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    यूपी की 53 प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में से सिर्फ 6 के पास है ये 'खास दर्जा', एडमिशन लेने से पहले देख लें लिस्ट

    Updated: Thu, 21 May 2026 07:00 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश के 53 निजी विश्वविद्यालयों में से केवल छह को ही यूजीसी से 12बी का दर्जा मिला है। यह स्थिति संस्थानों को विकास अनुदान, शोध निधि और छात्रों ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 53 निजी विश्वविद्यालयों में से सिर्फ छह को 12बी दर्जा।

    2. 12बी दर्जा विकास अनुदान, शोध निधि के लिए आवश्यक।

    3. योग्य फैकल्टी, शैक्षणिक गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत।

    विवेक राव, लखनऊ। प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन गुणवत्ता के पैमाने पर अधिकांश संस्थान अभी पीछे हैं। प्रदेश के 53 निजी विश्वविद्यालयों में सिर्फ छह को ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से 12बी पत्र मिल सका है।

    यह वही दर्जा है, जिसके आधार पर संस्थान को यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार से विकास अनुदान, रिसर्च फंड और कई शैक्षणिक योजनाओं का लाभ मिलता है। कई संस्थानों ने इसमें अभी तक आवेदन तक नहीं किया है।

    यूजीसी 12बी को संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध क्षमता और आधारभूत ढांचे का भी प्रमाण माना जाता है। इस पत्र के बिना विश्वविद्यालयों को बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट, आधुनिक लैब, लाइब्रेरी, छात्रावास और नए शैक्षणिक ढांचे के विकास के लिए केंद्रीय सहायता नहीं मिल पाती।

    इसका सीधा असर छात्रों और शिक्षकों दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार 12बी दर्जा मिलने से छात्रों को यूजीसी की कई महत्वपूर्ण फेलोशिप और छात्रवृत्तियों का लाभ मिलता है। वहीं प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं को रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध हो पाती है।

    इसके अलावा नैक ग्रेडिंग और एनआइआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए भी यह दर्जा बेहद अहम  माना जाता है। 12बी पत्र पाने के लिए विश्वविद्यालय में पर्याप्त संख्या में नेट या पीएचडी योग्य स्थायी शिक्षक, मजबूत शैक्षणिक ढांचा, हाईटेक लैब, कंप्यूटर सेंटर, लाइब्रेरी और अन्य आधारभूत सुविधाएं होना जरूरी है।

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    सबसे पहले विश्वविद्यालय को यूजीसी की धारा 2(एफ) के तहत मान्यता मिलती है। इसके बाद संस्थान 12बी के लिए आवेदन करता है। इसके बाद यूजीसी की विशेषज्ञ समिति कैंपस का निरीक्षण करती है। सकारात्मक रिपोर्ट मिलने पर पत्र जारी किया जाता है।

    सात ने किया है आवेदन

    प्रदेश के कई निजी विश्वविद्यालयों ने अभी तक 12बी के लिए आवेदन ही नहीं किया है, जबकि सात विश्वविद्यालयों के आवेदन यूजीसी में लंबित हैं। आवेदन के बाद भी उन्हें अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।

    उच्च शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है तो उन्हें केवल भवन और प्रवेश संख्या बढ़ाने के बजाय रिसर्च, योग्य फैकल्टी और शैक्षणिक गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देना होगा। तभी प्रदेश के छात्र राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे।

    इनके पास है 12बी पत्र

    तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद, आइआइएमटी यूनिवर्सिटी मेरठ, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ, द ग्लोकल यूनिवर्सिटी सहारनपुर, जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा औरगलकोटिया यूनिवर्सिटी गौतमबुद्धनगर।