के सीटी स्कैन और एमआरआई को अपलोड कर उनका त्रि-आयामी मॉडल तैयार किया जा सकता है। इससे सर्जन्स और चिकित्सकों को बीमारियों का सटीक विश्लेषण करने और जटिल सर्जरी की योजना बनाने में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी।

देश के चुनिंदा राज्यों की लीग में शामिल होगा यूपी

वर्तमान में यह अत्याधुनिक तकनीक देश के बेहद चुनिंदा संस्थानों जैसे—दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान और कर्नाटक के हासन स्थित एसडीएम आयुर्वेद कॉलेज में ही उपलब्ध है। लखनऊ के तीन प्रमुख कॉलेजों में इस सिस्टम के इंस्टॉल होते ही उत्तर प्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य बन जाएगा, जो अपने आयुष छात्रों को इतनी उन्नत तकनीक प्रदान कर रहा है। यह पहल भविष्य में आयुष क्षेत्र को अधिक दक्ष और योग्य सर्जन व चिकित्सक देने में मील का पत्थर साबित होगी।