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'चालीसा पढ़ते ही ठीक हो गया था कैमरा’, फिल्म हनुमान अंश के एक्टर ने लखनऊ में बताया रोचक किस्सा

Published: Tue, 08 Sep 2026 06:47 AM (IST)

अभिनेता शोभिनव सत्य ने 'हनुमान अंश' में बाबा नीम करौली का किरदार निभाने को आध्यात्मिक यात्रा बताया। उन्होंने साझा किया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. शोभिनव सत्य ने बाबा नीम करौली का किरदार निभाया।

  2. हनुमान चालीसा पढ़ने से शूटिंग का कैमरा ठीक हुआ।

  3. फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर 115 करोड़ कमाए।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। फिल्म हनुमान अंश में प्रसिद्ध संत बाबा नीम करौली का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्य अपनी इस भूमिका को अच्छे कर्मों का फल और बाबा का विशेष आशीर्वाद मानते हैं। वह शूटिंग एक अध्यात्मिक यात्रा और जीवन को नई दिशा देने वाला अनुभव मानते है। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान एक दिन कैमरा काम नहीं कर रहा था। तब हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू किया गया। पाठ खत्म होते ही कैमरा ठीक हो गया। सोमवार को त्रिवेणीनगर स्थित ब्राइटलैंड इंटर कालेज में आए शोभिनव सत्य से मनीषा गोस्वामी ने विस्तृत बात की। प्रमुख अंश।

फिल्म को लेकर एक किस्सा बहुत चर्चा में है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने पर कैमरा ठीक हो गया, क्या यह सच है?
जब भी शूटिंग के दौरान काम में कोई बाधा आती थी, तो पूरी टीम हनुमान चालीसा का पाठ करने लगती थी। एक दिन कैमरा खराब होने पर टीम ने हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू किया। जब तक पाठ खत्म हुआ तब तक कैमरा ठीक हो गया। सेट पर शराब, मांसाहार और गाली-गलौज या भद्दे शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी थी।

बाबा नीम करौली जैसे संत का किरदार निभाने का अनुभव कैसा रहा?
यह बाबा जी का विशेष आशीर्वाद और शायद मेरे अच्छे कर्मों का फल है। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मेरी पहली फिल्म बाबा नीम करौली जी के जीवन पर आधारित होगी। शूटिंग मेरे लिए आध्यात्मिक यात्रा रही।

शूटिंग के दौरान का कोई ऐसा पल जब आप भावुक हो गए हों?
सबसे अधिक भावुक करने वाला पल था ट्रेन की यात्रा वाला दृश्य, जिसमें बाबाजी को टिकट न होने पर उतार दिया जाता है। जब मुझे नीम करौली का आफर आया तो मैं भावुक हो गया। ऐसा लगा जैसे बाबा मुझे आशीर्वाद दे रहे हैं।

इस किरदार से आपके जीवन में सबसे बड़ा क्या बदलाव आया?
इस किरदार को मैंने निभाया नहीं है, बल्कि जीया है। इससे मेरे जीवन में वैचारिक परिवर्तन आया है। जीवन में हमेशा मर्यादा में रहने की सीख मिली।

बाबा का कौन-सा संदेश आत्मसात करना और लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं?
मैं बाबा के संदेश भूखों को भोजन और भक्तों को प्रसाद को आत्मसात करना चाहता हूं। इस संदेश को फिल्म के जरिए जन-जन तक पहुंचाना चाहता हूं।

कभी सोचा था कि जिस कालेज में छात्र थे, वहीं मुख्य अतिथि होंगे?
हर बच्चे का सपना होता है कि जहां वह पढ़ रहा है एक दिन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। यह मेरे लिए बहुत ही यादगार पल है।

जेन-जी अनुप्रिया ने फिल्म में लगाई जमा पूंजी

फिल्म की प्रोड्यूसर जेन-जी हैं। 21 साल की अनुप्रिया नागर ने अपनी तीन साल की कमाई इसमें लगा दी। उन्हें यूके की यूनिवर्सिटी आफ बाथ में इकोनामिक्स की पढ़ाई के दौरान एक विदेशी से बाबा के बारे में पता चला था। मात्र दो करोड़ की लागत में बनी फिल्म अब तक घरेलू बाक्स आफिस पर 115 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने इस फिल्म का निर्देशन किया।

उन्होंने 2006 में गोरखपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। उसी वर्ष वह कैंची धाम गए। यहीं पहली बार वह नीम करौली बाबा की शिक्षा से रूबरू हुए। वहीं से ‘हनुमान अंश’ की कहानी की प्रेरणा मिली। इसमें लखनऊ के हनुमान सेतु मंदिर से लेकर उत्तराखंड के नीम करौली धाम तक के सफर को दिखाया गया है।