उत्तर प्रदेश चुनाव: सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर फंसा पेंच, 60 सीटों से शुरू होगा मोलभाव
सपा और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर गतिरोध बना हुआ है।

HighLights
सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर गतिरोध।
कांग्रेस की 200 सीटों की दावेदारी, 60 से मोलभाव।
जीत की संभावना सीटों के बंटवारे का मुख्य आधार।
दिलीप शर्मा, लखनऊ। विधान सभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की गांठ अब सीटों के बंटवारे पर टिक गई है। कुछ दिन पहले तक 150 सीटों से कम न लड़ने की बात को हवा देने वाली कांग्रेस ने इससे आगे बढ़कर 200 सीटों पर दावेदारी की है। अब इस गांठ को खोलने के लिए 60 सीटों से मोलभाव शुरू करने की तैयारी में है।
इस मोलभाव में पिछले चुनावों के आंकड़ों पर तो नजर डाली ही जाएगी, परंतु सबसे बड़ा पैमाना जीत की संभावना का होगा। हालांकि इसमें सपा के सामने चुनौती कांग्रेस की महत्वाकांक्षा को गठबंधन के दायरे में रखने के साथ अपनी चुनावी जमीन और दावेदारों का संतुलन साधने की है।
कांग्रेस और सपा में खींचतान संभव
गठबंधन में कांग्रेस अधिक सीटें लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बढ़ाना चाहती है, जबकि सपा चाहती है कि गठबंधन उसके नेतृत्व और रणनीति के इर्द-गिर्द बना रहे। इसलिए यह परखा जाएगा कि किसे लड़ाने से गठबंधन की जीत की संभावना बढ़ सकती है।
अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि गठबंधन में बात सीट की नहीं, बल्कि जीत की है। ऐसे में हर सीट पर दावेदारी नहीं, संगठन की सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व, संभावित प्रत्याशी और सामाजिक समीकरण भी देखे जाएंगे। साथ में चुनावी प्रदर्शन पर भी बात होगी। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने 399 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और केवल दो सीटों पर जीती थी। सपा के लिए यह आंकड़ा सवाल उठाने का आधार बन सकता है।
वहीं, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। इसके साथ कांग्रेस इस दावे को भी आधार बना रही है कि तब गठबंधन को बड़ी जीत राहुल गांधी के कारण मिली। इन नतीजों को विधान सभा सीटों के लिहाज से देखें तो सपा को 183 और कांग्रेस को 39 क्षेत्रों में बढ़त मिली थी।
320 सीटों तक का आंकड़ा
सपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सपा द्वारा अब तक कराए सीटों के आकलन में पिछले चुनाव में जीती हुई सीटों के साथ इस बार 320 सीटों तक का आंकड़ा पक्ष में दिख रहा है। पार्टी ने लगभग सभी सीटों की मैपिंग की है। इसी आधार पर बातचीत 60 से 65 सीटों के साथ शुरू की जाएगी।
सपा के सामने सबसे पेचीदा सवाल अपने ही दावेदारों का है। चुनाव से पहले कई क्षेत्रों में पार्टी नेताओं ने टिकट का इशारा किया जा चुका है, यदि उन सीटों पर कांग्रेस को जगह दी जाती है तो स्थानीय असंतोष उभर सकता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस को बहुत कम सीटें मिलने पर उसके कार्यकर्ताओं में यह संदेश जा सकता है कि गठबंधन में उसकी भूमिका सीमित रखी जा रही है। इसलिए बातचीत में कुछ सीटें प्रतिष्ठा का प्रश्न बनेंगी, जबकि कुछ पर अदला-बदली या प्रत्याशी के आधार पर समझौता संभव होगा।
