यूपी के चुनावी मुकाबले में ‘खेल’ पर भी खेलेगी सपा, प्लेयर्स के लिए अलग घोषणा पत्र की तैयारी
सपा विधानसभा चुनाव के लिए खेल को एक स्वतंत्र चुनावी एजेंडे के रूप में पेश करने की तैयारी में है, जिसके लिए अलग घोषणापत्र बनाया जा रहा है।

खिलाड़ियों के लिए अलग घोषणा पत्र की तैयारी में सपा।
HighLights
सपा विधानसभा चुनाव में खेल को स्वतंत्र चुनावी मुद्दा बनाएगी।
खिलाड़ियों से संवाद कर समस्याओं को घोषणापत्र में शामिल करेगी।
भाजपा सरकार की खेल नीति के क्रियान्वयन पर सवाल उठाएगी।
दिलीप शर्मा, लखनऊ। विधान सभा चुनाव के लिए शिक्षा, रोजगार, भर्तियों में गड़बड़ी जैसे मुद्दों के सहारे युवाओं में पैठ बढ़ाने में जुटी समाजवादी पार्टी खेल पर भी राजनीतिक दांव ‘खेलने’ जा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव नई खेल नीति और विशेष कोष बनाने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। अब अलग से घोषणापत्र की तैयारी हो रही है। इसके लिए कुछ खिलाड़ियों को समस्याओं और मुद्दों की पहचान का जिम्मा दिया गया है।
जिलों में खिलाड़ियों से संवाद कर अलग-अलग खेलों की जरूरत, प्रशिक्षण की सुविधा, मैदान, उपकरण, कोच, छात्रावास और प्रतियोगिताओं से जुड़े मुद्दों की जानकारी जुटाई जा रही है। प्रदेश सरकार के खेल के क्षेत्र में सुधार के दावों को भी परखा जा रहा है।
सपा की कोशिश, खेल को युवा नीति के एक हिस्से के बजाय स्वतंत्र चुनावी एजेंडे के रूप में पेश करने की है। यह केवल खिलाड़ियों की संख्या का गणित नहीं, बल्कि उस बड़े युवा वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति है, जो रोजगार के साथ अपनी प्रतिभा और पहचान के लिए भी अवसर चाहता है।
हाल ही में सपा प्रमुख ने पीडीए का नया अर्थ ‘प्ले, डवलप, अचीव’ बताया था। वह लगातार खेल सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं और विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार घोषणापत्र में प्रतिभाओं की पहचान, बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, मैदानों की उपलब्धता, प्रशिक्षकों की नियुक्ति, प्रतियोगिताओं में भागीदारी का खर्च और खिलाड़ियों के रोजगार जैसे मुद्दों को शामिल किए जाएंगे। यह रणनीति अहम इसलिए है, क्योंकि हर खेल में अलग-अलग सामाजिक वर्ग के युवा हैं। ऐसे में खेल के बहाने सपा के लिए पीडीए को गैर जातीय युवा मुद्दे से जोड़ने का रास्ता खुलता है। हालांकि सपा के सामने यह मैदान खाली नहीं है।
प्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्ष 2023 में खेल नीति लागू की, जिसमें खिलाड़ियों के लिए आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य बीमा, खेल विकास कोष, उत्कृष्टता केंद्र और उच्च प्रदर्शन केंद्रों की व्यवस्था की गई है।
सरकार ग्राम पंचायतों से जिलों तक खेल मैदान, मिनी स्टेडियम और स्टेडियम विकसित करने का दावा कर रही है। स्पोर्ट्स कालेज और सेंटर आफ एक्सीलेंस विकसित करने की भी योजना है। खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी से भी जोड़ा जा रहा है।
इसकी काट के लिए ही सपा, खिलाड़ियों से यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि घोषणा का लाभ मैदान तक कितना पहुंचा। जिससे चुनाव में नीति बनाम क्रियान्वयन का सवाल खड़ा किया जा सके।
हालांकि खेल ऐसा मुद्दा है, जिसका चुनावी असर तभी बनेगा जब उसे रोजगार, शिक्षा और स्थानीय विकास से जोड़ा जाए। केवल घोषणाओं से युवाओं को आकर्षित करना आसान नहीं। उन्हें यह भरोसा चाहिए कि मैदान बनेगा, कोच आएगा, प्रतिभा की पहचान होगी और खेल छोड़ने के बाद भी भविष्य सुरक्षित रहेगा। जो भी राजनीतिक दल यह विश्वास जीत पाएगा, वही इस चुनावी ‘खेल’ में आगे निकलेगा।
