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अंसल API के होम बायर्स के लिए बड़ी खबर, NCLAT ने सुरक्षित रखा फैसला, फंस सकता है ये बड़ा पेंच

Published: Fri, 09 Oct 2026 05:38 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 09 Oct 2026 05:42 AM (GMT+05:30)

अंसल एपीआई के सुशांत गोल्फ सिटी प्रोजेक्ट के टेकओवर में 'कॉमन सीओसी' के कारण नया पेच फंस गया है। एनसीएलटी ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. अंसल एपीआई मामले में एनसीएलएटी में सुनवाई पूरी हुई।

  2. सुशांत गोल्फ सिटी टेकओवर में 'कॉमन सीओसी' बनी बाधा।

  3. एनसीएलटी ने आदेश सुरक्षित रखा, होमबायर्स चिंतित।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मेसर्स अंसल प्रापर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (अंसल एपीआइ) के रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) नवनीत गुप्ता की अर्जी पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। परियोजना के आरपी ने अंसल एपीआइ की लखनऊ व राजस्थान की कुल चार योजनाओं की कामन सीओसी (कमिटी आफ क्रेडिटर्स) का मोड एंड मैनर बताया, इससे शहर की सुशांत गोल्फ हाईटेक टाउनशिप की दिशा बदल सकती है।

हाईटेक टाउनशिप को टेकओवर करने की प्रक्रिया में कामन सीओसी का पेच फंस सकता है, होम बायर्स इसको लेकर सशंकित हैं। एनसीएलटी ने आदेश सुरक्षित कर लिया है, इस प्रकरण के अन्य मामलों की दो नवंबर को सुनवाई होगी।

अंसल एपीआइ मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सात जनवरी को आदेश दिया था कि रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया में पूरी कंपनी को एक साथ निपटाने के बजाए उसके हर प्रोजेक्ट को अलग-अलग देखा जाए, ताकि एक प्रोजेक्ट के होमबायर्स का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट के कर्ज में न फंसे।

तरह-तरह की लग रहीं अटकलें

एनसीएलटी में इसके ठीक उलट दलीलें दी गई। होम बायर्स के प्रतिनिधि गगन टंडन का कहना है कि एलडीए की दलील पर प्रकरण को एनसीएलटी में भेजा गया था, सुशांत गोल्फ सिटी प्रोजेक्ट पर अलग से चर्चा होनी चाहिए, इसके लिए अर्जी देंगे। यह भी कहा, अब एलडीए का पूरा पक्ष सुने बिना फैसला सुरक्षित रखा गया है, इससे तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं।

एनसीएलटी में अंसल एपीआइ मामले की पिछली पांच तारीखों में सुनवाई नहीं हो सकी थी। ऐसे में अब सुनवाई शुरू होने पर बड़ी राहत मिली। सुनवाई शाम 4:15 बजे आरपी के अधिवक्ता ने अंसल एपीआइ की लखनऊ सुशांत गोल्फ सिटी के साथ राजस्थान की तीन अन्य योजनाओं का भी मोड एंड मैनर बताया। वहीं एलडीए के वकील ने अपनी संक्षिप्त बात रखी लेकिन, कामन सीओसी का विरोध नहीं किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने आवंटियों को राहत देने के लिए 15 सितंबर को निर्णय लिया था कि एलडीए टाउनशिप को टेकओवर करे और परियोजना को पूरा कराने का प्रस्ताव एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। सरकार ने विकास कार्य, देनदारियों के लिए 2912 करोड़ रुपये की धनराशि भी एलडीए को देने का निर्णय लिया था।

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शासनादेश जारी होने पर एलडीए ने एनसीएलटी में विस्तृत प्रस्ताव रखा लेकिन, अब कामन सीओसी होने से हाईटेक टाउनशिप को टेकओवर करने में होम बायर्स चिंतित हैं, एनसीएलटी लखनऊ की परियोजना को अलग से कैसे राहत देगा इस पर सभी की निगाहें टिकीं हैं। एलडीए से इस संबंध में पक्ष जानने का प्रयास हुआ लेकिन, जवाब नहीं मिल सका।

क्या है कामन सीओसी

जब कोई कंपनी (कारपोरेट देनदार) किसी कर्ज को चुकाने में डिफाल्ट करती है तो मामला एनसीएलटी में जाता है। एनसीएलटी के केस स्वीकार करने के बाद अंतरिम समाधान पेशेवर (इंट्रिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल) नियुक्त किया जाता है, यह आइआरपी कंपनी के सभी लेनदारों के दावों की जांच करता है। वह मुख्य रूप से कंपनी को कर्ज देने वाले वित्तीय लेनदारों जैसे बैंक, वित्तीय संस्थान और बांड होल्डर्स को मिलाकर सीओसी का गठन करता है।